एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने आइसा की अध्यक्ष कंवलप्रीत को पटक-पटक कर मारा

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आज़ादी की अभिव्यक्ति के लिए देशभर के कालेज और कैम्पसों में आयोजित धरनो, प्रर्दशनों और आन्दोलनों पर तुरन्त ही राजनीति गरमाने लगती है। ताजा मामले में वाम समर्थित ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन ‘आइसा’ की ओर से दिल्ली यूनिवर्सिटी में एक सार्वजनिक सभा का आयोजन किया गया था, जिसमें कविता कृष्णन को भी अपनी बात रखनी थी। इस आयोजन को लेकर कथित तौर पर बीजेपी की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ‘एबीवीपी’ ने बाधित कर दिया।
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एबीवीपी के सदस्यों पर आइसा के कुछ सदस्यों पर ‘‘हमला’’ करने का भी आरोप है। ये आयोजन जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए ‘आइडिया ऑफ यूनिवर्सिटी’ नाम से सभा का कार्यक्रम करने के लिए किया गया था।
कविता कृषनन ने एबीवीपी के कार्यकर्ताओं का विरोध करते हुए अपने ट्विट में कहा कि डीयू में आइसा की अध्यक्ष कंवलप्रीत को एबीवीपी के कार्यकर्ताओं पटक-पटक कर मारा इसके साथ ही अन्य छात्रों को भी गम्भीर रूप से चोटें आई। जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी हुई एबीवीपी के कार्यकर्ताओं की गतिविधियों देखती रही। दिल्ली के ही पत्रकार हसन काज़िम ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा की एबीवीपी मूल रूप से गुंडों का एक गिरोह है। अगर आपको इनकी गुंडागर्दी देखनी हो तो दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैम्पस में देखिये जहां इन्हांेने तोड़फोड़ मचाई और लोगों से मारपीट कर आयोजन को बंद कराने का प्रयास किया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आइसा के कार्यकर्ता सन्नी कुमार ने आरोप लगाया, तंवर की अगुवाई में एबीवीपी के सदस्य सभा स्थल पर आए और पर्चे एवं पोस्टर फाड़ दिए। उन्होंने डीयू इकाई की हमारी अध्यक्ष कवलप्रीत कौर पर भी हमला किया और कविता कृष्णन को बोलने से रोक दिया। बाद में पुलिस को कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। जबकि दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष और एबीवीपी के सदस्य अमित तंवर ने छात्रों पर हमला करने या सभा को बाधित करने के सभी आरोपों को नकारा। फिलहाल पुलिस अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया कि कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।

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