Farhan Akhtar shuts up trolls with epic poetry on Sadhvi Pragya Thakur

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Farhan Akhtar has had to face plenty of criticism after he mistakenly thought that people in Bhopal were voting in the last phase of elections. Farhan had taken to Twitter to ask people of Bhopal to defeat the BJP candidate, Sadhvi Pragya Thakur, who’s become a symbol of terror and hate in India.

Farhan Akhtar

No sooner had he posted his tweet urging people of Bhopal to vote against hate, the microblogging site was inundated with memes and jokes mocking Farhan’s ignorance about Indian elections. They sought to remind Farhan that Bhopal had already voted on 12 May and his appeal was one week late.

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Far from being fazed by social media ridicule, Farhan, son of poet Javed Akhtar, decided to shut up his trolls with an impressive poetry. He wrote, “Humne taareek galat samjhi toh galaa pakad liya, Jisne itihaas galat samjha use galey laga rahe ho. (I got the date wrong and they punced on me, but the same people are embracing those (Pragya) who got their history wrong.”



Pragya, who’s facing trial for terrorism charges for her role in the Malegaon blasts, was named by the BJP as its Lok Sabha candidate. After insulting a martyr, slain former ATS chief Hemant Karkare, the terror accused had recently insulted Mahatma Gandhi by calling his assassin Nathuram Godse a patriot.

On the work front, Farhan is working on Shonali Bose’s The Sky Is Pink, which also stars Priyanka Chopra and Zaira Wasim among others. The film is set to release on 11 October this year.

1 COMMENT

  1. किसी कि निंदा करना या तारीफ करना एक भैड़चाल ही है। लगता है फरहा जी भी वैसी ही कर रही है। बहुत लम्बे समय बाद जो तथ्य बाहर आते और उनको स्तरीय के धरातल पर कसा तो पता चल रहा है कि येह तो एक हिंदु टेरर के नाम प्रायोजित/हुई बिसात का खेल था। जिसमें यह बैचारी संन्यासिन फंसा दी गई। फरहा आप भी कलाकार हैं, राष्ट्रीय स्तर आप विख्यात हिरोईन व फिल्म डायरेक्टर हैं। आप सिखाने के नाम पर भावी पीढ़ी को कामुकता, उच्छृंखलता बांट रही हो। आपके सान्निध्य में आने वाला हर प्रशंसक कामुकता और भोग का पर्याय होता है या बना दिया जाता है। हालांकि आप सैकुलरिज्म का एक उदाहरण है, आप मुस्लिम माता पिता की संतान होकर हिंदु पुरूष से विवाहिता है। यहां तक तो ठीक है, यह आपका व्यक्तिगत निर्णय है। हमें इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
    पर साध्वी प्रझा का भी स्त्री शरीर है। लेकिन रास्ता लाखों करोड़ों स्त्रीयों से अलग है। तपस्या, तटस्थता, तृष्णा रूपी अग्नि को भोगरहित जीवन जीने का संकल्प, राष्ट्र राज्य के उत्थान के लिये ये समर्पित उनका योगमय जीवन टीसी भी निरीह की हत्या कर ही नहीं सकता। इस बात की तो आपको गारंटी देनी चाहिए थी, परंतु आप क्या जाने योग के मायने। देश रक्षा के मायने।
    फरहा जी, साध्वी जैसी तपस्विनी के सान्निध्य में आने वाली अच्छी, बेटी, मां, बहिन, पत्नी बनती है। वात्सल्य की चरम सीमा को प्राप्त करती है। उच्च कोटी की समाज सेविका बनती है। इसमें कोई संशय नहीं है।
    तब क्या राजनीति से प्रेरित झुठे अपराध नहीं होते। करता यह संभव नहीं कि बिना किसी कारण ही साध्वी को मुलजिम बना दिया गया हो। राजनीति बहुविकल्पी होती है मेडम। ईर्ष्या इसकी देवी होती है, जो एक चिमनीस्वीपर की बेटी होती है जिसका कोई भी कुल धर्म नहीं होता है। वह तो एनार्की, मेसेकर्स,फ्लड, और अकाल, सुनामी, आदि प्राकृतिक विपदाओं, को अपना पसंदीदा वातावरण समझती है। जहां केवल लाशों का ढेर ही मानो उसका गहना हो जिनको देख देख कर तथा मरी हुई लाशों का खून पीना ही इसका अट्टहास है।
    इसलिए मेडम असत्य पर आधारित पुलिस कैसो से किसी व्यक्ति के असली चरीत्र का पता नहीं लगता है।

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