ओडिशा की 23 वर्षीय आदिवासी लड़की बनी पहली कमर्शियल पायलट, आकाश में उड़ने के लिए छोड़ दी थी इंजीनियरिंग की पढाई

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ओडिशा के माओवाद प्रभावित मलकानगिरि जिले की रहने वाली एक आदिवासी लड़की ने सालों पहले आकाश में उड़ने का सपना देखा और उसे पूरा करके ही दम लिया। आकाश में उड़ने के लिए इस लड़की ने सालों पहले इंजीनियरिंग की पढाई बीच में ही छोड़ दी थी। 27 साल की यह आदिवासी लड़की व्यावसायिक विमान उड़ाने वाली राज्य की पहली महिला बन गई है।

ओडिशा

पायलट बनने की चाह में 23 वर्षीय अनुप्रिया लकड़ा ने सात साल पहले इंजीनियरिंग की पढाई बीच में छोड़ दी और 2012 में उसने यहां उड्डयन अकादमी में दाखिला ले लिया। अपनी काबिलियत और लगन के बल पर जल्दी ही वह एक निजी विमानन कंपनी में को-पायलट के तौर पर सेवाएं देने वाली है। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने लकड़ा को बधाई दी और कहा कि यह दूसरों के लिए एक उदाहरण पेश करेगा।

सीएम पटनायक ने ट्वीट कर लिखा, ‘‘मैं अनुप्रिया लकड़ा की सफलता के बारे में जान कर प्रसन्न हूं। उसके द्वारा सतत प्रयासों और दृढता से हासिल की गई सफलता कइयों के लिए उदाहरण हैं। एक काबिल पायलट के रूप में अनुप्रिया को और सफलता हासिल करने की शुभकामनाएं।’’

अनुप्रिया के पिता मारिनियास लकड़ा ओडिशा पुलिस में हवलदार हैं और मां जामज यास्मिन लाकड़ा गृहणी हैं। उसने दसवीं की पढाई कांन्वेंट स्कूल से तथा 12वीं की पढाई सेमिलिदुगा के एक स्कूल से की।

उसके पिता ने बताया, ‘‘पायलट बनने की चाह में उसने इंजीनियरिंग की पढाई बीच में ही छोड़ दी और पायलट प्रवेश परीक्षा की तैयारी भुवनेर से की।’’ उन्होंने बताया कि 2012 में अनुप्रिया ने भुवनेर में पायलट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया। ‘‘पायलट बनने का उसका सपना हकीकत में बदलने से हम बहुत खुश हैं। वह एक निजी विमानन कंपनी में को-पायलट के तौर पर सेवाएं देने वाली है।’’

अनुप्रिया के गौरवान्वित पिता ने कहा, ‘‘मलकानगिरि जैसे पिछड़े जिले से ताल्लुक रखने वाले किसी व्यक्ति के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है।’’ वहीं उनकी मां ने कहा,‘‘ मैं बहुत प्रसन्न हूं। यह मलकानगिरि के लोगों के लिए गर्व की बात है। उसकी सफलता दूसरी लड़कियों को प्रेरणा देगी।’’ (इंपुट: भाषा के साथ)

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