कोर्ट में नक्शा फाड़ने के लिए हिंदू महासभा ने राजीव धवन के खिलाफ बार काउंसिल में की शिकायत

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अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद केस की सुनवाई के दौरान बुधवार को मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन द्वारा नक्शा फाड़े जाने पर ‘अखिल भारतीय हिन्दू महासभा’ ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया में शिकायत की है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील राजीव धवन
फाइल फोटो: राजीव धवन

अयोध्या मामले के एक हिन्दू पक्षकार ‘अखिल भारतीय हिन्दू महासभा’ ने मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन द्वारा उच्चतम न्यायालय में नक्शा फाड़े जाने की शिकायत भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) से की है और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। बीसीआई को प्रेषित पत्र में महासभा ने धवन द्वारा अदालत कक्ष में नक्शा फाड़ने की शिकायत की है।

अखिल भारतीय हिंदू महासभा के प्रवक्ता प्रमोद पंडित जोशी के हस्ताक्षर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि बार काउंसिल धवन के खिलाफ मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करे। बार काउंसिल में यह पत्र आज प्राप्त हुआ है। पत्र में कहा गया है कि धवन के इस कृत्य से ‘सुप्रीम कोर्ट बार’ का अपमान हुआ है।

गौरतलब है कि शीर्ष अदालत में बुधवार को जब हिंदू महासभा के वकील विकास कुमार सिंह ने किशोर कुणाल की लिखित किताब ‘अयोध्या रिविजिटेड’ रिकॉर्ड में लाना चाहा तथा एक नक्शा भी पेश किया था, जिस पर धवन भड़क गए थे और नक्शे को फाड़ दिया था। हालांकि, बाद में जब इस मामले में अदालत कक्ष में चर्चा हुई तो धवन ने कहा कि उन्होंने नक्शा मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के कहने पर फाड़ा था।

राजीव धवन ने नक्शा फाड़ने को लेकर कहा था कि, मैंने कहा था कि मैं इसे फेंक रहा हूं। चीफ जस्टिस ने कहा कि जो करना है करो, तो मैंने फाड़ दिया। इसलिए मैं यह कहता हूं कि यह अदालत की अनुमति से था। अब वो सोशल मीडिया पर चल रहा है। इस पर सीजेआई रंजन गोगाई ने कहा कि आप सफाई दे सकते हैं कि CJI ने फाड़ने को कहा था।

गौरतलब है कि, सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के मुकदमे की सुनवाई पूरी हो गई है। इससे पहले, भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 17 अक्टूबर तक समाप्त होने वाले भूमि विवाद मामले में सभी दलीलें मांगी थीं। अब इस समय सीमा को एक दिन पहले कर दिया गया है।सुनवाई खत्म होने के साथ ही अयोध्या प्रशासन ने 10 दिसंबर तक क्षेत्र में धारा 144 लगा दी है।

उल्लेखनीय है कि, संविधान पीठ अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश देने संबंधी इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई कर रही है।

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