अल्का लाम्बा की मनीष सिसोदिया को खुली चिठ्ठी, दिल्ली गृह सचिव के विरुद्ध संदिग्ध भ्रष्टाचार की जांच की मांग

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सेवा में,
श्री मनीष सिसोदिया
उप-मुख्यमंत्री,दिल्ली सरकार,

आज ही मैंने जनता के रिपोटर में छपी एक स्टोरी पढ़ी जिसकी हैडलाइन थी “Revealed- How Delhi Home Secretary ‘Plotted Coup’ against his own government.
स्टोरी पढ़ कर मेरा शक विश्वास में बदल गया की दिल्ली सरकार के गृह एवम् वित्त सचिव एस.एन.सहाई सचिवालय में बैठ कुछ और नहीं बल्कि केंद्र सरकार और LG के इशारे पर दिल्ली सरकार को कमजोर करने का ही काम कर रहे हैं।

मैं यह सब यूँ ही नहीं कह रही हूँ,दिल्ली सचिवालय में 23 सितम्बर 2015 को “शाहजहानाबाद रेडिलोपमेंट कॉर्पोरेशन” ‪SRDC‬ की मीटिंग, जिसमें वित्त एवम् गृह सचिव एस.एन. सहाई,‪ UD‬ सचिव चेतन सांघी, SRDC ‪MD‬ फैज़ हाश्मी,उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया,‪ PWD‬ मंत्री सतेंद्र जैन, बोर्ड में सदस्य के तौर पर अन्य सदस्यों के साथ में भी उस मीटिंग में शामिल थी।

लगभग एक घंटे तक मीटिंग चलने के बाद मनीष सिसोदिया और सतेंद्र जैन ने मीटिंग को आगे जारी रखने की बात कह कर अपनी अगली मीटिंग के लिये वहाँ से चले गये,हम सब सदस्यों ने मीटिंग को आगे जारी रखने का फैसला लिया,

मीटिंग जैसे ही दुबारा शुरू हुई, सचिव एस.एन.सहाई ने मीटिंग में दिल्ली सरकार के हर फैसले पर प्रश्न उठाना शुरू कर दिया और पूरी कोशिश की कि बाकी सभी सदस्य भी उनकी बात से सहमत हो जायें कि जिस ट्राम को चलाने का फैसला केंद्र सरकार और LG एक बार ले चुके हैं उसे दिल्ली सरकार कैसे इतनी आसानी से पलट सकती है?

यह गलत तरीका है,और उन्होंने सब के सामने दिल्ली सरकार के फैसले पर अपनी नाराजगी भी जाहिर की, इस पर मैंने जवाब दिया, “सहाई सर जहाँ ‘ट्राम’ को चलाने के लिये जनता के 800 करोड़ रुपयों का खर्चा आना है वहीं दिल्ली सरकार के मुताबिक ‘ई-ट्राम’ को चलाने में केवल 20 करोड़ रुपए का ही खर्च आयेगा और समय भी कम लगेगा, जहाँ ट्राम को चलाने में 3 से 4 साल तक का समय लग सकता है वहीं ई-ट्राम को केवल 6महीनों से 1 साल में ही चालू किया जा सकता है। जो काम पिछले इतने सालों से रुका पड़ा है, लोगों को परेशानियाँ भी आ रही है, वह काम अब कम खर्च, कम समय में जल्द पूरा कर लोगों को राहत देने के बारे में हमें सोचना चाहिये.”

जिस पर बोर्ड के सभी सदस्यों ने अपनी मोहर लगा दी सिर्फ वित्त सचिव एस एन सहाई को छोड़ कर। सहाई ने जवाब में कहा कि मैं वित्त सचिव हूँ, पैसों की चिंता मुझे होनी चाहिये, मेरे पास तो अब तक कोई प्रस्ताव नहीं आया है, 800 करोड़ ख़र्च होगें या फिर 20 करोड़ यह वही तय करेगें।

ये हम सब के लिये बहुत चौकाने वाली बात थी।

इसी दौरान पता चलता है की SRDC के मुद्दे पर केंद्र ने दो बार मीटिंग बुलाई जिसमें दिल्ली से सांसद डॉ हर्ष वर्धन भी शामिल हुये और उन्होंने भी दिल्ली सरकार के इस प्रस्ताव पर नाराजगी जताई जैसी नाराजगी वित्त सचिव एस एन सहाई ने मीटिंग में दिखाई थी।

मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही कि जो काम सिर्फ 20 करोड़ में हो सकता है उस पर केंद्र सरकार, LG और दिल्ली सरकार में वित्त सचिव सहाई क्यों 800 करोड़ रुपये ख़र्च करना चाहते हैं?

इन सब की जनता के 800 करोड़ ख़र्च करने में क्या रूचि हो सकती है? क्या यह जनता के पैसों की बर्बादी नहीं होगी?

क्या LG और वित्त एवम् गृह सचिव सहाई 800 करोड़ का खर्च किसी को फायदा पहुँचाने के लिये करना चाहते है? कहीं इस प्रोजेक्ट में सहाय जी का अपना कोई इंटरेस्ट तो नहीं?

या फिर केंद्र में बैठी मोदी सरकार ने ठान ही लिया है की दिल्ली सरकार के हर काम में अपने किसी अधिकारी के माध्यम से रोड़ा ही अटकाते रहना है? दिल्ली सरकार को कमजोर करना है?

ये सारे सवाल इसलिए उठते हैं क्यों की उस दिन प्रोजेक्ट रोके जाने से सहाय जी जिस तरहा सरकार के फैसले का खुले आम विरोध कर रहे थे उसे जनता के रिपोटर के उपरोक्त रिपोर्ट से जोड़ कर देखें तो ऐसा लगता है की उन्होंने किसी बड़ी साजिश के तहत ये सब किया है।

मुझे उम्मीद है की दिल्ली सरकार जनता के पैसों की बर्बादी नहीं होने देगी और ना ही किसी के दबाव में आयेगी।

आप से अनुरोध है की इस घटना की पूरी जाँच करायें,ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही जरूर होनी चाहिये जो जनता द्वारा चुनी गई सरकार को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।
अलका लाम्बा
सदस्य, SRDC
विधायक

Alka Lamba’s above letter was first posted on her Facebook and Twiiter pages

1 COMMENT

  1. Harjinder K@ur ‏@Harjinder15275 5h5 hours ago
    अबतो RTकरते भी दहशत होतीहै जानेकब कोई करोड़ो का केस ठोकदे कहाँसे भरेंगे हमारे अकॉउंट मे तो15लाख भी नहीआये @ArvindKejriwal #RT2DefameJaitley

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