शहाबुद्दीन मामले पर प्रशांत भूषण के नाम एक आम नागरिक का खुला पत्र

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प्रिय प्रशांत भूषण जी,

सादर नमस्कार, सबसे पहले तो आपको बहुत बहुत मुबारकबाद कि आपने शहाबुद्दीन की जमानत रद्द करवाने मे कामयाब हुये, देश आपकी वकालत की प्रतिभा से भलीभांति परिचित है। आप एक काबिल और जिम्मेदार वकील है इसमें कोई दो राय नही।

शहाबुद्दीन की जमानत खारिज करवाने के साथ साथ लोगों की उम्मीदे आप से बढ़ गई है, न्याय की आस लगाये बहुत से पीड़ित आप की तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं हालांकि ये मुमकिन नही है कि आप हर केस की पैरवी और हर खूंखार अपराधी की जमानत का विरोध करें फिर भी शहाबुद्दीन जैसे ही कुछ और खूंखार और चर्चित केस की पैरवी करने की उम्मीद हम आपसे तो कर ही सकते हैं, मुझे सारे नाम तो याद नही फिर भी कुछ का ज़िक्र मै कर देता हूँ।  

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1. बंसल परिवार आत्महत्या प्रकरण जिसमे एक पूरा परिवार खत्म हो गया जिसमे सूसाइट नोट मे CBI पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप है, और ऐक बड़ी पार्टी के नेता का भी नाम है।

2. समझौता एक्सप्रेस विस्फोट केस मे जमानत पर रिहा असीमानंद की भी जमानत रद्द करने की लड़ाई आप सुप्रीम कोर्ट मे लड़ेंगे ऐसी हमे उम्मीद है।

3. मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यांपम घोटाले जिसमे हजारो छात्र और अभिभावक पीड़ित है उसके आरोपी पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा की भी जमानत के खिलाफ आप सुप्रीम कोर्ट मे याचिका लगायेंगे ऐसी हम आशा करते हैं।

4. 2002 के गुजरात दंगों में उम्र क़ैद की सज़ा पा रहे दो खूँख्वार आरोपी माया कोडनानी और बाबू बजरंगी को भी दोबारा जेल भेजने केलिए आप सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, ऐसी हमें आशा है।

5. मुम्बई दंगों पर श्री कृष्णा जांच आयोग की रिपोर्ट 25 साल बाद में महाराष्ट्र असेंबली में पेश नहीं हो सकी, अच्छा होता कि आप उसे भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते।  चलें पहले नहीं दिया तो अब दे दीजिये, आखिर उन दंगों में सैंकड़ों लोगों की जान गयी थी।

कुल मिलाकर हम आपसे उम्मीद करते है कि जो तत्परता और जद्दोजहद आपने शहाबुद्दीन की जमानत याचिका खारिज करवाने मे दिखाई है वही तत्परता आप भविष्य मे हर राष्ट्रीय स्तर के बाहुबली और खूंखार अपराध और अपराधी का विरोध आप इस तरह करें ऐसी हमे उम्मीद है, फिर चाहे वो शहाबुद्दीन हो राजा भैया हो या असीमानंद।

 

धन्यावाद, जय हिंद, जय भारत

देश का ऐक जिम्मेदार नागरिक

इसलाहुद्दीन अंसारी

(Views expressed here are the author’s own. jantakareporter.com doesn’t necessarily subscribe to them)

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