एक्शन फिल्में बढ़ाती हैं हिंसक प्रवृत्ति: शोध

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फिल्मों के शौकीनों के लिए वैज्ञानिकों की नसीहत है कि वे एक्शन फिल्में देखने में थोड़ी कटौती करें, क्योंकि एक नए अध्ययन से पता चला है कि जो लोग ज्यादा हिंसापूर्ण फिल्में देखते और किताबें पढ़ते हैं, उनके अंदर झूठ बोलने, धोखा देने जैसी हिंसक प्रवृत्तियों के जन्म लेने की संभावना अधिक होती है।

इस अध्ययन के अनुसार, धोखाधड़ी की घटनाओं की वृद्धि के पीछे धन कमाने का उद्देश्य होता है, जो मानव हिंसा के साथ सीधे तौर पर जोड़ा गया है।

अमेरिका की ब्रिंघम यंग यूनिवर्सिटी के शोधार्थी और अध्ययन के मुख्य लेखक जॉश गबलर का कहना है, “कई शोधों में बताया गया है कि हिंसात्मक माध्यम लोगों में हिंसक प्रवृत्तियों का विकास करते हैं। लेकिन हमें इस अध्ययन के दौरान काफी चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं।”

इस अध्ययन में शोधार्थियों ने 1000 प्रतिभागियों के साथ कई प्रयोग किए।

एक परीक्षण में प्रतिभागियों को कुछ वाक्य दिए गए। इसमें उन्हें वाक्यों की व्याख्या और गलतियों को ठीक करना था, जिसके लिए उन्हें भुगतान भी दिया गया।

इनमें आधे से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिंसक भाषा के साथ वाक्यों के जवाब दिए। उन्हें बताया गया था कि वह सही जवाब देते हैं या गलत उन्हें भुगतान किया जाएगा और जल्दी पैसा कमाने के लिए सभी वाक्यों पर ‘सही’ का निशान लगाने पर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

जिन लोगों ने हिंसक वाक्यों की समीक्षा की थी उनमें से 24 प्रतिशत लोगों में बेईमानी करने की संभावना देखी गई।

वहीं दूसरे परीक्षण में प्रतिभागियों को फिल्मों के कुछ दृश्य देखने और उनका मूल्यांकन करने का काम दिया गया। उन्हें बताया गया कि इन सभी फिल्मों के दृश्यों को उन्हें पूरा देखना है।

इसके बाद शोधार्थियों ने पाया कि जिन्होंने हिंसक फिल्मों के दृश्यों को देखा था, उनमें सभी वीडियो को देखने के बारे में झूठ बोलने की अधिक संभावना पाई गई।

यह अध्ययन बिजनेस एथिक्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

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