नेताजी के अंतिम संस्कार से संबंधित रिकाॅर्ड को आॅनलाइन किया जायेगा

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23 जनवरी को देशभर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन मनाया जाता है। पिछले दिनों मोदी सरकार ने नेताजी से सम्बधिंत गुप्त दस्तावेजों को सार्वजनिक करने के लिये उनके परिवार से भी मुलाकात की थी।
अब उस कड़ी में एक नया पहलू जुड़ गया है। नेताजी की मौत का रहस्य अभी तक जिज्ञासा का विषय बना हुआ है कुछ लोगों का मानना है कि नेताजी ने अपनी पूरी आयू जी और वे भारत में ही गुप्त रूप से रह रहे थे जबकि विमान हादसे में उनकी मौत की अभी तक सार्वजनिक पुष्टी की गई है।
Netaji family MOdi
Netaji Subhash Chandra Bose’s family members with PM Modi.
फिलहाल नेताजी के आखिरी दिनों पर रोशनी डालने के लिए ब्रिटेन की एक वेबसाइट ने ताइवान के एक अधिकारी द्वारा दिया गया सबूत जारी किया है जिसका दावा है कि उसने 1945 में विमान हादसे में नेताजी की मौत के बाद उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कराया था।
यह सबूत ‘यूके फॉरेन ऑफिस फाइल नंबर एफसी 1852(6)’ में रखा है और यह 1956 में दिया गया सबूत है। यह उन कुछ अंतिम दस्तावेजों में शामिल है जिन्हें www.bosefiles.info द्वारा जारी किया जाना है।
महान भारतीय स्वतंत्रा सेनानी नेताजी की मौत 18 अगस्त 1945 को ताइपेई में एक हवाई पट्टी के बाहर विमान हादसे में हुई थी। वेबसाइट अधिकारियों ने कहा कि अन्य स्थानीय अधिकारियों के साथ ताइवानी अधिकारी तान ती-ती, जो उस समय ताइपेई में अंतिम संस्कार की अनुमति प्रदान करने से संबंधी कार्य के प्रभारी थे, तान ती-ती ने सुभाष बोस के पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार के बारे में किसी भी विवाद को खारिज किया है। इस बारे में दशकों से विवाद रहा है कि क्या भारत सरकार की दो जांचों में बोस की मौत की बात कहे जाने के बावजूद विमान हादसे की बात सच है।
फाइल संकेत करती है कि ब्रिटेन के विदेश विभाग को भेजी गई ताइवान पुलिस की रिपोर्ट में मौजूद सबूत दिल्ली स्थित ब्रिटिश उच्चायोग द्वारा जुलाई 1956 में भारत सरकार को भेजा गया था। ताइवान में ब्रिटेन के महावाणिज्य दूत अल्बर्ट फ्रैंकलिन ने 15 मई 1956 को ताइवान सरकार को पत्र लिखकर बोस की मौत की जांच कराने को कहा था। जवाब में, ताइवान की प्रांतीय सरकार के अध्यक्ष सीके येन ने 27 जून 1956 को एक विस्तृत पुलिस रिपोर्ट भेजी।
इसमें तान ती-ती का साक्षात्कार भी था जिसमें कहा गया कि बोस का अंतिम संस्कार 22 अगस्त 1945 को किया गया। इस वेबसाइट को बनाने का मकसद इस जानकारी को सार्वजनिक करना है।

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