मामलों का लंबित रहना कानूनी व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती: दत्तू

0
>

प्रधान न्यायाधीश एच.एल.दत्तू ने गुरुवार को कहा कि मामलों के निपटारे में देरी और इनका लंबित रहना देश की कानूनी व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, और इस स्थिति से निपटने के लिए कुछ नए तरीके निकालने होंगे।

राष्ट्रीय विधि दिवस पर सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में दत्तू ने कहा, “अगर इंसाफ तक पहुंच के अधिकार को आगे भी अर्थपूर्ण बनाए रखना है तो एक तर्कसंगत समय में मामलों को निपटाना होगा। देरी और मामलों का लंबित रहना देश की कानूनी व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं।”

Also Read:  पेटीएम ने 7 और ग्राहकों पर लगाया 3.21 लाख रुपए की धोखाधड़ी का आरोप

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि 2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने ‘अप्रत्याशित रूप से’ 83,013 मामले निपटाए। यह शीर्ष अदालत द्वारा किसी भी साल निपटाए गए मामलों की सर्वाधिक संख्या है।

Also Read:  पुणे में अस्पताल ने नहीं लिए पुराने नोट, इलाज में देरी करने से हुई नवजात की मौत

इतने मामले निपटाने का श्रेय उन्होंने साथी न्यायमूर्तियों और बार के सदस्यों को दिया और कहा कि इतने मात्र से संतुष्ट नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा, “हमें लगातार बढ़ते हुए मामलों पर नजर रखनी होगी। हमारा मूल्यांकन इस आधार पर नहीं होगा कि हमने क्या किया था बल्कि, इस आधार पर होगा कि हमने क्या नहीं किया।”

Also Read:  सर्वोच्च न्यायालय ने पटाखों पर रोक लगाने से इनकार किया

प्रधान न्यायाधीश ने वकीलों से अनुरोध किया कि वे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए गए मामलों को टालें नहीं। उन्होंने बार और पीठ दोनों से कहा कि लंबित मामलों की समस्या से निपटने के लिए नए तौर तरीके खोजें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here