फेस्टिव सीजन में मोहब्बत की तलाश ऑनलाइन

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आपने ‘प्यार का मौसम’ या ‘आया मौसम दोस्ती का’ जैसा शब्द हिंदी फिल्मों के गीतों में सुना होगा और खासकर सावन महीने को प्यार के मुफीद मौसम माना जाता है।

लेकिन ‘ऑनलाइन लव’ के मामले में इस मौसम का मतलब फेस्टिव सीजन है। आश्चर्य हो रहा है! लेकिन ऐसा सचमुच में है, ये हम नहीं, बल्कि आंकड़ों की जुबानी है। डेटिंग एप ‘वू’ के मुताबिक, युवाओं द्वारा फेस्टिव सीजन के दौरान लव की ऑनलाइन तलाश में खासी बढ़ोतरी हो जाती है।

इस दौरान भारी संख्या में लोग डेटिंग एप को डाउलोड करते हैं और साइन अप करते हैं।

वू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुमेश मेनन ने आईएएनएस से कहा, “पिछले फेस्टिव सीजन के दौरान वू ने नियमित साइन अप में तीन गुना अधिक बढ़ोतरी और नियमित मैच-मेकिंग में दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की।”

उन्होंने कहा, “इस सीजन के दौरान इस डेटिंग एप को लगभग 17 लाख लोगों ने डाउनलोड कर पंजीयन किया और इसने प्रतिदिन 17 हजार लोगों को उनके ख्वाबों की मल्लिका/शहजादे से उन्हें मिलाने में मदद की।”

प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों का कहना है कि ये आंकड़ें चौंकाने वाले हैं, क्योंकि मैच मेकिंग में महीनों का समय लगता है, जबकि फेस्टिव सीजन के दौरान यह चुटकियों में हो जाता है।

मैचिंग में भारी बढ़ोतरी के बारे में सवाल पूछे जाने पर सीईओ के साथ ही एप के सह संस्थापक मेनन ने कहा, “जब संख्या में इजाफा होने लगा, तो हमने कुछ उपयोगकर्ताओं के फीडबैक इकट्ठे किए, जिसमें यह बात सामने आई कि फेस्टिव सीजन के दौरान खुशनुमा मिजाज की वजह से लोगों को अपना साथी ढूंढने में मदद मिलती है। इसके अलावा, छुट्टियां होने के कारण वे एप पर ज्यादा समय दे पाते हैं, जिससे इस काम में उन्हें और आसानी हो जाती है।”

उन्होंने कहा, “लोग हालांकि सालों भर आपस में जुड़ते हैं और मोहब्बत में पड़ते हैं, लेकिन हमने पाया कि लोगों में फेस्टिव सीजन के दौरान अपना मोहब्बत ढूंढ़ने के प्रति थोड़ी अधिक तड़प होती है। बीते दो वर्षो से हम इस बात को नोटिस कर रहे हैं कि फेस्टिव सीजन के आसपास एप के डाउनलोड में बढ़ोतरी होती है और यह फरवरी तक जारी रहता है, क्योंकि इसी महीने में अपने ख्वाबों के राजकुमार/राजकुमारी तक अपने दिल का संदेश सुनाने का दिन यानी ‘वेलेंटाइन डे’ आता है।

विशेषज्ञों ने लोगों की इस नई परंपरा में दिलचस्पी को प्रौद्योगिक क्रांति करार दिया और हर ढलते दिन या रात के साथ यह अपनी पहुंच का दायरा बढ़ाता ही जा रहा है।

भारत में अन्य मशहूर डेटिंग साइटों में ‘टिंडर’, ‘थ्रिल एंड ओके क्यूपिड’ हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डेटिंग साइटों पर 1.5-2 करोड़ लोग मौजूद हैं और प्रौद्योगिकी में उन्नति और इंटरनेट के प्रसार के साथ ही इस संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

कई उपयोगकर्ताओं ने आईएनएस से कहा कि अपने साथी की तलाश ऑनलाइन करने में उन्हें बेहद मजा आता है, क्योंकि गली-गली घूमने की बजाय जब प्रौद्योगिकी अपने स्क्रीन पर आपको यह मौका दे रही है, तो इसका फायदा क्यों न उठाया जाए और फेस्टिव सीजन में ऐसा करना और आसान हो जाता है।

मुंबई में सेल्स का काम देखने वाली नंदिनी (27) ने आईएएनएस से कहा, “दिवाली मेरे लिए सुकून भरा पल होता है। और जब लोग एक साथ जुटते हैं, तो मेरी शादी की बात उठती है और मेरे बहनोई ने इसके लिए मेरे मोबाइल पर वू डाउनलोड कर दिया और इसपर ट्राई करने को कहा। कई लोगों से मेरी अच्छी बातचीत हुई और अब मैं किसी उपयुक्त साथी की तलाश में हूं।”

दिल्ली में पब्लिक रिलेशंस का काम करने वाले वैभव मिश्रा (23) ने कहा कि साथी की ऑनलाइन तलाश की बात मुझे मजाकिया लगा।

मिश्रा ने आईएएनएस से कहा, “गर्लफ्रेंड की ऑनलाइन तलाश करना शुरुआत में मुझे मजाकिया लगा, लेकिन बाद में यह सीरियस अफेयर में तब्दील हो गया और मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि मैंने इस एप की मदद से एक अच्छी गर्लफ्रेंड ढूंढ़ ली।”

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