गुजरात के वडोदरा में मुस्लिम महिलाएं क़ब्रिस्तान में रहने को मजबूर, हिन्दुओं ने किया था उनके बसाए जाने का विरोध

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गुजरात को वड़ोदरा में कई मुस्लिम परिवार इन दिनों क़ब्रिस्तान में रहने को मजबूर हैं क्यूंकि राज्य की भजपा सरकार ने ‘झुग्गी मुक्त’ मुहीम के तहत उनके घरों को तोड़ दिया है और जिस इलाके में उनके पुनर्वास की योजना बनायीं गई हैं वहां के स्थानीय हिन्दू उनके वहां रहने का विरोध कर रहे हैं।

जनसत्ता में छपी एक खबर के अनुसार, ये लोग उन्हीं लोगों में से हैं जिनके घर सुलेमान चॉल में थे जिसे वडोदरा को साफ और स्वच्छ बनाने के नाम पर तोड़ दिया गया। इन लोगों से वादा किया गया था कि उन्हें बेसिक सर्विस फॉर द पूअर (BSUP) स्कीम के तहत कपुरे नाम की जगह पर सस्ते मकान दिए जाएंगे पर, यह बात भी पूरी ना हो सकी।

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ये महिलाएं उन 300 परिवारों का हिस्सा हैं जिन्हे हैं ही में ‘झुग्गी मुक्त’ प्लान के तहत उनके घरों से विस्थापित कर दिया गया था। कुछ परिवारों ने तो फिलहाल अपने रिश्तेदारों के यहाँ शरण ले लिया है लेकिन 25 महिलाएं ऐसी हैं जिनके पास क़ब्रिस्तान में रहने के सिवा कोई दूसरा चारा नहीं है।

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दरअसल कपुरे में रहने वाले हिंदू लोगों ने वडोदरा नगर निगम को पत्र लिखकर मुसलमान लोगों को वहां ना बसाने की गुजारिश की थी।

इन विस्थापित परिवारों की एक और मजबूरी इनकी ग़रीबी है जिसकी वजह से ये लोग सरकार की तय की गई डाउन पैमेंट (25 हजार रुपए) भी नहीं दे पाए। इन लोगों को सस्ती योजना के तहत 1.3 लाख में घर मिल रहा था जिसमें से 25 हजार रुपए घर का कब्जा लेने से पहले जमा करवाने थे।

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फिलहाल हालात यह हैं कि लगभग 300 मुस्लिम परिवार दर-दर भटकने को मजबूर हैं और उनके घर का कोई ठिकाना नहीं है। इन्हीं में से लगभग 25 महिलाएं कब्रिस्तान को अपना घर बनाने पर मजबूर हैं। ये लोग यहां रह तो रहे हैं पर वहां मौजूद पेड़ों पर से कुछ भी तोड़कर नहीं खाते। 62 साल की बानुबीबी गुलाम नबी इमली तोड़ने की कोशिश में लगे बच्चों से कहती हैं, ‘यह अल्लाह का घर है। हमें इन फलों को खाने की इजाजत नहीं है।’

(फोटो: जनसत्ता )

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