RTI reply accuses Hema Malini of land grab, got land worth crores for just Rs 70K

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An RTI reply has revealed how the state government gave land in Mumbai’s Andheri area worth crores of rupees to the actress-turned politician and BJP MP Hema Malini for just Rs 70,000.

According to an IANS report, the Maharashtra government in December had allotted a prime 2,000-square-metre plot to the BJP Lok Sabha MP in the suburban upmarket Oshiwara area for her proposed dance academy.

But the documents obtained through an RTI reply by activist Anil Galgali, revealed that Hema Malini was allotted the plot worth crores of rupees for a paltry Rs.70,000.

“Not only that, this is the second time Hema Malini has been allotted a prime plot in the Mumbai suburbs. Earlier, in 1997, the (then) Shiv Sena-BJP government had given her a plot of land, but she could not develop it due to CRZ (Coastal Regulation Zone) issues,” Galgali told IANS.

The activist later told ANI that she had been favoured by the government for being a BJP MP.

“I’ve written to Maharashtra CM Devendra Fadnavis about this,” he added.

He claimed that though Hema Malini has not yet returned the earlier plot, the current government has allotted her another plot.

The RTI revelation has prompted the social media users to poke fun at the actress and the saffron party.

Here are some examples;

 

2 COMMENTS

  1. Sanjeev Kumar added 2 new photos — with Narendra Singh.

    4 hrs ·

    जय हिन्द साथियो।

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    जिन शहीदों की शहादत की वजह से आज हम सब इस देश की आजाद हवा में सांस ले पा रहे है।

    जिन शहीदों ने अपने जीवन की हर ख़ुशी और सुख को त्यागकर हम सबको एक आज़ाद वतन में रहने के काबिल बनाया आज अपनी राजनीतिक महत्वक्षाओ के चलते हमारे देश की सरकारे उन वतनपरस्त शहीदों का अपमान करती आ रही है।

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    भगतसिंह को सम्मान किसी एअरपोर्ट पर उनका नाम लिख कर नहीं दिया जा सकता और शायद हमारे शहीदे आजम कभी ये नहीं कहते की उनका नाम कही लिखा जाए क्योकि “शहीदे आजम भगतसिंह” का नाम अपने आप में ही एक सम्मान है।

    हमने सरकार से नहीं बोला था की चंडीगढ़ एअरपोर्ट का नाम भगत सिंह के नाम पर हो 2009 में खुद सरकार ने उनके नाम का प्रस्ताव पास किया था लेकिन 2013 तक उस पर अमल नहीं हुआ।

    सरकार बदली तो एअरपोर्ट का नाम भगतसिंह के नाम पर रखने का फैसला भी बदल गया। न तो उस सरकार ने किया और न ही ये सरकार कर रही है।

    ये सरकारे क्रान्तिकारियो के नाम पर हमेशा पीछे हटते आई है।

    लेकिन अब बस अब और नहीं। अब और हम हमारे शहीदों का अपमान नहीं सहेंगे।

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    शहीदे आजम ने कहा था “जो लोग ऊँचा सुनते है उन्हें बम के धमाके की जरुरत होती है”

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    इन सरकारो को भी ऐसे ही कुछ क्रन्तिकारी आंदोलनों के बम के धमाको की जरुरत है और ऐसा ही एक धमाका और अंतिम “चेतावनी” “25 फरवरी 2016” को “जंतरमंतर” दिल्ली पर होने जा रहा है।

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    अगर आप सोचते है की शहीदों ने आपके लिए कुछ किया है और आपको भी कुछ करना चाहिए तो जरूर पहुचे।

    इंकलाब जिंदाबाद। साम्राज्यवाद मुर्दाबाद।

    देश के मजदुर एक हो ।

    Sanjeev Kumar’s photo.

    Sanjeev Kumar’s photo.

  2. C K Mathue EX-CS RAJASTHAN

    आखिरी नौ महीनों ने खूब सिखाया

    Fri, 08 Aug 2014 07:50:00 | Editor Choice Hindi News

    सी.के. मैथ्यू

    पूर्व मुख्य सचिव, राजस्थान

    अब से कुछ घंटों बाद ही जयपुर से बेंगलूरू जाने वाली एयर कोस्टा की फ्लाइट उड़ान भर लेगी। फ्लाइट को गंतव्य तक पहुंचने में दो घंटे बीस मिनट लगेंगे। यानी 140 मिनट। इसके साथ ही राजस्थान में मैंने जहां 37 वर्ष का लम्बा समय व्यतीत किया, को अलविदा कह दूंगा। मुझे याद आते हैं, वे दिन जब मुझे जुलाई 1977 में मसूरी स्थित भारतीय प्रशिक्षण सेवा की ट्रेनिंग के लिए चुना गया था।

