केंद्र सरकार को एच.एल. दत्तू की नसीहत, बरकरार हो कानून का शासन

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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एच.एल. दत्तू ने केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए कहा है कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई हर सरकार का पहला कर्तव्य है कि वह देश में कानून के शासन को बरकरार रखे और नागरिकों की विभाजनकारी तत्वों से सुरक्षा करे।

दत्तू ने कहा, “वर्तमान सरकार भी इससे अलग नहीं है और इस सरकार को भी कानून के शासन को बरकरार रखने के लिए ही जनादेश हासिल हुआ है।”

उन्होंने कहा कि मेरा विश्वास है कि वह विभाजनकारी तत्वों पर लगाम कसने के लिए पर्याप्त कदम उठा रही है और नागरिकों को संविधान से मिले मूलभूत अधिकार सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रही है।

एक अंग्रेजी अखबार को दिए एक इंटरव्यू में चीफ जस्टिस ने कहा कि भारत ऐसा देश है, जहां कानून का शासन है, इसे सबसे अधिक महत्व देना चाहिए। अदालतों को भी कानून के शासन को बरकरार रखने के लिए हर प्रयास करना चाहिए। अदालतों को ऐसे मामलों में कड़ा रुख अपनाना चाहिए, जिनमें घृणा के चलते किसी को पीडि़त किया गया हो।

चीफ जस्टिस की यह टिप्पणी देश में घृणा के चलते लोगों को मौत के घाट उतारने की कई घटनाओं के संदर्भ में मानी जा रही है।

दो दिन पहले ही गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपने साथी मंत्री को हेट क्राइम के मामले में संभलकर बोलने की नसीहत दी थी।

 

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  1. Amir Siddiqui

    10 mins ·

    एक गोभक्त से भेंट
    गाय को लेकर हो रही राजनीति नई नहीं है. भारत में चुनावों के वक्त गोभक्ति का मौसम जरूर आता है. प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई ने बरसों पहले इस गोभक्ति और भक्तों की खबर अपने व्यंग्य ‘एक गोभक्त से भेंट’ में ली थी, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है

    एक शाम रेलवे स्टेशन पर एक स्वामीजी के दर्शन हो गए. ऊंचे, गोरे और तगड़े साधु थे. चेहरा लाल. गेरुए रेशमी कपड़े पहने थे. पांवों में खड़ाऊं. हाथ में सुनहरी मूठ की छड़ी. साथ एक छोटे साइज का किशोर संन्यासी था. उसके हाथ में ट्रांजिस्टर था और वह गुरु को रफी के गाने के सुनवा रहा था.

    मैंने पूछा- स्वामी जी, कहां जाना हो रहा है?

    स्वामीजी बोले – दिल्ली जा रहे हैं, बच्चा!

    मैंने कहा- स्वामीजी, मेरी काफी उम्र है, आप मुझे ‘बच्चा’ क्यों कहते हैं?

    स्वामीजी हंसे. बोले – बच्चा, तुम संसारी लोग होटल में साठ साल के बूढ़े बैरे को ‘छोकरा’ कहते हो न! उसी तरह हम तुम संसारियों को बच्चा कहते हैं. यह विश्व एक विशाल भोजनालय है जिसमें हम खाने वाले हैं और तुम परोसने वाले हो. इसीलिए हम तुम्हें बच्चा कहते हैं. बुरा मत मानो. संबोधन मात्र है.

    स्वामीजी बात से दिलचस्प लगे. मैं उनके पास बैठ गया. वे भी बेंच पर पालथी मारकर बैठ गए. सेवक को गाना बंद करने के लिए कहा.

    कहने लगे- बच्चा, धर्मयुद्ध छिड़ गया. गोरक्षा-आंदोलन तीव्र हो गया है. दिल्ली में संसद के सामने सत्याग्रह करेंगे.

    मैंने कहा- स्वामीजी, यह आंदोलन किस हेतु चलाया जा रहा है?

