लाभ के पद का मामलाः खुद को अयोग्य घोषित किए जाने के राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचे AAP विधायक

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लाभ के पद मामले में आयोग्य घोषित किए गए आम आदमी पार्टी (AAP) के 20 पूर्व विधायकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में मंगलवार (23 जनवरी) को चुनौती दी। आप विधायकों की याचिका पर हाईकोर्ट में बुधवार (24 जनवरी) को सुनवाई होगी। इससे पहले सोमवार (22 जनवरी) को पार्टी के छह पूर्व विधायकों ने उन्हें अयोग्य घोषित करने वाली सिफारिश के खिलाफ अर्जियां वापस ले लीं।जस्टिस रेखा पल्ली के समक्ष आप विधायक मदल लाल और अन्य की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूरी दे दी है। इसलिए उनकी अर्जियों पर विचार करने का कोई औचित्य नहीं है। राष्ट्रपति के फैसले का अध्ययन कर चुनौती दी जाएगी।

इसके बाद हाईकोर्ट ने पूर्व विधायकों को अर्जी वापस लेने की अनुमति देते हुए इसे खारिज कर दिया। हाईकोर्ट पहुंचे थे छह पूर्व विधायक चुनाव आयोग की सिफारिश के खिलाफ मदन लाल समेत छह पूर्व विधायकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई की अनुमति दी थी।

20 विधायकों की सदस्यता रद्द

दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है। लाभ के पद मामले में पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द हो गई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार (21 जनवरी) को चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूरी दे दी। चुनाव आयोग ने शुक्रवार (19 जनवरी) को लाभ के पद मामले में इन विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए राष्ट्रपति से सिफारिश की थी।

ये सभी विधायक 13 मार्च, 2015 से 8 सितंबर, 2016 तक संसदीय सचिव पद पर थे, जिसे ‘लाभ का पद’ माना गया है। हालांकि, इस फैसले से केजरीवाल सरकार पर खतरा नहीं हैं। विधि मंत्रलय द्वारा जारी अधिसूचना में राष्ट्रपति के हवाले से कहा गया कि चुनाव आयोग की सिफारिश पर दिल्ली विधानसभा के 20 सदस्यों को अयोग्य करार दिया गया है।

विधि मंत्रलय द्वारा जारी अधिसूचना में राष्ट्रपति के हवाले से कहा गया कि चुनाव आयोग की सिफारिश पर दिल्ली विधानसभा के 20 सदस्यों को अयोग्य करार दिया गया है। अधिसूचना में कहा गया कि निर्वाचन आयोग द्वारा व्यक्त की गई राय के आलोक में, मैं, रामनाथ कोविंद, भारत का राष्ट्रपति, अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उक्त 20 सदस्यों को दिल्ली विधानसभा की सदस्यता के अयोग्य ठहराता हूं।

आगामी 14 फरवरी को आम आदमी पार्टी सरकार के तीन वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसे में यह दिल्ली की केजरीवाल सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। 20 विधायकों की सदस्यता रद्द होने के बाद 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में आप पार्टी के विधायकों की संख्या 66 से घटकर सीधे 46 पर आ गई है। अब 20 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने होंगे।

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Posted by Janta Ka Reporter on Saturday, 20 January 2018

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि आम आदमी पार्टी ने 13 मार्च 2015 को अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया था। इसको लाभ का पद बताते हुए राष्ट्रपति से शिकायत की गई थी। इसमें इनकी सदस्यता को रद्द करने की मांग की गई थी। 19 जून को वकील प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति के पास इन सचिवों की सदस्यता रद्द करने के लिए आवेदन किया था।

जिसके बाद राष्ट्रपति ने शिकायत चुनाव आयोग भेज दी थी। राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग से मामले की जांच का निर्देश दिया था। चुनाव आयोग ने आप के 21 विधायकों को ‘लाभ का पद’ मामले में कारण बताओ नोटिस दिया था। इस मामले में पहले 21 विधायकों की संख्या थी। हालांकि विधायक जनरैल सिंह के पिछले साल विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद इस मामले में फंसे विधायकों की संख्या 20 रह गई थी।

दिल्ली सरकार ने दिल्ली असेंबली रिमूवल ऑफ डिस्क्वॉलिफिकेशन ऐक्ट-1997 में संशोधन किया था। इस विधेयक का मकसद संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से छूट दिलाना था, जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नामंजूर कर दिया था। इसके बाद से इन सभी 21 विधायकों की सदस्यता पर और सवाल खड़े हो गए थे। आप के विधायक 13 मार्च 2015 से 8 सितंबर 2016 तक संसदीय सचिव के पद पर थे।

 

 

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