VIDEO: मायावती को ‘बुआ’ कहकर संबोधित करने वाले पत्रकार पर भड़के अखिलेश यादव, देखें वीडियो

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समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन टूटने की चर्चाओं के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने मंगलवार (4 जून) को खुद आकर स्थिति साफ की है और फिलहाल गठबंधन पर ब्रेक लगाने की पुष्टि की है। मायावती ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फेंस में कहा कि वह समाजवादी पार्टी के साथ अपने गठबंधन से विराम ले रही हैं। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा “यह एक स्थायी विराम नहीं है।” उन्होंने समाजवादी पार्टी को अपने कैडर में सुधार लाने के लिए कहा।मायावती ने कहा है कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा उपचुनाव अकेले लड़ेगी।

(PTI file photo)

वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मायावती के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने भी कह दिया है कि अगर ऐसा है तो हम भी अकेले लड़ने की तैयारी करेंगे। मंगलवार को अखिलेश ने पत्रकारों से कहा, ”गठबंधन अगर टूटा है और जो बातें रखीं गई हैं, उसके बारे में सोच विचार कर बातें रखूंगा। अगर उप चुनावों में गठबंधन है ही नहीं तो हम अपने समाजवादी पार्टी की तैयारी करेंगे। सपा भी पार्टी राय मशविरा करने के बाद उपचुनावों में 11 सीटों पर अकेले लड़ेगी। पार्टी इस बारे में विचार करेगी। हमारे लिए इस समय गठबंधन से ज्यादा जो राजनीतिक हत्या हुई है वो जरूरी है।”

अखिलेश ने कहा कि अगर रास्ते अलग-अलग हैं तो उसका भी स्वागत और बधाई सबको। सब अपने अपने रास्ते चलेंगे। इस दौरान जब एक रिपोर्टर ने अखिलेश यादव से सवाल पूछते वक्त बसपा प्रमुख मायावती को ‘बुआ’ कहकर संबोधित किया तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव भड़क गए और उन्होंने रिपोर्टर को सलाह देते हुए कहा कि आपकों बुआ नहीं बोलना चाहिए, क्योंकि आप एक पत्रकार हैं।

गठबंधन टूटने पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा- पार्टी सोच-समझकर इस पर फैसला करेगी

गठबंधन टूटने पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा- पार्टी सोच-समझकर इस पर फैसला करेगी

Posted by ABP News on Tuesday, June 4, 2019

मायावती ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुछ सीटों के लिए संभावित उपचुनाव अपने बलबूते लड़ने की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया है कि इससे सपा के साथ गठबंधन के भविष्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा, गठबंधन बरकरार रहेगा। मायावती ने मंगलवार को अपने बयान में कहा कि उनकी पार्टी अपने बलबूते उपचुनाव लड़ेगी, लेकिन सपा से गठबंधन बरकरार रहेगा। उन्होंने कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव से उनके रिश्ते कभी खत्म नहीं होने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि सपा के साथ यादव वोट भी नहीं टिका रहा। अगर सपा प्रमुख अपने राजनीतिक कार्यों के साथ अपने लोगों को मिशनरी बनाने में सफल रहे तो साथ चलने की सोचेंगे। फिलहाल हमने उपचुनावों में अकेले लड़ने का फैसला किया है। बसपा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी को समाजवादी पार्टी के आधार वोट से कोई फायदा नहीं हुआ है।लोकसभा चुनाव के परिणाम की समीक्षा के आधार पर बसपा प्रमुख ने चुनाव में हार के लिए सपा को जिम्मेदार ठहराते हुये कहा कि लोकसभा चुनाव में यादव मतदाताओं ने उत्तर प्रदेश में सपा बसपा का साथ नहीं दिया।

यादव मतदाताओं ने गठबंधन का नहीं किया समर्थन  

हालांकि उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से कोई मनमुटाव नहीं होने की भी बात कही है। मायावती ने कहा कि यादव मतदाताओं ने गठबंधन का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा, “अगर यादवों ने गठबंधन को भारी संख्या में वोट दिया होता तो डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और अक्षय यादव जैसे वरिष्ठ सपा नेता यादव बहुल सीटों से नहीं हारते। यह समाजवादी पार्टी के लिए चिंता का विषय है।”

मायावती ने कहा, “हालांकि, हम राजनीतिक मजबूरियों को नजरअंदाज नहीं कर सकते और हम विधानसभा उपचुनाव लड़ेंगे। हालांकि, यह पथ का अंत नहीं है। अगर समाजवादी पार्टी अपने कार्यकतार्ओं में एक मिशनरी उत्साह पैदा करती है और अपने प्रदर्शन में सुधार करती है, तो हम देखेंगे।” मायावती ने अखिलेश यादव और उनके परिवार के साथ अपने संबंधों के बारे में बात की और कहा कि उन्होंने उन्हें बहुत सम्मान दिया। उन्होंने कहा, “हमारा संबंध समाप्त नहीं होगा हालांकि राजनीति एक और पहलू है।”

उल्लेखनीय है कि हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से नौ भाजपा विधायकों और सपा, बसपा के एक एक विधायक के सांसद बनने के बाद रिक्त होने वाली 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव संभावित है। इन सीटों पर होने वाले उपचुनाव में बसपा के अपने बलबूते चुनाव लड़ने का फैसला मायावती की अध्यक्षता में सोमवार को हुयी पार्टी नेताओं की बैठक में किया गया था। मायावती ने मंगलवार को अपने बयान के जरिये इसकी आधिकारिक पुष्टि की।

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