    मेरा 23वां जन्म दिवस आने में कुछ ही दिन बाकी थे। मैं उस बैच के सबसे कम उम्र के युवाओं में से एक था और विश्वविद्यालय से निकल कर सीधा वहां पहुंचा था। ऎसा लग रहा था मानो पूरा संसार मेरी मुट्ठी में आ गया है। तब रिटायरमेन्ट तो मन में कहीं था ही नहीं।

    दूर क्षितिज में बादलों की ओट में भी नहीं। अब कहने में कोई हर्ज नहीं, जब मुझे यह मालूम हुआ कि मुझे राजस्थान कैडर आवंटित किया गया है, मन में एक झटका सा लगा।

    कहां केरल की ताजगी भरी हरियाली, पानी से लबालब प्राकृतिक दृश्य और कहां रेगिस्तानी राज्य राजस्थान में पोçस्ंटग। मेरे मन में ऎसे कई सवाल हिचकोले खाने लगे। भाषा की जो समस्या थी, वो अलग। मैं हिन्दी से पूरी तरह अनजान जो था।

    तब से लेकर आज तक 37 साल हो गए हैं। जब मैं पीछे मुड़कर अतीत में झांकता हूं तो जीवन में आए कई उतार-चढ़ाव, क्रिया-कलापों के दृश्य उभरकर आंखों में चलचित्र की भांति तैर जाते हैं। आज मैं साठ वर्ष का हो गया हूं।

    स्वास्थ्य अच्छा है, शरीर की हडि्डयों में कोई फ्रैक्चर नहीं है, आत्म-सम्मान कायम है और अपने कार्यकाल के दौरान मैंने बहुत कुछ सीखा है। मैं बहुत खुश हूं, इतना कि उसे मापा नहीं जा सकता। मैं अन्तर्मन से कह रहा हूं कि मुझे सब जगह बेतहाशा सम्मान , अनुराग, वात्सल्य और प्रेम मिला। उसके लिए मैं हमेशा शुक्रगुजार रहूंगा।

    राजस्थान में पूरे कार्यकाल के दौरान मुझे कई जिम्मेदारियां मिलीं। उनमें से कुछ रोमांचक थीं तो कुछ दिलचस्प। उदयपुर से लेकर बाड़मेर तक और भीलवाड़ा से जयपुर तक। फील्ड पोçस्ंटग के बाद जयपुर आ गया और अपने 37 साल के कार्यकाल के 28 वर्ष जयपुर में रहा। यह वही शहर है जहां मेरी जड़ों को ऊर्जा मिली। ऊर्जा, खनन, सिंचाई, शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त जैसे मंत्रालयों में महत्वपूर्ण पदों पर रहा।

    पांच साल मुख्य मंत्री का प्रमुख सचिव भी रहा। यह बहुत ही दबाव वाला हाई-प्रोफाइल पद था। ऎसा जहां हर क्षण काम करना पड़ा। राजस्थान में ही मुझे मुख्य सचिव रहने का सौभाग्य मिला, जो कि किसी भी नौकरशाह की चाहत होती है। यानी राज्य के मुख्य सचिव का पद। यह लम्बे कॅरियर का चरम पद होता है। आज मैं यह गर्व के साथ कह सकता हूं कि मैंने इस पद की गरिमा को बनाए रखा।

    एक बात और, यह जयपुर ही है जहां मेरी पत्नी को पढ़ाने का मौका मिला, जयपुर के श््रेष्ठ स्कूल सैंट जेवियर्स में। वहां उन्होंने अपने जीवन के बीस वर्ष बडे ही संतोषपूर्ण और खुशगवार ढ़ंग से गुजारे। अभी कुछ दिन पहले ही मेरी पत्नी ने इस्तीफा दे दिया है ताकि वह मेरे साथ बेंगलूरू में रह सके। एक बात और, यह वही जयपुर है जहां मेरी एक मात्र लाडली पुत्री दिव्या ने स्कूल जाना शुरू किया।

    हम लोगों का ध्यान रखने वाली पुत्री के रूप में बड़ी हुई। अब उसका अपना परिवार है। पति जार्ज और बड़ी प्यारी सी और सम्मोहित करने वाली बेबी जारा है। उन्हें इंतजार है कि हम कब अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर बेंगलूरू रहने आ जाएं ताकि वो हमारे साथ समय बिता सकें।

    अब जब हम कुछ ही देर में फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट जाने को तैयार हैं तो मेरे मन में तरह-तरह के विचार और भावनाएं उमड़ रही हैं। हम कब फिर अपने निष्ठावान सेवकों से मिल पाएंगे। छित्तर जो पिछले तीन दशकों से हमारे साथ है। कमल जो हमारा घर की सारसम्भाल करता है और हमारी हर जरूरत का खयाल रखता है। बड़ी मूंछो वाला “वार-हीरो” हरी सिंह जो हमारी कार चलाता है।

