बांग्लादेश: 1971 के 2 युद्ध अपराधियों का मृत्युदंड बरकार

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बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय ने दो युद्ध अपराधियों अली अहसान मोहम्मद मुजाहिद और सलाउद्दीन कादर चौधरी को दिए गए मृत्युदंड के अपने फैसले को बरकारार रखा है।

बीडी न्यूज24 डॉट कॉम की रपट के मुताबिक, न्यायालय ने बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी पार्टी के महासचिव मुजाहिद और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता चौधरी की पुन: समीक्षा की याचिका नामंजूर कर दी। दोनों को 1971 में देश की आजादी के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए दी गई मौत की सजा सुनाई गई है।

बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य चौधरी (66) के खिलाफ फैसले के बाद ढाका और देश में अन्य जगहों पर सुरक्षा इंतजाम पुख्ता कर दिए गए हैं।

प्रधान न्यायाधीश एस. के. सिन्हा की पीठ ने मंगलवार को मुजाहिद की और बुधवार को चौधरी की याचिका पर सुनवाई की।

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फैसले के बाद अटॉर्नी जनरल महबूबे आलम ने कहा, “अब युद्ध अपराधियों को फांसी देने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।”

एक विशिष्ट न्यायाधिकरण ने बुद्धिजीवियों की हत्या और 1971 में हिंदुओं की हत्या और प्रताड़ना में लिप्त पाए जाने के जुर्म में 17 जुलाई, 2013 को मुजाहिद को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।

पूर्व समाज कल्याण मंत्री ने मृत्युदंड रद्द करने की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, लेकिन पीठ ने 16 जून को न्यायाधिकरण के फैसले को बरकरार रखा।

फैसले में कहा गया था कि मुजाहिद तत्कालीन पाकिस्तानी सेना के एक सहायक बल ‘अल-बद्र’ का एक प्रमुख संगठक था, जिसने 1971 के मुक्ति संग्राम के अंत में बंगाली बुद्धिजीवियों की हत्या की थी।

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मुजाहिद की जमात पार्टी ने यह कहते हुए उसके निर्दोष होने की वकालत की थी कि वह राजनीतिक बदले की भावना का शिकार हुए हैं।

युद्ध अपराध से संबंधित एक न्यायाधिकरण ने हिंदुओं और अवामी लीग के समर्थकों की सामूहिक हत्याओं और प्रताड़ना के आरोप में चौधरी को एक अक्टूबर, 2013 को मौत की सजा सुनाई थी।

पीठ ने न्यायाधिकरण द्वारा सुनाई गई मौत की सजा के खिलाफ चौधरी की याचिका पर सुनवाई के बाद 29 जुलाई को उनका मृत्युदंड बरकरार रखा था।

चौधरी पर 1971 में नरसंहार, हत्याओं, अपहरण, कारावास में अत्याचार, लूटपाट, आगजनी, हमलों और कई अन्य अपराधों में संलिप्त होने के आरोप तय किए गए थे।

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युद्ध अपराधों के दोषी बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी पार्टी के नेता मोहम्मद कमरुज्जमान को अप्रैल में मृत्युदंड दे दिया गया था।

युद्ध अपराधों के दोषी जमात के एक अन्य नेता अब्दुल कादर मुल्ला को 12 दिसम्बर, 2013 को मृत्युदंड दिया गया था।

मुजाहिद और चौधरी के पास अब राष्ट्रपति से क्षमादान मांगने के अतिरिक्त और कोई विकल्प नहीं बचा है।

मुस्लिम बहुल बांग्लादेश को 1971 तक पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था।

प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने कहा कि नौ महीनों के युद्ध के दौरान लगभग 30 लाख लोग मारे गए थे।

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