दिग्विजय सिंह का दावा- 22 बागी कांग्रेस विधायकों में से 13 नहीं छोड़ना चाहते हैं पार्टी, हम सदन में बहुमत साबित करेंगे

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मध्य प्रदेश में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम और ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने की पृष्ठभूमि में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने विधानसभा में कमलनाथ सरकार के बहुमत साबित करने का विश्वास जताते हुए बुधवार को दावा किया कि 22 बागी विधायकों में 13 ने कांग्रेस नहीं छोड़ने का भरोसा दिया है। सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेताओं से यह समझ पाने में गलती हुई कि सिंधिया कांग्रेस छोड़ने जैसा कदम उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह कैबिनेट मंत्री बनने की ‘अतिमहत्वाकांक्षा’ के चलते भाजपा में शामिल हुए हैं।

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file- photo

दिग्विजय सिंह ने समाचार एजेंसी पीटीआई (भाषा) से बातचीत में कहा, ‘‘यह गलती हमसे हुई कि हम यह नहीं समझ पाए कि वह कांग्रेस छोड़ देंगे। कांग्रेस ने उन्हें क्या नहीं दिया। चार बार सांसद बनाया, दो बार केंद्रीय मंत्री बनाया और कार्य समिति का सदस्य और महासचिव बनाया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस 122 विधायकों के रहते हुए आसानी से उन्हें राज्यसभा भेज सकती थी। लेकिन हम उन्हें कैबिनेट मंत्री नहीं बना सकते थे। सिर्फ मोदी-शाह उन्हें कैबिनेट मंत्री बना सकते थे, हम नहीं।’’

सिंह का यह बयान उन खबरों के संदर्भ में आया है, जिसमें कहा जा रहा है कि सिंधिया समर्थक विधायकों के मध्य प्रदेश में सरकार बनाने में शिवराज सिंह चौहान का समर्थन करने के बदले में उन्हें (सिंधिया को) मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। सिंधिया के आज भाजपा में शामिल होने पर सिंह ने खुलासा किया, ‘‘कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के समय सिंधिया को उप मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन उन्होंने कहा कि उनके नामित व्यक्ति को उप मुख्यमंत्री बनाया जाए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आप बन जाइए तो मुझे दिक्कत नहीं है, लेकिन आपके किसी चेले को उप मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाएगा।’’ सिंह ने कहा, ‘‘कमलनाथ ने तब उनके (सिंधिया) छह समर्थकों को कैबिनेट में शामिल किया।’’

सिंह ने कहा कि सिंधिया के करीबी दो से तीन मंत्रियों और 10 बागी विधायकों ने आश्वासन दिया है कि वे कांग्रेस नहीं छोड़ रहे हैं। इस्तीफा देने वाले 22 विधायकों के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘‘ये 22 विधायक कांग्रेस के हैं। हम इनके परिवारों के संपर्क में हैं। हम चुप नहीं बैठे हैं, हम सो नहीं रहे हैं। 10 विधायक और दो-तीन मंत्री कह रहे हैं कि वो कांग्रेस से अलग नहीं होंगे।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या कमलनाथ सरकार बचेगी तो सिंह ने कहा, ‘‘हम विधानसभा में बहुमत साबित करेंगे। हम किसी भी समय शक्ति परीक्षण के लिए तैयार हैं।’’

गौरतलब है कि, एक दिन पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी और फिर 22 विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह दावा भी किया कि सिंधिया के भाजपा में जाने का षड्यंत्र तीन महीने से चल रहा था। राज्य में संकट से जुड़े घटनाक्रमों को विस्तार से बताते हुए उन्होंने दावा किया कि पिछले साल लोकसभा चुनाव में हार के बाद सिंधिया परेशान हो और हताश हो गए थे और उन्होंने मोदी-शाह के सामने प्रस्ताव रखा कि वह कमलनाथ सरकार को गिरा सकते हैं।’’ सिंह ने कहा, ‘‘उस समय उन्होंने एक मित्र के जरिये मोदी जी और अमित शाह से मुलाकात की।’’

सिंह ने दावा किया कि राज्य के भाजपा नेता हालांकि इस विचार के खिलाफ थे और उन्हें भरोसा था कि वे खुद इस काम को कर सकते हैं। उन्होंने यह दावा भी किया कि जब प्रदेश भाजपा के नेता कमलनाथ सरकार को अस्थिर करने में विफल रहे तब अमित शाह ने सिंधिया को इस काम में लगाया। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘जब भाजपा नेता सरकार नहीं गिरा पाए तो अमित शाह ने उनसे कहा कि तुम लोग निकम्मे निकले और मैं यह काम (सरकार गिराने का) सिंधिया जी को दे रहा हूं।’’

भाजपा पर कमलनाथ सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाते हुए सिंह ने कहा, ‘‘भाजपा कहती है कि यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है, लेकिन विधायकों को चार्टर्ड विमान से कौन ले गया? भाजपा के लोग ले गए। यहां तक कि विधायकों के इस्तीफे भी भाजपा के एक पूर्व मंत्री बेंगलुरू से लेकर आए। यह भाजपा की ओर से प्रायोजित है तथा इसका सारा खर्च वही उठा रही है।’’ उन्होंने दावा किया कि बागी विधायकों के फोन ले लिये गए हैं और परिवार के सदस्यों के साथ उनकी बातचीत को रिकॉर्ड किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभा अध्यक्ष को त्यागपत्रों की विश्वसनीयता को सत्यापित करना होगा। विधायकों को बुलाकर सत्यापित करेंगे कि ये उनके इस्तीफे हैं या नहीं। अब विधानसभा अध्यक्ष इन इस्तीफों के सत्यापन के लिए बेंगलुरू तो नहीं जाएंगे।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या सिंधिया की फिर से कांग्रेस में वापसी संभव है तो सिंह ने कहा, ‘‘मुझे पहले भी कोई ऐतराज नहीं था और आज भी नहीं है।’’ सिंह ने यह भी कहा कि ग्वालियर क्षेत्र में सिंधिया के मुताबिक काम हुए हैं और उनको किसी भी तरह से नजरअंदाज नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ग्वालियर-चंबल संभाग में पूरी कांग्रेस यही चलाते थे। पूरा प्रशासनिक तंत्र इनके हिसाब से दिया गया। मेरे गृह जिले गुना में भी एसपी और डीएम इनके कहे मुताबिक पोस्ट होते हैं। भिंड-मुरैना में इनके हिसाब से नियुक्तियां होती हैं। यही स्थिति शिवपुरी, ग्वालियर, अशोक नगर, भिंड और मुरैना में है।’’

गौरतलब है कि, मध्य प्रदेश विधानसभा में 230 सीटें हैं, जिनमें से दो सीटें फिलहाल खाली हैं। इस प्रकार वर्तमान में प्रदेश में कुल 228 विधायक हैं, जिनमें से 114 कांग्रेस, 107 भाजपा, चार निर्दलीय, दो बहुजन समाज पार्टी एवं एक समाजवादी पार्टी का विधायक शामिल हैं। अगर 22 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिये जाते हैं तो विधानसभा में सदस्यों की प्रभावी संख्या महज 206 रह जाएगी। उस स्थिति में बहुमत के लिये जादुई आंकड़ा सिर्फ 104 का रह जाएगा। ऐसे में, कांग्रेस के पास सिर्फ 92 विधायक रह जाएंगे, जबकि भाजपा के 107 विधायक हैं। कांग्रेस को चार निर्दलीयों, बसपा के दो और सपा के एक विधायक का समर्थन हासिल है। उनके समर्थन के बावजूद कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से दूर हो जाएगी।

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