ममता के बाद अब BJP नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने खोला आधार के खिलाफ मोर्चा, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बताया खतरा

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सभी सरकारी सुविधाओं के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य करने के मोदी सरकार के फैसले का विरोध बढ़ता जा रहा है।  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और राज्यभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी आधार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। स्वामी ने आधार कार्ड की अनिवार्यता को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

File Photo: TOI

स्वामी ने मंगलवार (31 अक्टूबर) को आधार को राष्ट्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखेंगे। साथ ही उन्होंने ट्वीट कर कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार के हर सेवाओं के लिए आधार को अनिवार्य करने के फैसले को खारिज कर देगा।

बीजेपी नेता ने मंगलवार सुबह ट्वीट कर कहा, ‘मैं बहुत ही जल्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर इस बात की जानकारी देने वाला हूं कि आधार किस तरह से राष्ट्र के लिए खतरा है। मुझे विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट भी सरकार के इस फैसले को खारिज कर देगा।’

बता दें स्वामी से पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आधार को मोबाइल नंबर से लिंक कराने को लेकर अपना विरोध जता चुकी हैं। आधार की अनिवार्यता के फैसले को ममता सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सोमवार को इसपर हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी को कड़ी फटकार लगाई।

सामाजिक कल्याण की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार को अनिवार्य बनाने के केंद्र के कदम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार से तीखे सवाल किये। न्यायालय ने पूछा कि एक राज्य कैसे संसद के जनादेश को चुनौती दे सकता है?

न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने कहा कि, ‘‘एक राज्य ऐसी याचिका कैसे दायर कर सकता है। संघीय व्यवस्था में, एक राज्य कैसे संसद के जनादेश को चुनौती देने वाली याचिका दायर कर सकता है।’’ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायालय को बताया कि यह अपील राज्य के श्रम विभाग ने दायर की है, क्योंकि इन योजनाओं के तहत सब्सिडी वही वितरित करता है।

इस पर पीठ ने कहा कि, ‘‘आप हमें संतोषजनक उत्तर दें कि कैसे एक राज्य इसे चुनौती दे सकता है। हम जानते हैं कि इस मुद्दे पर विचार की जरूरत है।’’ पीठ ने कहा कि केंद्र के कदम को कोई व्यक्ति चुनौती दे सकता है, राज्य नहीं।न्यायालय ने कहा कि, ‘‘ममता बनर्जी को एक व्यक्ति के रूप में अपील दायर करने दें। हम उस पर विचार करेंगे क्योंकि वह एक व्यक्ति होंगी।’’

हालांकि, सिब्बल ने कहा कि राज्य ऐसी अपील दायर कर सकता है, लेकिन उन्होंने कहा कि वह अपील में लिखे अनुरोध में बदलाव करेंगे। इस बीच न्यायालय ने मोबाइल नंबरों को आधार से जोड़ने को चुनौती देने वाली एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवायी करते हुए केंद्र को नोटिस जारी किया और उसपर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा।

इससे पहले केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया था कि विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आधार को उनसे जोड़ने की अनिवार्यता की तिथि बढ़ाकर 31 मार्च, 2018 कर दी गई है। यह प्रावधान उनके लिए किया गया है, जिनके पास अभी भी 12 डिजिट की बायोमीट्रिक पहचान संख्या ‘आधार’ नहीं है।

 

 

 

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