#MeToo: यौन उत्पीड़न मामले में बढ़ सकती है अकबर की मुश्किलें, केंद्रीय मंत्री के खिलाफ गवाही देने के लिए प्रिया रमानी के समर्थन में आईं 17 महिला पत्रकार

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देश भर में चल रहे ‘मी टू’ अभियान (यौन उत्पीड़न के खिलाफ अभियान) के तहत हर रोज चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अमेरिका से शुरू हुए ‘मीटू’ आंदोलन ने भारत में भी भूचाल मचा दिया है। मी टू अभियान के तहत हर रोज बॉलीवुड और मीडिया से कई महिलाएं आगे आकर अपनी आपबीती बयां कर रही हैं। इस बीच ‘मी टू’ के लपेटे में आए केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री एम.जे.अकबर की मुश्किलें बढ़ती जा रही है।

[File: Sonu Mehta/Getty Images]
दरअसल, ‘द एशियन एज’ अखबार में काम कर चुकीं 17 महिला पत्रकारों ने अपनी सहकर्मी प्रिया रमानी के समर्थन में आ गई हैं, जिन्होंने केंद्रीय मंत्री एम जे अकबर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इन महिला पत्रकारों ने एक संयुक्त बयान में रमानी का समर्थन करने की बात कही है और अदालत से आग्रह किया कि अकबर के खिलाफ उन्हें सुना जाए। उन्होंने दावा किया कि उनमें से कुछ का अकबर ने यौन उत्पीड़न किया और अन्य इसकी गवाह हैं।

समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक पत्रकारों ने अपने हस्ताक्षर वाले संयुक्त बयान में कहा, ”रमानी अपनी लड़ाई में अकेली नहीं है। हम मानहानि के मामले में सुनवाई कर रही माननीय अदालत से आग्रह करती हैं कि याचिकाकर्ता के हाथों हममें से कुछ के यौन उत्पीड़न को लेकर और अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं की गवाही पर विचार किया जाए जो इस उत्पीड़न की गवाह थीं।

बयान पर दस्तखत करने वालों में मीनल बघेल, मनीषा पांडेय, तुशिता पटेल, कणिका गहलोत, सुपर्णा शर्मा, रमोला तलवार बादाम, होइहनु हौजेल, आयशा खान, कुशलरानी गुलाब, कनीझा गजारी, मालाविका बनर्जी, ए टी जयंती, हामिदा पार्कर, जोनाली बुरागोहैन, मीनाक्षी कुमार, सुजाता दत्ता सचदेवा और संजरी चटर्जी शामिल हैं।

महिला पत्रकारों के समूह ने राष्ट्रपति से की अकबर को बर्खास्त करने की मांग

इससे पहले महिला पत्रकारों के एक पैनल ने केंद्रीय मंत्री एम.जे.अकबर को बर्खास्त करने की मांग करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक पत्र लिखा है। नेटवर्क ऑफ वुमेन इन मीडिया इन इंडिया (एनडब्ल्यूएमआई) ने सोमवार (16 अक्टूबर) को राष्ट्रपति को लिखे एक पत्र में कहा, “हम बेहद चिंतित हैं कि वह केंद्रीय मंत्रिपरिषद में मंत्री पद पर बने हुए हैं।” पत्र के अनुसार, “आप इस बात से सहमत होंगे कि यह अनैतिक और अनुचित है। इस तरह से उनके कथित कुकर्मो की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।” आपको बता दें कि अकबर पर ‘मीटू मूवमेंट’ के तहत दर्जनभर महिलाओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

‘मी टू’ अभियान ने पकड़ा तूल

आपको बता दें कि भारत में जारी ‘मी टू’ अभियान (यौन उत्पीड़न के खिलाफ अभियान) तूल पकड़ता जा रहा है। कई अन्य महिलाएं अपने अनुभवों को सार्वजनिक तौर पर शेयर कर रही हैं। आपको बता दें कि अभिनेत्री तनुश्री दत्ता के मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाए जाने के बाद से #MeToo आंदोलन ने सही मायने में भारत में दस्तक दी। तनुश्री के बाद एक-एक कर कई बड़े सितारों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए जा चुके हैं।

फिल्म इंडस्ट्री से ‘मी टू’ अभियान की शुरुआत होने के बाद इसकी चपेट में मीडिया जगत भी आ गया है और इसकी लपटें मोदी सरकार के एक मंत्री को अपने लपेटे में ले रही हैं। अपने समय के मशहूर संपादक व वर्तमान में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर पर दर्जनभर महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए हैं। इन महिलाओं ने उन पर तमाम मीडिया संस्थानों में संपादक रहते हुए यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है।

नाना पाटेकर के बाद जहां विकास बहल, कैलाश खेर, चेतन भगत, जतिन दास, रजत कपूर, जुल्फी सैयद, आलोक नाथ, संपादक प्रशांत झा, रघु दीक्षित, सुहेल सेठ, अदिति मित्तल, सुभाई घई, साजिद खान, पीयूष मिश्रा और राहुल जौहरी भी ‘मी टू’ की चपेट में आए हैं, जिनपर यौन उत्पीड़न, बदसलूकी, गलत तरीके से छूने जैसे आरोप लग चुके हैं।

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