बुलेट ट्रेन प्रोजेक्‍ट के खिलाफ 1000 किसानों ने खोला मोर्चा, हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर परियोजना का किया विरोध

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी योजना ‘मेक इन इंडिया’ को झटका लगता हुआ नजर आ रहा है। दरअसल, प्रस्तावित मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन से प्रभावित करीब एक हजार किसानों ने मंगलवार (18 सितंबर) को गुजरात हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर परियोजना का विरोध किया है।

बुलेट ट्रेन
(AFP File Photo)

मुख्य न्यायाधीश आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति वी एम पांचोली की एक खंडपीठ हाई स्पीड रेल परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण को चुनौती देने वाली पांच याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इन याचिकाकर्ताओं के अलावा 1000 किसानों ने हाईकोर्ट में अलग से हलफनामा देकर कहा कि केंद्र की इस महत्वाकांक्षी 1.10 लाख करोड़ रुपए की परियोजना से काफी कृषक प्रभावित हुए हैं और वे इसका विरोध करते हैं।

समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में किसानों के वकील आनंद याग्निक ने कहा कि केंद्र ने 3 महीने से याचिकाओं का जवाब नहीं दिया है और राज्य सरकार अधिग्रहण कर रही है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक बुलेट ट्रेन के प्रस्तावित मार्ग से जुड़े गुजरात के विभिन्न जिलों के प्रभावित किसानों ने हलफनामे में कहा कि वे नहीं चाहते कि परियोजना के लिए उनकी जमीन का अधिग्रहण किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा भू अधिग्रहण प्रक्रिया इस परियोजना के लिए भारत सरकार को सस्ती दर पर कर्ज मुहैया कराने वाली जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) के दिशानिर्देशों के भी विपरीत है।

किसानों ने आरोप लगाया कि गुजरात सरकर ने बुलेट ट्रेन के लिए सितंबर 2015 में भारत और जापान के बीच समझौते के बाद भू अधिग्रहण अधिनियम 2013 के प्रावधानों को हलका किया और प्रदेश सरकार द्वारा किया गया संशोधन अपने आप में जेआईसीए के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। उन्होंने अदालत को बताया कि न तो उनकी सहमति ली गई न ही भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई करते हुए उनसे कोई परामर्श किया गया।

बता दें कि पिछले दिनों ‘मेट्रो मैन’ के नाम से मशहूर ई श्रीधरन ने कहा था कि बुलेट ट्रेन देश के एलीट क्लास के लिए है। उनका कहना था कि बुलेट ट्रेन का किराया बहुत महंगा होगा जो आम आदमी की पहुंच से बहुत दूर होगा। लिहाजा देश को स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक रेल व्यवस्था की ज्यादा जरूरत है, जिससे देश की बड़ी आबादी पर असर पड़ेगा।श्रीधरन ने बुलेट ट्रेन को धनाढ्य वर्ग की सवारी बताते हुए कहा कि यह आम आदमी की पहुंच से बहुत दूर है।

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