मदरसे को लेकर योगी आदित्यनाथ ने दस साल पहले एक पत्रकार की किताब में क्या लिखा था ?

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जो बात आज शिया वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कही है उसको आज से 10 वर्ष पहले भाजपा प्रवक्ता और वरिष्ठ पत्रकार रहे नवीन कुमार जिंदल ने अपनी किताब ‘मदरसे बेनकाब’ में नवीन कुमार ने लिखी थी। 2008 में इस किताब का विमोचन तत्कालीन आरएसएस प्रमुख के एस सुदर्शन ने करते हुए कहा था कि मदरसों में अगर आधुनिक शिक्षा नहीं दी गई तो ये अपनी कौम के ही दुश्मन बन जाएंगे।

इस किताब की सबसे बड़ी बात यह है कि इसकी प्रस्तावना में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और तत्कालीन लोक सभा सांसद योगी आदित्यनाथ ने लिखा कि इस्लाम और इसके अनुयायी पिछले 13 सौ वर्षों से भारत से किसी न किसी रूप से जुड़े रहे हैं। आदित्यनाथ के अनुसार, जिस क्षेत्र में मुसलमान का प्रभुत्व है वह क्षेत्र दार-उल-इस्लाम है और जहां गैर मुसलमान का प्रभुत्व है उस क्षेत्र को दार-उल-हरब कहा जाता है।

किताब में नवीन कुमार जिंदल ने मदरसों में समलैंगिक संबंधों का भी जिक्र किया है जिसके बाद तमाम तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। इस किताब के दूसरे प्रस्तावक बीजू जनता दल के लोक सभा के नेता सांसद भर्तिहरी मेहताब ने भी लिखा है कि किताब के अध्धयन के बाद लगता है कि सरकार का शैक्षणिक संस्थानों पर कुछ अंकुश होना चाहिए।पूरे देश के लिए समान शिक्षा नीति होनी चाहिए और क्षेत्रीय भाषाओं के अलावा आधुनिक शिक्षा छात्रों को मिलनी चाहिए।

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जिंदल अब पत्रकार से भाजपा के प्रवक्ता बन गए हैं और आदित्यनाथ ने अब लोकसभा सांसद से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक का कामयाब सफर तै कर लिया है।

आज जो रिज़वी कह रहे हैं उन्हें शिया वक़्फ़ बोर्ड की राय समझने की हिमाक़त मत कीजिये। किसी भी रिज़वी, नक़वी, इल्मी या हुसैन में इतनी हिम्मत नहीं है कि वो भाजपा में रहकर या फिर उसके रहमो करम से मिले पद पर आसीन रहते  अपनी अक़्ल का इस्तेमाल करे। भाजपा ऐसे ग़ुलामों को उनकी हदों में रखना खूब जानती है।

आज जो रिज़वी कह रहे हैं, वो दरअसल आदित्यनाथ के दिल की बात है। जिंदल की किताब में लिखे उनके इस लेख को पढ़िए, आप को पता चल जाएगा कि मदरसे को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की मंशा क्या है।

“… क्यों अफगानिस्तान, पाकिस्तान से हिन्दुओं का सफाया हो गया? क्यों बांग्लादेश में हिन्दुओं के सफाये का अंतिम चरण चल रहा है? क्यों पाक अधिकृत कश्मीर से हिन्दुओं का सफाया हो गया? क्यों कश्मीर घाटी मुस्लिम बाहुल्य होते ही भारत विरोधी हो गयी और हिन्दुओं का वहां से सफाया हो गया? क्यों रूस के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र रूस से अलग हो गये या अलग होना चाहते हैं?

क्यों यूगोस्लाविया खण्डित हो गया? क्यों दुनियाभर के मुसलमान इजराइल का नामोनिशान मिटा देना चाहते हैं? क्यों दुनिया का हर मुस्लिम क्षेत्र अपनी मातृभूमि का चीर हरण करने पर संकोच नहीं करता? आखिर चेचन्या, अफगानिस्तान, कोसोवो, कश्मीर घाटी सबकी एक जैसी स्थिति क्यों? और जब सच्चाई की तह में जाते हैं तो क्या सच नहीं कि आज दुनिया के लगभग सभी आतंकवादी हमलों की जड़े मदरसों तक जाती हैं।

ये जानते हुए भी कि भारत के अन्दर लगभग हर आतंकवादी मदरसों से जुड़े हैं। इस देश का राजनैतिक नेतृत्व तथा भारत जैसे लोकतांत्रिक देश का भाग्य विधाता इस देश का बहुसंख्यक समाज अनजान क्यों बना हुआ है? सीमावर्ती क्षेत्रों में कुकुरमुत्तों की तरह उठ आये मदरसे आखिर क्या संदेश देते हैं? वहां पर चल रही गतिविधियों पर हर व्यक्ति मौन क्यों है? जब तक मदरसों में इस्लामिक शिक्षा के नाम पर मजहबी तालीम दी जाती रहेगी तब तक तो आतंकवाद को नियंत्रित नहीं किया जा सकता है और नहीं मुसलमानों के आर्थिक और सामाजिक स्तर को उठाया जा सकता है।

किसी भी राष्ट्र को बनाये रखने तथा एकता और अखण्डता को बनाये रखने के लिए आवश्यक है कि उस राष्ट्र के अन्दर एक समान राष्ट्रवादी विचारधारा की शिक्षा प्रदान की जाए। आज जब अमेरिका, इंगलैण्ड जैसे विकसित राष्ट्र इस्लामिक मजहबी शिक्षा को पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिये हैं और पाकिस्तान भी इस्लामिक मदरसों की आतंकवादी गतिविधियों को झेल रहा है वहां पर भी मदरसों की भूमिका पर न केवल प्रश्नचिन्ह उठने लगे हैं अपितु उनकी कार्यप्रणाली पर बार-बार प्रश्न उठ रहे हैं।

बिना समय गंवाए भारत सरकार को अब भी भारत की सम्प्रभुता को बनाए रखने में राष्ट्र की एकता और अखण्डता के लिए भी किसी प्रकार की मजहबी तालीम को जिससे अलगाववाद, आतंकवाद अथवा उग्रवाद को सह मिलती हो पूर्णरूप से प्रतिबंधित करना होगा। एक समान राष्ट्रीय शिक्षा पूरे राष्ट्र के परिप्रेक्ष्य में लागू करनी चाहिए।

लेखक ने “इस्लामिक मदरसे…बेनकाब” के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डालते हुए अपने विचार प्रस्तुत किये हैं क्योंकि लेखक वरिष्ठ पत्रकार के साथ-साथ आतंकवाद मामलों के विशेषज्ञ भी हैं। ग्रंथ में सम्मिलित किये गये विषय तथा तथ्यों ने इसे और अधिक प्राजंल, स्पष्ट एवं उपयोगी बनाने में अपनी भूमिका अदा की है।

अस्तु संदर्भित विषय में लेखक के गंभीर प्रयास, सार्थकता और उपयोगिता को देखते हुए मैं जहां उन्हें हृदय से साधुवाद देता हूं वहीं विश्वास भी करता हूं कि इससे सुधीजन अपेक्षित प्रेरणा एवं प्रकाश प्राप्त कर लाभ उठायेगें।

                                                                                                                     शुभेच्छु:

(योगी आदित्यनाथ)

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