नोटबंदी का फैसला : 2016 का सम्राट भी बग़ैर कपडे के घूम रहा है लेकिन इस बार वो मानसिक और नैतिकता के रुप से निर्वस्त्र है

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एक ज़माने में

बहुत साल पहले एक सम्राट था। उसे नए कपड़े पहनना बेहद पसंद था। उसने अच्छा दिखने के लिए सारे पैसे अपने इस शौक पर खर्च कर दिए।

उसने दो सिलाई वालों को काम पर रखा उन्होंने सबसे बेहतरीन सूट सिलने का वादा किया।

सिलाई वालों ने दो करघे लगाए और बुनाई का नाटक किया हालांकि उस करघे में कुछ भी नहीं था। सभी बेहतरीन रेशम और शुद्ध पुराने धागे जिसकी उन्होंने मांग की सब बैग में चले गए। जबकि उन्होंने खाली करघे में काम किया।

सम्राट के मंत्री काम की प्रगति देखने के लिए गए तो उन्हें भी कपड़े खुद नहीं मिले।

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अंत में सिलने वालों ने घोषणा की कि सूट का काम पूरा हो गया। लेकिन ये एक ऐसा सूट है जो किसी को नज़र नहीं आएगा, खुद पहनने वाले को भी नहीं।  सम्राट बहुत खुश था और नग्न अवस्था में ही शहर की सैर को निकल गया।

सम्राट ने अदृश्य सूट पहने मार्च किया और यात्रा पर निकल गया। लोग राजा के नग्न होने पर हैरान थे लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हुई को वो उसे ये बताये।  लेकिन भीड़ में एक बच्चा था जिसने चिल्ला कर ये कहना शुरू कर दिया कि राजा नंगा घूम रहा है।

सम्राट ने सोचा वे सही थे, लेकिन उसने अपने घमंड की रक्षा करने के लिए अपनी यात्री जारी रखी।

हालांकि, अंदर से वो खुद बुरी तरह से अपमानित था। उसने खुद से एक वादा किया कि जब समय आएगा, वो इस मजा़क उड़ने का बदला लेगा।

2016

सम्राट को अभी भी कपड़ों का शौक है – उसने जो अपने नाम की कढ़ाई वाला सूट पहना था उसे ‘नीलामी में सबसे महंगा बिकने वाले सूट’ के तौर पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह मिली। वो इसलिए कि दस लाख की कीमत वाला ये सूट किसी भी भारतीय प्रधामंत्री द्वारा पहना गया ये सांसे माँगा सूट था।

हालांकि पिछले कुछ वर्षो में सम्राट ने अपने घमंड का पोषण करने के लिए नए तरीके ढूढ लिए हैं। इन दिनों वो खुद के लिए एक बड़ी 3 डी इमेज की योजना से प्यार करता है।

राज्य मशीनरी ने नियमित रूप से सम्राट के चारों ओर एक प्रभामंडल बनाने के लिए प्रचार प्रसार करना शुरु कर दिया, सम्राट को एक कुशल प्रशासक और ईमानदार शासक के रुप में दिखाने के लिए। कपड़े, अब, एक दिन में कम से कम चार बार बदले जाते हैं।

अपने बचपन और जवानी के बारे में काल्पनिक कहानियों की उसकी काल्पनिक जीवनी को स्कूल के पाठ्यक्रम में जगह मिल गई है। उनमें से सबसे प्रसिध्द किशोरअवस्था में मगरमच्छ के साथ उसकी बहादुरी की लड़ाई का किस्सा और एक रेलवे स्टेशन पर चाय विक्रेता के रूप में एक लंबे समय का कार्यकाल शामिल है।

कोई शक नहीं, इन परियों की कहानियों ने सम्राट के आत्मविश्वास को बढ़ा दिया और सार्वजनिक छवि को बल मिल गया। सम्राट के बारे में एक बड़ी संख्या की कहानियों पर अंधे भक्त विश्वास करने लगे हैं।

सम्राट को अपने भक्तों की हजारों की सभा में भाषण देने से प्यार है। वो बड़ी सभाओं को संबोधित करने के लिए दुनिया में घूमता है जहां उसके भक्त बार-बार उसका नाम जप कर बधाई देते हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, सम्राट खुद को एक रॉकस्टार के रूप में देखता है। उसे ड्रामा पसंद हैं और वो अपना नाम जपवाने के लिए भाड़े के चियरलीडर्स अपने साथ ले जाता है जो उसका नाम जपते रहते हैं।

लेकिन दर्शकों की आवाज से ज्यादा सम्राट को अपनी आवाज से प्यार है। उसे सिर्फ बात करना पसंद है। जब वो बोले तो कोई नही रोक सकता असल में वो बोलता ही है और काम शायद ही करता है। हर महीने में एक बार, सम्राट रेडियो पर एक लाइव शो भी करता है।

