इराक के मोसुल में लापता हुए सभी 39 भारतीय मारे गए, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में दी जानकारी

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भारत के लिए एक बहुत ही दुखद खबर आई है। इराक के मौसुल में लापता 39 भारतीयों की मौत हो चुकी है। मंगलवार (20 मार्च) को विदेश में सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में इस दुखद खबर की जानकारी। बता दें कि वर्ष 2014 में मोसुल से 39 भारतीयों के लापता होने की खबर सामने आई थी। विदेश मंत्री ने कहा कि मृतकों के शव लाने के लिए केंद्रीय मंत्री वी.के सिंह ईराक जाएंगे।

Express Photo by Prem Nath Pandey

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मंगलवार (20 मार्च) को बताया कि इराक में तीन साल पहले अपहृत किए गए सभी 39 भारतीय मारे जा चुके हैं और उनके शव मिल गए हैं। सुषमा ने राज्यसभा में अपनी ओर से दिए एक बयान में बताया कि अभी यह पता नहीं चल पाया गया है कि ये भारतीय कब मारे गए। उन्होंने बताया कि पंजाब, हिमाचल प्रदेश, बिहार तथा पश्चिम बंगाल के रहने वाले इन भारतीयों के शव इराक में मोसुल शहर के उत्तर पश्चिम में स्थित बदूश गांव से मिले हैं।

विदेश मंत्री ने बताया कि बदूश में एक सामूहिक कब्र से खोद कर निकाले गए इन शवों की डीएनए जांच की गई जिसके बाद इन भारतीयों की पहचान हो सकी। उन्होंने बताया कि एक विशेष विमान के जरिये इन शवों को भारत लाया जाएगा और इनके परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

उच्च सदन की बैठक शुरू होने के बाद अपनी ओर से दिए गए एक बयान में सुषमा ने बताया ‘‘मैंने पिछली बार इन भारतीयों के बारे में सदन में चर्चा होने पर कहा था कि जब तक ठोस सबूत नहीं मिलेगा, मैं किसी को भी मृत घोषित नहीं करूंगी। आज मैं उसी प्रतिबद्धता को पूरी कर रही हूं। मैंने कहा था कि सबूत मिलने पर ही हम इसे बंद करेंगे। जब हम इन 39 भारतीयों के पार्थिव अवशेषों को उनके परिजनों के सुपुर्द करेंगे तब यह खोज बंद होगी।’’

बता दें कि करीब तीन साल पहले 40 भारतीय कामगारों के एक समूह को मोसुल में आतंकी संगठन आईएसआईएस ने बंधक बना लिया था। बंधक बनाए गए लोगों में कुछ बांग्लादेशी भी थे। भारतीयों में से, हरजीत मसीह नामक एक व्यक्ति किसी तरह बच कर निकल गया। उसने दावा किया था कि उसने अन्य भारतीयों को आईएसआईएस के लड़ाकों के हाथों मरते देखा है। लेकिन सरकार ने उसका यह दावा खारिज कर दिया था।

सुषमा ने शुक्रवार को कहा कि पंजाब के गुरदासपुर का रहने वाला हरजीत मसीह सच नहीं बोल रहा था। उन्होंने बताया कि हरजीत खुद को बांग्लादेश का मुस्लिम बता कर आईएसआईएस से बच कर निकल गया था। विदेश मंत्री ने बताया कि इन भारतीयों को तब अपहृत किया गया था जब मोसुल पर आईएसआईएस ने कब्जा किया था। उन्होंने बताया कि अपहृत भारतीयों को पहले मोसुल में एक कपड़ा फैक्ट्री में रखा गया। हरजीत के भागने के बाद इन भारतीयों को बदूश गांव में ले जा कर बंधक रखा गया।

उन्होंने बताया कि इन 39 भारतीयों को बदूश गांव ले जाए जाने के बारे में विदेश राज्य मंत्री वी के सिंह को उसी कपड़ा फैक्ट्री से पता चला जहां पहले भारतीयों को रखा गया था। बदूश में कुछ स्थानीय लोगों ने एक सामूहिक कब्र के बारे में बताया। ‘‘डीप पेनिट्रेशन रडार’’ की मदद से पता लगाया गया कि कब्र में शव हैं। इराकी अधिकारियों की मदद से शवों को खोद कर निकाला गया। जो सबूत मिले, उनमें लंबे बाल, कड़ा, पहचान पत्र और वह जूते शामिल हैं जो इराक में नहीं बने थे।

विदेश मंत्री ने बताया कि इन शवों को डीएनए जांच के लिए बगदाद भेजा गया। उन्होंने कहा कि बगदाद में मार्टायर्स फाउंडेशन से इन शवों की डीएनए जांच करने का अनुरोध किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को कल बताया गया कि जांच में 38 भारतीयों का डीएनए मैच हो गया जबकि 39वें शव का डीएनए उसके करीबी रिश्तेदारों के डीएनए से 70 फीसदी मैच हो गया है। उन्होंने बताया कि विदेश राज्य मंत्री वी के सिंह इन शवों को वापस भारत लाने के लिए इराक जाएंगे।

सुषमा ने बताया कि वह पहले भी कहती रही हैं कि सबूत न मिलने तक वह अपहृत भारतीयों को मृत घोषित नहीं करेंगी। उन्होंने कहा ‘‘अब सबूत मिल गए हैं। बहुत दुख के साथ मैं सदन को यह सूचना दे रही हूं कि इराक में अपहृत 39 भारतीय मारे गए।’’ उन्होंने बताया कि जब मोसुल पर आईएसआईएस ने कब्जा किया था तब ज्यादातर इराकी शहर से चले गए लेकिन भारतीय और बांग्लादेशी कामगार वहीं रहे।

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