    ये लोग बड़े ही निष्ठावान और दृढ़ इच्छाक्ति वाले इंसान हैं जो हर परिस्थिति में हमारे साथ डटे रहे। चट्टान की तरह दृढ़, जिनके चलते हमें सुरक्षा और चैन की अनुभूति होती रही। कुछ हमारे मित्र भी याद आए। डॉक्टर्स जो चिकित्सीय परामर्श देते थे और कुछ सहयोगी अधिकारी जिनके साथ हमारा सभी तरह का निकट का रिश्ता हो गया है। हजारों-हजार छोटी-बड़ी स्मृतियां हमारे मन में बाढ़ की तरह हिचकोले खा रहीं हैं।

    यह सब स्मृतियां बेंगलूरू में आकार लेने वाले हमारे भविष्य में एक छटा की तरह जीवन को सुशोभित करती रहेंगी। लेकिन भविष्य भी क्या है? क्योंकि ऎसा भविष्य ही क्या, जिसमें आने वाले अनिश्चितता भरे दिनों में सहारा एवं मजबूती देने वाली “भूतकाल की नींव” ही नहीं हो।

    मैं जानता हूं कि अब मेरे पास हमेशा की तरह वैसा निजी सहायक नहीं होगा, जो अतीत में सभी काम कर दिया करता था। आपने केवल कोई इच्छा जताई और जादुई तरीके से आपके पास हाजिर!! कोई डॉक्टर नहीं होगा जो बस एक टेलीफोन कॉल पर ब्लडप्रेशर नापने के लिए घर आ जाता था। सिनेमा टिकट आसानी से आरक्षित नहीं हो पाएगा। आपके लिए लोग रास्ता नहीं छोड़ेंगे। मैं यह भी जानता हूं कि हमें बेंगलूरू में अब कतार में खड़ा होना पड़ेगा। हमें किराने का सामान खुद खरीदने जाना होगा। बिना ड्राइवर के भीड़ से भरी सड़कों को पार करना होगा।

    लेकिन क्या ये सब दिक्कतें उस समय छू-मंतर नहीं हो जाएंगी जब जारा(दोहिती) मुस्कुराएगी? जब दिव्या और जार्ज लंच या डिनर के लिए घर आएंगे? क्या सभी का साथ जीवन की एक नई शुरूआत नहीं होगी जब हम किसी थियेटर के कोने में अथवा किसी अच्छे रेस्टोरेन्ट में साथ-साथ खाना खा रहे होंगे। जब मन एक नदी की तरह शांत वातावरण में संतुष्टि से भरपूर होगा?

    समय आ गया है, इसलिए यह भी बता ही देता हूं। मेरे कॅरियर के अंतिम आठ-नौ महीने मेरे धैर्य और सम्भाव की परीक्षा लेने वाले साबित हुए। शासन में परिवर्तन हो गया। इस कारण, मेरे काम और जिम्मेदारियों में परिवर्तन आ गया। इसने मुझे आत्मविश्लेषण और अंत:करण में झांकने का अद्वितीय समय और अवसर दिया। मानव व्यवहार की समझ बढ़ाई।

    अब मैं परिवार की ताकत, प्रार्थना की शक्ति और ध्यान एवं चिंतन का महत्व समझ गया हूं। अपने सच्चे मित्र और दिखावटी मित्रों को पहचानने लगा हूं। इस दौरान मैंने कई भ्रमों से छुटकारा पाया है।

    मैं यह आशा करता हूं कि इस प्रक्रिया से गुजरने के बाद अब मैं पहले की तुलना में ज्यादा समझदार, अधिक धैर्यवान और एक बेहतर मानव बन गया हूं। मैं यह विश्वास करना चाहता हूं कि मैं ज्यादा मजबूत बन गया हूं। अधिक ज्ञान और मजबूती के साथ मैं एक नई शुरूआत करने जा रहा हूं।

    निश्चित रूप से, यह एक नई शुरूआत और अंत का समय है। जिंदगी का एक अध्याय खत्म हो रहा है और दूसरा शुरू होने जा रहा है। हम संतोष्ा और मन की शांति के वास्ते जीवन में एक परिवर्तन के लिए प्रार्थना करते हैं। ईश्वर हम पर कृपा करें। हे ईश्वर, आपने अतीत में अनगिनत तरीकों से हमें आशीर्वाद दिया। हालांकि कई बार हम उसे भूल गए।

    हे ईश्वर,अब जब हम खुद आंसुओं के साथ राजस्थान की पवित्र धरती से दूर अनिश्चित लेकिन उम्मीद भरे भविष्य की तरफ जा रहे हैं, आप हमारे साथ रहना। अपनी कृपा बरसाते रहना ताकि हम अपने जीवन में तुम्हारा गुणगान करते रहे। आमीन।

    (सेवानिवृत्ति के बाद 3 अगस्त को बेंगलूरू जाने से पहले लिखा गया था यह ब्लॉग)

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