बैंक के चक्कर काटने से तंग आकर पूर्व फौजी ने की आत्महत्या, नोटबंदी में हुई अब तक की सबसे दर्दनाक मौत

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नोटबंदी के कारण बैंक से पैसे न मिल पाने की वजह से एक पूर्व फौजी ने गोली मार कर आत्महत्या कर ली। 54 वर्षीय राकेश चंद आगरा के रहने वाले है जो ताजगंज स्थित एसबीआई ब्रांच से अपने इलाज के लिए रोज पैसे लेने जा रहे थे लेकिन उनको कैश नहीं मिल पा रहा था। लगातार चक्कर काटने से क्षुब्ध होकर राकेश ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से शनिवार की सुबह खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

राकेश चंद

ताजगंज के गांव बुढ़ाना में शनिवार सुबह सीआरपीएफ के रिटायर्ड सिपाही राकेश चंद्र ने घर में लाइसेंसी रायफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। गोली की आवाज सुनकर परिवारीजन आ गए। राकेश चंद्र को अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

मीडिया रिपोट्स के अनुसार, फौजी राकेश चंद के बेटे सुशील ने बताया कि नोटबंदी के बाद से घर में आर्थिक संकट खड़ा हो गया। पिता का इलाज भी नहीं हो पा रहा था। पिता जी का खाता ताजगंज स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में है। पिछले दिनों उनका एटीएम कार्ड ब्लाक हो गया था। पिता जी नोट निकालने के लिए कई बार बैंक गए लेकिन रुपये नहीं मिले। सुशील ने बैंककर्मियों को बताया कि उसके पिता बीमार हैं। वह सीआरपीएफ से रिटायर्ड हैं। उन्हें इलाज की जरूरत है। इसके बावजूद बैंककर्मियों ने रुपये नहीं दिए।

बुढ़ाना निवासी राकेश चंद्र पुत्र हरीबाबू सीआरपीएफ में हेड कांस्टेबल थे। 2012 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी।टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, राकेश कश्मीर के बारामुला में साल 1990 में हुए हमले के दौरान अपने सीने पर पांच गोलियां खाई थीं। इसके बाद से लगातार उनके हृदय संबंधी दिक्कतों का इलाज चल रहा था। नोटबंदी के बाद से उनके इलाज के लिए रकम की कमी होने लगी थी।

परिजनों ने बताया कि शनिवार सुबह पत्नी कुसुम, बेटी तनु और कीर्ति घर की पहली मंजिल पर कमरे में थीं। बड़ा बेटा सुशील नौकरी पर गया था। छोटा बेटा भुवनचंद्र घर के बाहर था। सुबह तकरीबन 8:30 बजे राकेश अपने कमरे में चले गए। कमरे से अचानक गोली चलने की आवाज आई।

इस पर परिवारजन कमरे में दौड़ पड़े। राकेश खून से लथपथ थे। बेटे सुशील ने बताया कि पिता ने अपनी लाइसेंसी रायफल से खुद को गोली मार ली। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।

 

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