कर्नाटक के बाद अब मध्य प्रदेश पर भगवा पार्टी की नजर, BJP नेता बोले- ‘ऊपर से आदेश मिले तो 24 घंटे के अंदर गिरा देंगे कमलनाथ सरकार’, सीएम ने किया जोरदार पलटवार

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कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सत्ता में वापसी के बाद अब कायास लगाए जा रहे हैं कि मध्य प्रदेश में भी भगवा पार्टी कुछ बड़ा उलटफेर कर सकती है। भाजपा ने दावा किया है कि आंतरिक कलह से कर्नाटक की तरह मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार भी जल्दी ही गिर जाएगी। मध्य प्रदेश में विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि हमारे ऊपर वाले नंबर एक या नंबर दो का आदेश हुआ तो 24 घंटे भी आपकी (कमलनाथ) सरकार नहीं चलेगी। हालांकि, कांग्रेस का दावा है कि कमलनाथ की सरकार गिराने के लिए बीजेपी नेताओं को सात जन्म लेने पड़ेंगे।

Photo: Indian Express

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, भाजपा के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा, ‘हमारे ऊपर वाले नंबर 1 या 2 का आदेश हुआ तो 24 घंटे भी आपकी (कमलनाथ) सरकार नहीं चलेगी।’ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के इस बयान पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जोरदार पलटवार किया है।

सीएम कमलनाथ ने भाजपा नेता भार्गव पर पलटवार करते हुए कहा, “आपके ऊपर वाले नंबर एक और नंबर दो समझदार हैं, इसलिए आदेश (सरकार गिराने की) नहीं दे रहे हैं। आप (गोपाल भार्गव) चाहें तो अविश्वास प्रस्ताव (नो कॉन्फिडेंस मोशन) ले आएं।” वहीं, मध्य प्रदेश सरकार की कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन जैसी स्थिति पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि अगर प्रदेश में कांग्रेस सरकार गिरती है तो वह इसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने एएनआई से कहा कि हम यहां (मध्य प्रदेश) सरकार के गिरने का कारण नहीं बनेंगे। कांग्रेस के नेता खुद अपनी सरकार के गिरने के लिए जिम्मेदार हैं। कांग्रेस में एक आंतरिक कलह है और बसपा-सपा का समर्थन हासिल है। शिवराज ने आगे कहा कि अगर कुछ ऐसा होता है तो हम कुछ नहीं कर सकते हैं। पूर्व सीएम के इस बयान के बाद से प्रदेश में कर्नाटक जैसी सियासी स्थिति के कयास लगाए जा रहे हैं।

वहीं, दूसरी ओर भाजपा नेता के बयान पर पलटवार करते हुए कमलनाथ सरकार के मंत्री और कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा ने हमारे लिए दिक्कतें खड़ी करने की सभी कोशिशें की लेकिन यह कमलनाथ सरकार है नाकि कुमारस्वामी सरकार। इस सरकार में हॉर्सट्रेडिंग करने के लिए उन्हें (विपक्ष) को सात जन्म लेने पड़ेंगे।

बता दें कि कर्नाटक में पिछले काफी समय से जारी सियासी उठापटक एक तरह से विराम लग गया है। कर्नाटक में कांग्रेस-जद(एस) की सरकार मंगलवार (24 जुलाई) को विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने में विफल रही और सरकार गिर गई। इसीके साथ राज्य में करीब तीन हफ्ते से चल रहे राजनीतिक ड्रामे का अंत हो गया। मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी को संख्या बल का साथ नहीं मिला और उन्होंने विश्वास मत प्रस्ताव पर चार दिन की चर्चा के खत्म होने के बाद हार का सामना किया।

विधानसभा में पिछले गुरुवार को उन्होंने विश्वास मत का प्रस्ताव पेश किया था। विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार ने ऐलान किया कि 99 विधायकों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया है जबकि 105 सदस्यों ने इसके खिलाफ मत दिया है। इस प्रकार यह प्रस्ताव गिर गया। एचडी कुमारस्वामी ने राजभवन जाकर राज्यपाल वजुभाई वाला से मिलकर अपना इस्तीफा सौंप दिया। राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

 

 

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