OROP पर भारत के पूर्व सैनिकों की बेइज़्ज़ती: नई गुलामी की 69 वीं सालगिरह मुबारक हो सभी देशवाशियों को

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अशोक कुमार लखेरा 

चौंकिए मत, ये सच ही तो है.. फ़र्क़ सिर्फ इतना है कि इससे पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे और आज हम अपने ही देश के राजनेताओं के गुलाम हैं ।

देश का सबसे दुखद दिन , सबसे दुखद घटना आज़ादी के पर्व दिवस पर देखने को मिली।

इस देश की सुरक्षा के लिये, हम सब चैन से सो सकें हर पल, हर मुश्किल से मुश्किल हालात में, परिस्थितियों में जो निर्भीक, अडिग खड़े रहते हैं।

जिन्होंने अपनी जवानी देश की सुरक्षा की खातिर झोंक दी आज उनमें से बहुत वृद्ध अवस्था में हैं, बहुत से उसकी और अग्रसर हैं, पिछले 2 महीने से अपने हक की मांग के लिये जंतर मंतर पर धरने पर बैठे हैं।

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शुक्रवार को जो व्यवहार उन सैनिकों के साथ किया गया वो मेरे हिसाब से भारत के इतिहास में काला दिन है, और ये सब जिसने या जिसकी सरकार ने किया
उससे घटिया आदमी कोई दूसरा हो ही नहीं सकता, क्योंकि नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव से पहले सिर्फ वोटों की खातिर इन सैनिकों से वादा किया था कि सरकार बनते ही OROP लागू कर दूंगा, इन पूर्व सैनिको ने जबरदस्ती नहीं कहलवाया था प्रधानमंत्री जी, शायद यही वजह है की आप की शान में आज कल फेकू और जुमलेबाज़ जैसे शब्दों का जोड़ा जाना लोगों केलिए आम बात हो गयी है

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इस अति निन्दनीय और घटिया से घटिया कार्रवाई पर कुछ ऐसा देखने को मिला जिसके बाद एक सैनिक का पोता और एक सैनिक का ही बेटा होनेके नाते मैं मानता हूँ और कहता हूँ की जिन 31% लोगों ने मोदी साहब को लोकसभा चुनाव में वोट दिया था और अपने आप को राष्ट्रवादी और राष्ट्रभक्त, देशभक्त कहते हैं
उनमे से ज़्यादातर राष्ट्रभक्ति और देशभक्ति के नाम पर अपने आप को कलंकित महसूस कर रहे होंगे।

सोशल मीडिया पर 24 घंटे राष्ट्रभक्ति और देशभक्ति का राग अलापने वाले ऐसे तुच्छ लोगों के मुंह से कल की इस घटना पर एक शब्द भी क्यों नहीं निकला क्योंकि ये मोदी सरकार ने किया है, मतलब इस देश में मोदी सरकार जो करेगी वो राष्ट्रभक्ति और बाकी सब….

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देश की हालत अगर खराब है या देश बर्बादी की और अग्रसर है तो वो सिर्फ फर्जी राष्ट्रवादियों और राष्ट्रभक्तों के कारण है, मैं ये अच्छी तरह जानता हूँ की येह कड़वा सत्य कुछ लोगों को बहुत बुरा लगेगा पर सत्य तो यही है।

A version of this blog first appeared on Ashok Kumar Lakhera’s FB page.

NOTE: Views expressed are the author’s own. Janta Ka Reporter does not endorse any of the views, facts, incidents mentioned in this piece.

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