अपराध करने वाला बस अपराधी होता है उसका कोई ज़ात या धर्म नही होता

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ऋचा वार्ष्णेय

आखिर कब तक हम जातिवाद के जाल में फसे रहेंगे, आखिर कब तक ? पहले अंग्रेज़ो ने २०० सालतक हमे आपस में लड़ाकर, दास बनाकर भारत वर्ष को लूटा| अगर आज़ादी की लड़ाई के वक़्त भी हम यही जातिवाद के चक्रव्यूह में फंसे रहते तो क्या मिल पाती आज़ादी ? देश का इतिहास भरा है कि कैसे सारे वीरो ने एकजुट होकर उन् अंग्रेजों को उखाड़ फेका..वो न हिन्दू थे न मुसलमान, वो थे तो बस भारत माँ के मतवाले बेटे जिन्होंने सिर पे बसंती चोला बांधा और अंग्रेज़ो को मार भगाया|

अँगरेज़ गये तो फिर आये हमारे राजनीतिज्ञ, उन्हें अच्छे से ज्ञात है हमारी इस कमज़ोरी का और वो इसी जातिवाद की आग में हमे लड़ाकर अपनी रोटियां सेकते रहे हैं क्यूंकि वो जानते हैं, जब तक हम लोग आपस में इस निराधार बात की लड़ाई में उलझे रहेंगे वो आराम से हमारे द्वारा दिए गए आयकर एवं विक्रीकर के धन को भारत निर्माण एवं भारतवासी के विकास की जगह घोटालो में विलुप्त करते  रहेंगे| वो किसी न किसी धर्म के नाम से  हमे आपस में उलझा करअपना कार्यकाल व्यतीत कर फिर से आ जायेंगे हमसे मत मांगने|

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फिर से हमे सुनहरे भारत के सपने दिखाने और धर्म की दूकान सजा कर लूटने और फिर से हमे धर्म भक्ति के भुलावे मूर्ख बनाकर देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी भूल जायेंगे|

जिस दिन हम सब आपस में मिल जाएंगे यकीन मानिए इन् सियासी सूरमाओं के पसीने छूट जाएंगे| मत भूलिए देश की सीमा पर सारे मौसमों की मार खाते हुए और दुश्मनो की गोली अपनी सीने पर खाते हुए देश की रक्षा में अपनी जिंदगी को दांव लगाये हुए वो जवान भी अगर धर्म सोचने के बारे में सोचने लगे तो देश की दुर्दशा का अंदाजा आप लगा सकते हैं|

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जिस दिन भी पूरे भारतवर्ष ने जातिवाद को भूलकर एक साथ हुंकारा उस दिन इन दुर्घर्टनाओ ,आतंकबाद एवं बुराइयो का नाश हो जायेगा और होगा तो बस भारत का भाग्योदय| खुद सोचिये क्या कभी कोई भी उस परिवार का सम्मान कर पाया है जहाँ घर में कलह रहे, भाई भाई को मारे.. जब घर में एकता न होगी तो घर तो कमज़ोर होगा ही और कोई भी दुश्मन हम पर कब्ज़ा कर सकता है|

इसलिए एक जुट हो जाइये और दुश्मनो को मुह तोड़ जवाब दीजिये जो बुरी नज़र जमाये बैठा है आपके घर पर.. और हमेशा ध्यान रखिये अपराध करने वाला बस अपराधी होता है उसकी कोई जाती या धर्म नही होता| अगर होता तो वो अपराध ही न करता क्यूंकि मज़हब नही सिखाता आपस बैर रखना| अगर हम इसी तरह अपने अपने  धर्म के नाम पर अपराधी को बचाते रहे तो अपराध बढ़ेगा ही क्यूंकि अपराधियो को धर्म की शरण में पनाह जो मिल रही है और हम धर्म के रखवाले दिन दहारे मरते रहँगे.. हम ह से हिन्दू, म से मुस्लिम हम हम नही हो सकते टुकड़ो में.

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NOTE: Views expressed are the author’s own. Janta Ka Reporter does not endorse any of the views, facts, incidents mentioned in this piece.

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