कार्यक्रम का विषय उसकी पसंद का चुना हुआ होता है जो उसके विषयों के लिए किसी भी तरह प्रासंगिकता का नहीं होता  जो मुद्दे वाकई में ज़रुरी होते हैं उनपर उसे ध्यान केंद्रित करना पसंद नहीं है। विचार दर्शकों से जुड़ कर बात करने के लिए नहीं है ब्लकि उसकी अपनी ही ‘ ‘सुप्रीम’ आवाज को सुनाने के लिए है।

सम्राट को अपनी खुद की आवाज के लिए एक जुनून सवार है।  कि जो इस सम्राट की प्रशंसा नहीं करता उसे ‘राष्ट्र विरोधी’ घोषित कर दिया जाता है। और जो चिल्लाया, उसपर राजद्रोह के आरोपों के तहत मामला दर्ज कर दिया जाता है।

सब कुछ सम्राट के लिए अच्छा हो रहा है। वो अपने जीवन का समय अच्छे से बिता रहा है। भाषण, रेडियो शो, विदेश यात्रा, अधिक भाषण और फिर कुछ और। फिर अगली सुबह अगले बड़े भाषण के लिए एक उपयुक्त विषय के बारे में चिंतन करता है।

वो ज्यादा नाटक के लिए तरसता रहता है। वो खुद से किया हुआ वादा फिर याद करता है जो कई साल पहले अपमान का बदला लेने के लिए उसने खुद से किया था।

एक घोषणा की तरह, एक विचार बाहर उभर कर आता है। एक विचार जो उसकी दोनों तत्काल चिंताओं के लिए जवाब है। इतना ही नहीं, क्या उसका ‘मास्टरस्ट्रोक’ उसके जीवन की नीरसता को तोड़ेगा और वो बड़ा नाटक प्रदान करेगा जिसके लिए वो इतने वर्षो बुरी तरह से तरसता रहा है।

8 नवंबर को सम्राट एक ‘ऐतिहासिक’ भाषण देता है। अपने नाटकीय शैली के अंदाज़ में सभी मुद्राओं को तत्काल प्रभाव से अवैध घोषित कर देता है।

भक्त और चियरलीडर्स इसकी एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ की तरह जय जयकार करते हैं और दूसरे लोग इसे ‘काले धन के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक’ के रूप में मानते हैं। इन सब के दौरान एटीएम के बाहर लंबी कतारें होती हैं। कुछ इंतजार में मर भी गए हैं। यहां तक कि वे सभी इन मुश्किल दिनों के लिए सवाल भी नहीं कर सकते क्योंकि सम्राट का बदला गति में है।

जिन मंत्रियो को इस कदम का लाभ समझ नहीं आया वे इस पर खामोश ही रहते हैं। वे राष्ट्र विरोधी या भ्रष्ट जैसे नाम से पुकारे जाने का जोखिम नहीं लेना चाहते। और वो जिनके पास अघोषित नकदी है वो भव्य शादियों की मेजबानी करता है।

हफ़्तों में बदल रहे हैं और सम्राट का नोटबंदी से अच्छा होने का वादा पूरा होने का कोई संकेत नहीं मिल रहा है। यहाँ तक कि काला धन और नकली नोट अब भी अदृश्य हैं। लोग अपना सबर खो रहे हैं लेकिन फिर भी कोई कबूल नहीं करेगा कि उन्हे कुछ भी अच्छा नहीं दिख रहा है।

अतत: आखिरकार, दो युवा जो इस ढ़ोग को समझने के लिए शायद बहुत छोटे हैं। नोटबंदी के लिए खुल कर बोलते हैं कि नोटबंदी आम लोगों के लिए काफी असुविधा का कारण है और कहा कि सम्राट का वादा एक झूठ के पुलंदो से भरा हुआ है।

रोने के रूप में सम्राट की नापाक साजिश दूसरे लोगों को दिखाई देती हैं। उन्हे याद आता हैं कि यह वही है जिसने शहर में एक बार नग्न मार्च किया था। उन्हे महसूस होता है वो सम्राट फिर से नग्न खड़ा है, इस बार मानसिक और नैतिकता के रुप से।

सम्राट तेज कांपता है, वह जानता है कि वो सबके सामने उजागर हो गया है। लेकिन फिर उसका घमंड उसके सामने आ जाता है। और जनता की मुसीबतों के लिए वो अंधा बने रहना चुनता है। और इस प्रक्रिया को जारी रखता है।

30 दिन से भी अधिक दिन बीत चुके हैं। और कोई भी इस बात पर यकीन नहीं रखता कि ये स्थिति 20 दिनों के बाद बेहतर हो जाएगी।

इस बीच, रैलियों में सम्राट के दिन में चार बार कपड़े बदलने का सिलसिला जारी है। इस तरह के सार्वजनिक बैठकों में भाग लेने वाले लोगों की संख्या दिन प्रतिदिन लुप्त होती जा रहीं है।

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