नोटबंदी: नकदी की समस्या से परेशान लोग, मांग की तुलना में आपूर्ति कम

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नोटबंदी के चलते नकदी संकट से जूझ रहे लोगों की दिक्कतें कम नहीं हुई हैं। एटीएम से पैसा जल्दी गायब हो रहा है और बैंकों को भी अधिक से अधिक ग्राहकों को नकदी उपलब्ध कराने के लिए ‘की राशनिंग’ करनी पड़ रही है। बैंकों में इस समय ऐसे लोग की भीड़ अधिक है जो अपना वेतन निकालना चाहते हैं।

Demonetisationदेशभर से इस तरह की खबरें हैं कि बैंक शाखाओं को वेतन के दिन के लिए पर्याप्त नकदी उपलब्ध नहीं कराई गई है। जहां रिजर्व बैंक ने साप्ताहिक निकासी की सीमा 24,000 रुपये तय की है वहीं बैंक खुद ही इस सीमा को और कम कर रहे हैं जिससे अधिक से अधिक लोगों को नकदी उपलब्ध कराई जा सके।

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एटीएम भी लोगों के मददगार साबित नहीं हो रहे हैं। जैसे ही एटीएम में पैसा डाला जाता है इतनी भीड़ जुट जाती है कि उनमें नकदी कुछेक देर में समाप्त हो जाती है। बहुत से एटीएम ऐसे हैं जिनसे सिर्फ 2,000 रुपये का नोट निकल रहा है। सूत्रों ने बताया कि बैंकों ने रिजर्व बैंक से एसओएस कॉल के जरिये अगले चार-पांच दिन के लिए अतिरिक्त नकदी उपलब्ध कराने को कहा है। कई बैंक शाखाओं से गरमा-गरमी होने की खबरें भी आ रही हैं।

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भाषा की खबर के अनुसार, इस बीच, आल इंडिया बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन (एआईबीईए) ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि नोटबंदी की वजह से आज बैंक कर्मियों को तनाव, बहस, लड़ाई, अपमान, र्दुव्‍यवहार का सामना करना पड़ रहा है। इससे उन पर मानसिक और शारीरिक दबाव पड़ रहा है।

कई ऐसे मामले भी आए हैं जब गुस्साए लोगों ने बाहर से बैंक शाखाओं पर ताला लगा दिया है। एआईबीईए ने कहा कि स्थिति काफी खराब हो चुकी है और अब बैंक कर्मचारी धैर्य खोने की राह पर हैं। एआईबीईए ने कहा कि रिजर्व बैंक नोटों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कदम उठाए और बैंकों को आपूर्ति किए गए नोटों की दैनिक आधार पर घोषणा की जाए।

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