‘मॉब लिन्चिंग के मुद्दे पर खुद मोदी खामोश हैं तो उनके मंत्री ऐसे लोगों को सम्मानित करें ताज्जुब नहीं होता, बीजेपी ने फैसला कर लिया है कि वो हमारी नसों मे नफरत भरने का काम करेंगे’

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मेरे देश के लिये रोने का वक़्त है। अब ऐसा लगता है के fringe यानी समाज के सतह पर बैठी संस्थाएं जो हिंसा फैलाती हैं और मुख्यधारा की बीजेपी मे कोई फर्क़ नहीं रहा। और ये कोई छोटा मोटा नेता नहीं, सम्मानित पढे-लिखे केन्द्र मे मंत्री हैं। अब ये हाल हो गया है बीजेपी का? जयन्त सिन्हा? ये भी नहीं कह सकता के विश्वास नहीं होता। सच तो ये है कि मॉब लिन्चिंग के मुद्दे पर खुद मोदी खामोश हैं तो उन्के मंत्री ऐसे लोगों को सम्मानित करें ताज्जुब नहीं होता।

आप और हम हिन्दू मुसलमान करते रहेंगे और ऐसे ही हमारे नेता नफरत को हमारी ज़िन्दगी का अभिन्न अंग बना देंगे। मॉब लिन्चिंग करने वालों को सम्मानित करना एक नया रसातल है बीजेपी के लिये भी। मैं सोचता था के बीजेपी मे बस एक सोच है जो ऐसी बातों मे विश्वास करती है। मुझे लगता था बस सियासी कारणों से ऐसी सोच को नज़र अंदाज किया जाता था। मगर इस घटना ने सभी हदों को तोड़ दिया है। आज हमारे नेता अपराधियों के साथ हत्यारों के साथ और उन्हे सम्मानित करने से भी परहेज नहीं करते। ये वाकई इस देश के लिये रोने का वक़्त है।

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बीजेपी ने फैसला कर लिया है के वो हमारी नसों मे नफरत भरने का काम करेंगे। वोट भी मिल जायेगा। क्योंकि जनता ने तो धतूरा चढ़ा रखा है नफरत का। मुझे इस पीढ़ी की चिंता नहीं। मुझे चिंता है अपने बच्चों की। के ऐसी सोच को बढ़ावा देकर हम उन्हे किस आग मे डाल रहे हैं। मैं नहीं चाहता के मेरे बच्चे इस माहौल को सामान्य समझ कर ऐसी ही नफरतो मे दफन हो जाएं। याद रखना नफरत की कोई हद नहीं होती। वो धर्म देखकर दस्तक नहीं देती। वो जात देखकर दस्तक नहीं देती। बस फरमान होता है भीड़ का। बस हुक्म होता है एक वहशी जुनून का।

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आप देख रहे होंगे कैसे लोग किसी सियासी दल की प्रवक्ता की मासूम बेटी को बलात्कार की धमकी दे देते हैं। कैसे बुजुर्ग विदेश मंत्री की किडनी और उनके स्वस्थ्य पर लोग गंदी गंदी बातें करते हैं। ये इस देश का नया सच है। ये इस देश का नया चेहरा है। ऐसा कहने के लिये आप मुझे देशद्रोही भी नहीं कहेंगे क्योंकि इस वहशीपन मे लोटते रहना तुम्हे पसन्द है।

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ये नज़ारा बहुत वीभत्स होगा कुछ लोगों के लिये। चिंता ना करें। आदत हो जायेगी। जब नफरत को सामान्य करना पिछ्ले चार सालों की विरासत हो सकती है तो ये तो बहुत साधारण चीज है। मगर एक बात तय है। लम्हों की खता अब सदियाँ भुगतेंगी। तुम्हारी घटिया सियासत के लिये तुम देश तक को बदल डालोगे। वाकई देश बदल रहा है। मगर हां। तुम्हारे बच्चे तुम्हे माफ नहीं करेंगे। जय हिन्द।

(अभिसार शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं। इसमें लिखे विचार उनके अपने हैं)

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