4 ट्वीट कर तेजस्वी ने किया विरोधियों पर पलटवार , कहा ‘ किताब की परख कवर पेज देख कर न करें

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राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया जाना उनके विरोधियों को खटक रहा है। बहुत से लोग मानते हैं कि उपमुख्यमंत्री बनने लायक तेजस्वी की न उम्र है, न तजुर्बा।

भाजपा समर्थक और मीडिया जिनकी विश्वसनीयता पर हालिया दिनों में एक बड़ा प्रश्चिन्ह लग गया है के एक वर्ग नें तेजस्वी के उप मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें आड़े हाथों लिया !

लालू समर्थकों ने भी सोशल मीडिया पर पलटवार करते हुए कहा कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे तो उनके पास सिवाय संघ प्रचारक होने के और कौन सा तजुर्बा था! कुछ ने स्मृति ईरानी और अरुण जेटली पर निशाना साधते हुए कहा कि तेजस्वी ने तो कम से कम चुनाव जीता है, ‘स्मृति ईरानी की शैक्षणिक योग्यता पर प्रश्नचिन्ह लगने और चुनाव हारने के बावजूद मोदी ने उन्हें देश की शिक्षा सुधारने की ज़िम्मेदारी सौंप दी ।’

तेजस्वी ने शनिवार को ट्वीट कर जवाब दिया, “केवल कवर देखकर किताब की पहचान नहीं होती।” उन्होंने और तीन ट्वीट कर विरोधियों को चुप कराने का प्रयास किया। नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में नंबर दो की हैसियत रखने वाले तेजस्वी ने शनिवार को लगातार चार ट्वीट कर विरोधियों पर शाब्दिक प्रहार किया।

पहला ट्वीट :”मैं ब्रांड बिहार का वैल्यू बढ़ाने और राज्य के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ूंगा, ताकि नीतीश कुमार को भी मुझे सहायक बनाने पर गर्व हो।”

दूसरा ट्वीट : “किसी को भी किताब की परख कवर पेज से नहीं करनी चाहिए। मीठे शरबत और कड़वी दवाई का असली फायदा वक्त के साथ पता लगता है।”

तीसरा ट्वीट : “बिहार कैबिनेट में युवाओं के जोश को अनुभवी मुख्यमंत्री द्वारा सही तरीके से उपयोग किया जाएगा, जिससे बिहार की जनता और राज्य का फायदा हो।”

चौथा ट्वीट : “पूर्वाग्रही और स्वार्थी लोग भले ही निंदा करें, लेकिन बिहार की जनता जिसने युवाओं पर भरोसा किया है, उसे इसका लाभ जरूर मिलेगा।”

वर्ष 1989 में जन्मे तेजस्वी 26 वसंत देख चुके हैं। उनका जन्मदिन इसी महीने, नौ नवंबर को था।

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