शर्मनाक: त्रिपुरा में ‘निर्भया’ जैसा कांड, बीमार बेटी से मिलकर लौट रही 32 वर्षीय महिला से चलती कार में सामूहिक दुष्कर्म कर सड़क पर फेंका

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त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में दिल्ली के ‘निर्भया कांड’ जैसा दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। अगरतला चिकित्सा महाविद्यालय से छह साल की बीमार बेटी से मिलकर लौट रही एक महिला के साथ चलती कार में गैंगरेप के बाद आरोपियों ने उसे आधी रात को सड़क पर फेंक कर फरार हो गए। महिला अभी हॉस्पिटल में भर्ती है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

त्रिपुरा
प्रतिकात्मक फोटो

समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने गुरुवार को बताया कि घटना मंगलवार रात की है। 32 वर्षीय पीड़िता से चलती कार में दुष्कर्म कर आरोपियों ने उसे सर्किट हाउस के पास फेंक दिया, बाद में लोगों ने उसे जीबी अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल के सूत्रों ने बताया महिला की हालत गंभीर, लेकिन स्थिर बनी हुई है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पीड़िता के पति ने बुधवार को पूर्वी अगरतला महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई और उसी दिन छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पूर्वी अगरतला महिला थाने की प्रभारी मुमताज हसीना ने शिकायत के हवाले से बताया कि मंगलवार करीब शाम साढ़े सात बजे पीड़िता घर जाने के लिए ऑटो रिक्शा में सवार हुई जिसके चालक को वह जानती थी। उन्होंने बताया कि जब ऑटो रिक्शा चालक ने वाहन को दूसरे रास्ते पर मोड़ा तो महिला ने विरोध किया लेकिन चालक और यात्रियों को लेने की बात कर दूसरे रास्ते पर चला गया। हसीना के मुताबिक रास्ते में चार लोग ऑटो रिक्शा में सवार हुए और महिला के हाथ और मुंह बांध दिया।

बाद में उन्होंने उसे कार में डाला और करीब 15 किलोमीटर दूर नरसिंहगढ़ ले गए जहां चार और लोग इंतजार कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वे भी कार में सवार हुए और सभी ने महिला के साथ दुष्कर्म किया तथा रात करीब साढ़े ग्यारह बजे सर्किट हाउस के पास पीड़िता को फेंक दिया। बाद में उसे कुछ लोगों ने देखा, जिन्होंने उसे अस्पताल में भर्ती कराया था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। भाजपा की लोकसभा सांसद प्रतिमा भौमिक ने घटना की निंदा करते हुए मामले की जल्द जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है।

गौरतलब है कि, 16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली में 23 वर्षीय निर्भया के साथ चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया था जिसके बाद देशव्यापी आंदोलन और प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों को और सख्त बनाया था।

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