CAG की रिपोर्ट का खुलासा, 30 फीसदी आकाश मिसाइलें परीक्षण में रहीं असफल

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सरकारी खातों का ऑडिट करने वाली संस्था भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अभी हाल ही में भारतीय रेलवे की कैटरिंग की सर्विस और स्टेशनों में परोसे जाने वाले खाने को लेकर ऊंगली उठायी थी। लेकिन अब कैग (CAG) ने इंडियन एयरफोर्स की आकाश मिसाइल की विश्वसनीयता को लेकर कुछ सवाल उठाये हैं, जो कि वेहद की चौंकाने वाला है। कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि एक तिहाई मिसाइलें टेस्ट में फेल हो गईं।

इंडियन एयरफोर्स

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, संसद में रखी गई कैग की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार इन मिसाइलों को ‘एस’ सेक्टर (उत्तर-पूर्व) में तैनात किया जाना था। यह काम 2013-15 के बीच ही हो जाना था लेकिन अभी तक एयरफोर्स ऐसा नहीं कर पाया। साथ ही सीएजी रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि बीईएल की मिसाइलों में खामियां थी।

ख़बरों के मुताबिक, सीएजी की रिपोर्ट में साथ ही कहा गया है कि, जो 80 मिसाइलें वायुसेना को सौंपी गईं उसमें से 20 का टेस्ट हुआ तो पाया गया कि 6 मिसाइल यानि 30% ना तो तय दूरी तक पहुंच पाईं और ना ही वे ऑपरेशनली तैनात करने लायक थीं, यानी की यह मिसाइलें परीक्षण में असफल रहीं। साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि जरूररत के समय ये कमियां बेहद नुकसान पहुंचा सकती हैं।

ख़बरों के मुताबिक, ये मिसाइलें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड से 3,619 करोड़ रुपये अड़ा करके खरीदी गईं थीं। इन्हें उत्तर-पूर्व में तैनात करने का निर्णय 2010 में लिया गया था। इन मिसाइलों की उम्र 10 साल तक होती है। रिपोर्ट की मानें तो इनमें से कई मिसाइलों का जीवन मार्च 2017 में ही समाप्त हो चुका है।

पिछले एक हफ्ते में सीएजी की ये दूसरी बड़ी रिपोर्ट है जो भारतीय सेनाओं की तैयारियों पर सवाल खड़ी कर रही है। बता दें कि, कुछ दिन पहले ही सीएजी ने कहा था हमारी सेना के पास सिर्फ 10 दिन का ही गोलाबारूद है, जबकि सेना के पास 40 दिन का वॉर रिजर्व होना चाहिए।

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