प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट उर्दू में नहीं है, क्या ये मुसलमानों से जुड़े मुद्दों को दूर करने का प्रयास तो नहीं?

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इस वर्ष पीएम मोदी ने फैसला किया था कि प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट को बहुभाषी बनाया जाएगा। जिससे कि बड़े वर्ग को इससे जोड़ा जा सके ताकि सरकार द्वारा किए गए कार्यो को लोग आसानी से समझ सकें। जबकि इससे पूर्व प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट केवल हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में ही थी।

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प्रधानमंत्री के इस विचार को अमल में लाने के लिए भारत की 6 अन्य भाषाओं में वेबसाइट को बनाया गया, जिसमें गुजराती, मराठी, मलयालम, बंगाली सहित अन्य भाषाएं रखी गई। इस योजना के प्रथम चरण की घोषणा खुद सुषमा स्वराज ने की।

अगर प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट का नवीन संस्करण आप देखेंगे तो पाएगें कि अब ये वेबसाइट कन्नड़, उडिया, तमिल, तेलुगू भाषा में भी उपलब्ध हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय हमेशा से ही अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े कई मुद्दों में सहभागिता दिखाता हैं।

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वर्तमान में केन्द्र सरकार आरएसएस समर्थित है जिसके कट्टरपंथी विचाराधारा से जुड़े होने की धारणा आम है। 2001 की जनगणना के अनुसार उर्दू भारत की छठीं सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। उर्दू बोलने वालो में अधिकाशंत मुसलमान आबादी के अनुपात में 5.01 प्रतिशत है, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, उड़िया, और पंजाबी की तुलना में।

अब प्रश्न ये उठता है कि क्या ये उर्दू को नज़रअंदाज करने का प्रयास है, इसलिए इसको अनदेखा किया गया है। क्या केन्द्र की सरकार ये चाहती है कि उर्दू बोलने वाले इस बात को ना समझ सके कि सरकार की क्या योजनाएं है, क्या प्रस्ताव है और उन लोगों के लिए सरकार की और से क्या स्कीम व लाभ व जानकारियां वहां मौजूद है। इन सभी जानकारियों को रोक लिया जाएं।

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अगर ये जानकारी उर्दू में आने में समय लगेगा तो देरी होने का ये तर्क समझ आ सकता है कि इस तरह का सोचना फिजूल है। लेकिन अगर ये किया जा रहा है तो फिर ये अन्याय है।

क्योंकि इस योजना को चरणबद्ध तरीके से अमल में लाया जा रहा हैं। आमतौर पर आंकड़ों को देखकर की प्राथमिकता दी जाती है। अगर अधिक उर्दू बोलने वालों के अनुपात में वेबसाइट पर जगह मिलती है तो फिर प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट उर्दू में होनी ही चाहिए। लोकतांत्रिक देश में नागरिकों के सर्वकल्याण की भावना से काम किया जाता है, इसी बात से उम्मीद की जा सकती है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट उर्दू में होनी चाहिए।

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संपादकीय नोटः इस जानकारी पर जनता के रिर्पोटर ने प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रतिक्रिया हेतू संपर्क का प्रयास किया लेकिन किसी प्रकार का कोई जवाब नहीं मिला। इस बारें में जैसे ही कोई जानकारी मिलती है हम उसे प्रकाशित करेंगे।

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