मोदी सरकार के संकेत के बाद राम मंदिर निर्माण के लिए 20 टन पत्थर अयोध्या पहुंचे

0

अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए बीस टन पत्थर वहाँ कारसेवक पुरम में लाए गए हैं। ये पत्थर दो ट्रकों में राजस्थान से लाए गए हैं।

वीएचपी के कारसेवकपुरम के प्रभारी शरद शर्मा ने कहा, “मंदिर निर्माण के काम में पत्थर बहुत चाहिए। अभी 20 टन पत्थर आए हैं, लेकिन लगभग दो लाख टन पत्थर चाहिए। हमें उम्मीद है कि अब आगे लोग ही पत्थर दान करेंगे। जैसे ही सरकार की तरफ़ से आदेश मिलेगा, हम निर्माण काम शुरु करेंगे।”

विहिप मीडिया के अनुसार अभी करीब 75 हजार घनफुट पत्थर और आएंगे। यह पत्थर दानदाताओं की ओर से रामजन्मभूमि न्यास को दान किया गया है। इसकी प्रेरणा विहिप के पूर्व सुप्रीमो अशोक सिंहल ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में दी थी।

Also Read:  रघुराम राजन आज रिज़र्व बैंक के गवर्नर का पद छोड़ देंगे, मोदी सरकार के लिए क्या थी उनकी आखरी नसीहत

रामसेवकपुरम स्थित कार्यशाला में पत्थरों की पहली खेप पहुंचने पर रामजन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने वैदिक मंत्रोच्चर के बीच शिला पूजन किया। इस मौके पर उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही मामले का हल हो जाएगा और मंदिर निर्माण का कार्य शुरू होगा।

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि मामला भले सुप्रीम कोर्ट में है लेकिन कोर्ट भी जनभावनाओं का अनादर नहीं करती है। उन्होंने कहा कि हम कोर्ट का सम्मान करते हैं और यह विश्वास है कि निर्णय हिन्दू समाज के पक्ष में ही आएगा।

Also Read:  भारत, जापान ने असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए
Congress advt 2

न्यास अध्यक्ष ने कहा कि पहले शिलापूजन के बाद गुलामी का ढांचा ढह गया था और अब दूसरे शिला पूजन से निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार को समय देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार के पास बहुत से कार्य हैं लेकिन वह हिन्दू जन भावना के विपरीत नहीं है।

ग़ौरतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वर्ष 2010 में साठ साल पुराने बाबरी मस्जिद-राममंदिर विवाद पर फ़ैसला सुनाया था जिसके मुताबिक जिस भूमि पर बाबरी मस्जिद मौजूद थी उसका हिंदुओं और मुस्लमानों की बीच बटवारा करने का आदेश दिया गया था।

फ़िलहाल ये मामला सुप्रीम कोर्ट में है और विवादित जगह पर किसी तरह के निर्माण की इजाज़त नहीं है।

Also Read:  MP: बीजेपी ने अपने विधायकों को दी नसीहत, कहा- विधानसभा में कठिन सवाल मत पूछना

वीएचपी के जानकारों के मुताबिक राजस्थान में कुछ खदानें बंद हो रही थीं इसलिए तत्परता से पत्थर मंगाने का काम किया गया है।

दरअसल इससे पहले भी अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए पत्थर आते रहे हैं। 2007 तक पत्थर लगातार आ रहे थे। बीच में ये पत्थर राजस्थान सरकार के खदानों के नियम बदलने के कारण आना बंद हो गए थे।

वहीं इस ताज़ा घटनाक्रम पर प्रशासन ख़ामोश है और स्थिति पर नज़र रख रहा है। प्रशासन का कहना है कि जब तक अयोध्या में शांति बनी हुई है तब तक वह कोई कार्रवाई नहीं करेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here