मधुमेह के कारण अंग काटने की नौबत में कमी

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मधुमेह के इलाज में हर साल उन्नति हो रही है, नतीजतन वर्ष 1990 के मध्य से मधुमेह पीड़ितों में एंप्यूटेशन (शरीर के अंगों को काटकर अलग करना) की नौबत अब न के बराबर रह गई है।

नए शोध में यह बात सामने आई है।

मधुमेह की वजह से पहले पैर के निचले हिस्से को काटकर शरीर से अलग करना पड़ता था, जिससे मरीजों की पीड़ा और बढ़ जाती थी।

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ऐसा करना तब जरूरी हो जाता था, जब मधुमेह की वजह से तंत्रिका कोशिकाएं व रक्त नलिकाएं बर्बाद हो जाती थीं, जिसके कारण पैरों के निचले हिस्से को रक्त संचरण मुश्किल हो जाता था।

मधुमेह से पीड़ित मरीजों को पैर से संबंधित गंभीर समस्याओं जैसे अल्सर के कारण उन्हें बार-बार अस्पतालों का चक्कर लगाना पड़ता है।

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नए शोध में डेनमार्क में मधुमेह के पीड़ितों में साल 1996-2011 के दौरान एंप्यूटेशन का अध्ययन किया गया।

विश्लेषण में इस बात का खुलासा हुआ कि मधुमेह से पीड़ित लोगों के एंप्यूटेशन में बेहद कमी आई है।

शोधकर्ताओं ने मधुमेह के मरीजों में टखने से नीचे के एंप्यूटेशन की नौबत में 10 फीसदी की कमी, जबकि घुटने के नीचे के एंप्यूटेशन में 15 फीसदी की कमी पाई।

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शोधकर्ताओं का मानना है कि मधुमेह के बेहतर इलाज से पीड़ितों के एंप्यूटेशन में कमी आई है।

यह शोध पत्रिका ‘डायबेटोलॉजिया’ में प्रकाशित हुआ है।

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