प्रशांत भूषण को निशाना बनाने वाले तब कहाँ थे जब याक़ूब मेमन के लिए वो 2 बजे रात में सुप्रीम कोर्ट गए थे

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बहुत से मुस्लिम भाइयो को प्रशांत भूषण के शहाबुद्दीन मामले में तत्परता दिखाना अच्छा नही लगा। उन्होंने कुछ हिन्दू संगठनो से जुड़े आरोपियों का नाम लिया और कुछ मामले गिनाये और पूछा है कि इनके खिलाफ क्यों नही लड़े प्रशांत भूषण?

में मानता हूं के वह भी आरोपी है उनके खिलाफ भी लोगो को लड़ना चाहिये। लेकिन क्या सबका ठेका प्रशांत भूषण ने ले रखा है?

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आज न्याय के लिये न्यायलय में जितनी लड़ाई प्रशांत लड़ रहे है शायद ही कोई लड़ रहा है। उन्होंने यह आरोप लगाया है (कुछ ने खुल कर आरोप लगाया, कुछ ने इशारो इशारो में) कि प्रशांत भूषण ने शहाबुद्दीन को जमानत इसलिये रद कार्रवाई क्योंकि वह मुस्लिम है।

मुझे पता नही यह सारे लोगो ने तब यह केस क्यों नही गिनवाये जब प्रशांत भूषण ने रात के 2 बजे तक याकूब मेनन की फांसी रोकने के लिये सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर खड़े थे। तब तुम्हारे जो नेता है वो सिर्फ भाषण दे रहे थे। यह आरोप लगाने वाले ज्यादातर खुद को धर्म निरपेक्ष मानते है। मुझे समझ नही आता कि यह कैसी धर्म निरपेक्षता है जो खुद के धर्म छोड़ कर बाकि धर्मो पे ही लागू होती है?

तब वो लोग कहाँ थे जब प्रशांत किसी आलोचना की परवाह किये बगैर कश्मीर पर बायां दिया था? क्या शहाबुद्दीन पर प्रशांत पर हमला करने वाले  गए कि किस तरह कश्मीर में सेना के रोल पर पर उन्हें देशद्रोही गया था? या फिर इस मामले पर उनकी याददाश्त जवाब दे गयी है।

इस के अतिरिक्त और भी कई मिसालें हैं जो दर्शाती हैं कि प्रशांत नियत पर न पहले शक किया जा सकता था और न अब उनकी नियत पर किसी की शक की कोई गुंजाइश है।

वेसे प्रशांत को तुम्हारे इन आरोपो का कोई फर्क नही पड़ता। उन्हें जब लोगो ने देशद्रोही कहा तब भी कोई फर्क नही पड़ा तो आज क्या पड़ेगा?

नरपत देवासी

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