    स्वामीजी ने कहा- तुम अज्ञानी मालूम होते हो, बच्चा! अरे गौ की रक्षा करना है. गौ हमारी माता है. उसका वध हो रहा है.

    मैंने पूछा- वध कौन कर रहा है?

    वे बोले- विधर्मी कसाई.

    मैंने कहा- उन्हें वध के लिए गौ कौन बेचते हैं? वे आपके सधर्मी गोभक्त ही हैं न?

    स्वामीजी ने कहा- सो तो है. पर वे क्या करें? एक तो गाय व्यर्थ खाती है, दूसरे बेचने से पैसे मिल जाते हैं.

    मैंने कहा- यानी पैसे के लिए माता का जो वध करा दे, वही सच्चा गो-पूजक हुआ!

    स्वामीजी मेरी तरफ देखने लगे. बोले- तर्क तो अच्छा कर लेते हो, बच्चा! पर यह तर्क की नहीं, भावना की बात है. इस समय जो हजारों गोभक्त आंदोलन कर रहे हैं, उनमें शायद ही कोई गौ पालता हो पर आंदोलन कर रहे हैं. यह भावना की बात है.

    स्वामीजी से बातचीत का रास्ता खुल चुका था. उनसे जमकर बातें हुईं, जिसमें तत्व मंथन हुआ. जो तत्व प्रेमी हैं, उनके लाभार्थ वार्तालाप नीचे दे रहा हूं.

    स्वामीजी और बच्चा की बातचीत

    स्वामीजी, आप तो गाय का दूध ही पीते होंगे?

    नहीं बच्चा, हम भैंस के दूध का सेवन करते हैं. गाय कम दूध देती है और वह पतला होता है. भैंस के दूध की बढ़िया गाढ़ी मलाई और रबड़ी बनती है.

    तो क्या सभी गोभक्त भैंस का दूध पीते हैं?

    हां, बच्चा, लगभग सभी.

    तब तो भैंस की रक्षा हेतु आंदोलन करना चाहिए. भैंस का दूध पीते हैं, मगर माता गौ को कहते हैं. जिसका दूध पिया जाता है, वही तो माता कहलाएगी.

    यानी भैंस को हम माता…नहीं बच्चा, तर्क ठीक है, पर भावना दूसरी है.

    स्वामीजी, हर चुनाव के पहले गोभक्ति क्यों जोर पकड़ती है? इस मौसम में कोई खास बात है क्या?

    बच्चा, जब चुनाव आता है, तब हमारे नेताओं को गोमाता सपने में दर्शन देती है. कहती है बेटा चुनाव आ रहा है. अब मेरी रक्षा का आंदोलन करो. देश की जनता अभी मूर्ख है. मेरी रक्षा का आंदोलन करके वोट ले लो. बच्चा, कुछ राजनीतिक दलों को गोमाता वोट दिलाती है, जैसे एक दल को बैल वोट दिलाते हैं. तो ये नेता एकदम आंदोलन छेड़ देते हैं और हम साधुओं को उसमें शामिल कर लेते हैं. हमें भी राजनीति में मजा आता है. बच्चा, तुम हमसे ही पूछ रहे हो. तुम तो कुछ बताओ, तुम कहां जा रहे हो?

    स्वामीजी मैं ‘मनुष्य-रक्षा आंदोलन’ में जा रहा हूं.

    यह क्या होता है, बच्चा?

    स्वामीजी, जैसे गाय के बारे में मैं अज्ञानी हूं, वैसे ही मनुष्य के बारे में आप हैं.

    पर मनुष्य को कौन मार रहा है?

    इस देश के मनुष्य को सूखा मार रहा है, अकाल मार रहा है, महंगाई मार रही है. मनुष्य को मुनाफाखोर मार रहा है, काला-बाजारी मार रहा है. भ्रष्ट शासन-तंत्र मार रहा है. सरकार भी पुलिस की गोली से चाहे जहां मनुष्य को मार रही है. बिहार के लोग भूखे मर रहे हैं.

    बिहार? बिहार शहर कहा है बच्चा?

    बिहार एक प्रदेश है, राज्य है.

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