71 फीसदी लोगों ने माना, भारत में खतरे में है प्रेस की आजादी: सर्वे

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भारत में 71 प्रतिशत लोगों को प्रेस की आजादी खतरे में लगती है। एक सर्वेक्षण से यह परिणाम सामने आया है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ‘नेता’ ऐप ने देश में प्रेस की आजादी को लेकर लोगों की राय ली है। इसने कहा कि 19 राज्यों और एनसीआर के 75,000 लोगों ने सर्वेक्षण में हिस्सा लिया। सर्वेक्षण के मुताबिक, 71 फीसदी लोगों को लगता है कि भारत में प्रेस की आजादी खतरे में है, जबकि 26 प्रतिशत लोगों का मानना है कि प्रेस की स्वतंत्रता पर्याप्त है। तीन फीसदी लोगों ने कोई राय व्यक्त नहीं की।

प्रतीकात्मक तस्वीर

नेता ऐप के संस्थापक प्रथम मित्तल ने कहा, ‘हमारे डेटा के मुताबिक, यह विचार बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों में ही ज्यादा है लेकिन तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु सरीखे दक्षिणी राज्यों में यह राय कम है।’सर्वेक्षण के मुताबिक, झारखंड के 88.89 प्रतिशत उत्तरदाताओं को लगता है कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता को खतरा है जबकि तेलंगाना में 55 फीसदी उत्तरदाताओं को प्रेस की स्वतत्रंता खतरे में लगती है।

बता दें कि मीडिया की आजादी से संबंधित ‘रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स’ की सालाना रिपोर्ट में प्रेस की आजादी के मामले में भारत दो पायदान खिसक गया है। 180 देशों में भारत 140वें स्थान पर है। इसी साल अप्रैल महीने में जारी इस रिपोर्ट में भारत में चल रहा चुनाव प्रचार का यह दौर पत्रकारों के लिए खासतौर पर सबसे खतरनाक वक्त के तौर पर चिह्नित किया गया था।

वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2019 यानी ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2019’ में नॉर्वे शीर्ष पर है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर के पत्रकारों के प्रति दुश्मनी की भावना बढ़ी है। इस वजह से भारत में बीते साल अपने काम की वजह से कम से कम छह पत्रकारों की हत्या कर दी गई। सूचकांक में कहा गया है कि भारत में प्रेस स्वतंत्रता की मौजूदा स्थिति में से एक पत्रकारों के खिलाफ हिंसा है, जिसमें पुलिस की हिंसा, नक्सलियों के हमले, अपराधी समूहों या भ्रष्ट राजनीतिज्ञों का प्रतिशोध शामिल है।

2018 में 6 पत्रकारों की चली गई जान

2018 में अपने काम की वजह से भारत में कम से कम छह पत्रकारों की जान गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये हत्याएं बताती हैं कि भारतीय पत्रकार कई खतरों का सामना करते हैं, खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में गैर अंग्रेजी भाषी मीडिया के लिए काम करने वाले पत्रकार। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 2019 के आम चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ भाजपा के समर्थकों द्वारा पत्रकारों पर हमले बढ़े हैं। 2019 के सूचकांक में संगठन ने पाया कि पत्रकारों के खिलाफ घृणा हिंसा में बदल गई है, जिससे दुनियाभर में डर बढ़ा है।

रिपोर्ट में भारत के संदर्भ में हिंदुत्व को नाराज करने वाले विषयों पर बोलने या लिखने वाले पत्रकारों के खिलाफ सोशल मीडिया पर घृणित अभियानों पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब महिलाओं को निशाना बनाया जाता है तो यह अभियान ज्यादा उग्र हो जाता है। 2018 में भारत में मीडिया में ‘मी टू’ अभियान के शुरू होने से महिला संवाददाताओं के संबंध में उत्पीड़न और यौन हमले के कई मामलों से पर्दा हटा था।

 

 

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