जेएनयू देश को तोड़ने का काम कर रही है : आरएसएस

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आरएसएस ने अपने मुखपत्र ‘पाञ्चजन्य ‘ में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) को देश विरोधी ताकतों और नक्सल समर्थकों का घर बताया है ।

संघ का कहना है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में योगदान करने वाले संस्थान ने इंदिरा और नेहरू के अजेंडे को आगे बढ़ाया है ।

जेएनयू में एक बड़ा तबका तैयार हो रहा है जिससे देश के टूटने का डर है ।

संघ ने यूनिवर्सिटी में मौजूद सभी छात्र संघों को नक्सलसर्मथक और नक्सलवादी करार देते हुए कहा की ये वो लोग है जिन्होंने दंतेवाड़ा में मरे जवानों के लाशों पर जश्न मनाया था ।

मुखपत्र में लिखा है कि उच्च तालीम देने वाली इस यूनिवर्सिटी ने हर बार भारतीय संस्कृति को गलत तरीके से पेश किया है ।

जेएनयू एक ऐसी जगह है जन्हा राष्ट्रवादिता नहीं है । राष्ट्रवादिता जेएनयू के कैंपस में अपराध है ऐसा कुछ मुखपत्र ने दावा किया है ।

संघ ने कहा है जेएनयू के प्रोफेसर्स सरकार पैसे का गलत इस्तेमाल करते हैं और उनके कई आयोजन देश को खोखला करने के उदेश्य से होती हैं ।

मुखपत्र में लिखा है कि देश का सारा पैसा जेएनयू माओवाद में लगा रहा है और सारी गतिविधियाँ देश को तोड़ने वाली कर रहा है ।

अभी कुछ दिन पहले ही जेएनयू ने बीजेपी शासित केंद्र सरकार के द्वारा प्रस्तावित किया योग कोर्स को शार्ट टर्म कोर्सेज में शामिल करने से खारिज कर दिया था ।

यह प्रस्ताव उस समय खारिज हुआ है जब केंद्र सरकार पर भगवाकरण और पक्षपात का आरोप लगातार लगने लगा है।

हिंदूवादी संगठन आरएसएस ने मौजूदा केंद्र सरकार से संस्कृत और योग जैसे कोर्सेज को स्कूलों और यूनिवर्सिटीज में पढ़ाने के लिए प्रस्ताव को अमली जमा पहनाने में अपनी एड़ी चोटी का जोर लगा रही है है ।

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