मध्य प्रदेश में जारी सियासी उठापटक के बीच कांग्रेस के 5 और विधायक देर रात जयपुर भेजे गए

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मध्य प्रदेश में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने में लगी हुई है। इसके चलते पांच और विधायकों को चार्टर प्लेन के जरिए भोपाल से जयपुर भेजा गया है। अब तक जयपुर भेजे जाने वाले विधायकों की संख्या 86 हो गई है। वहीं कई मंत्री अभी भी भोपाल में ही हैं।

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जयपुर से कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात की और पांच विधायकों के जयपुर पहुंचने की पुष्टि करते हुए कहा कि, “कांग्रेस की सरकार को कोई खतरा नहीं है, आने वाले समय में कुछ और विधायक भी जयपुर पहुंचेंगे।” कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार पर संकट गहराया हुआ है। इस्तीफा देने वाले विधायकों में से 19 विधायक बेंगलुरु में हैं। शेष विधायकों को कांग्रेस एकजुट रखने की कोशिश में लगी हुई है। इसी के तहत मंगलवार को 81 विधायकों को विशेष विमान से भोपाल से अखिल भारतीय कांग्रेस के प्रतिनिधि और राष्ट्री सचिव सुधांशु त्रिपाठी के साथ जयपुर भेजा गया था, वहीं पांच और विधायकों को देर रात को चार्टर प्लेन से जयपुर भेजा गया है।

आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि बाबू लाल जंडेल, बैजनाथ कुशवाहा, शशांक भार्गव व दो अन्य विधायकों को विशेष चार्टर प्लेन से मंगलवार की रात को जयपुर भेजा गया है। इस तरह पार्टी के 86 विधायक ही अब तक जयपुर पहुंचे हैं। वहीं कई मंत्री अब भी भोपाल में हैं और उन मंत्रियों को इस्तीफा दे चुके विधायकों से संपर्क करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

गौरतलब है कि, मध्य प्रदेश के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद ज्योदिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से इस्तीफा देने के एक दिन बाद बुधवार (11 मार्च) को दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा की मौजूदगी में आधिकारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में शामिल होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ सरकार पर भ्रष्टाचार और वादाखिलाफी के आरोप लगाए।

गौरतलब है कि, मध्य प्रदेश विधानसभा में 230 सीटें हैं, जिनमें से दो सीटें फिलहाल खाली हैं। इस प्रकार वर्तमान में प्रदेश में कुल 228 विधायक हैं, जिनमें से 114 कांग्रेस, 107 भाजपा, चार निर्दलीय, दो बहुजन समाज पार्टी एवं एक समाजवादी पार्टी का विधायक शामिल हैं। अगर 22 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिये जाते हैं तो विधानसभा में सदस्यों की प्रभावी संख्या महज 206 रह जाएगी। उस स्थिति में बहुमत के लिये जादुई आंकड़ा सिर्फ 104 का रह जाएगा। ऐसे में, कांग्रेस के पास सिर्फ 92 विधायक रह जाएंगे, जबकि भाजपा के 107 विधायक हैं। कांग्रेस को चार निर्दलीयों, बसपा के दो और सपा के एक विधायक का समर्थन हासिल है। उनके समर्थन के बावजूद कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से दूर हो जाएगी।

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