मेहमानों को चाहिए कि वे भारत का मालिक बनने की अनधिकृत कोशिश न करें। यह उनके लिए बहुत महँगा पड़ेगा

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पत्रकार राज किशोर का व्यंग्य

बेपरवाह टाइम्स में प्रकाशित एक समाचार के अनुसार, दिवालिया पीठ के महामंडलेश्वर ने कहा कि मुसलमान भाई-बहन हमारे देश के सम्मानित अतिथि हैं और भारत की ‘अतिथि देवो भव’ की शानदार परंपरा का पालन करते हुए हम किसी भी कीमत पर उनकी रक्षा करेंगे। मुसलमान हमें जान से प्यारे हैं, इसलिए उन्हें भयमुक्त हो कर भारत में जीवन यापन करना चाहिए।

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अपनी बात को स्पष्ट करते हुए महामंडलेश्वर ने आगे कहा कि लेकिन मेहमान को मेहमान की तरह रहना होगा। उसे मेजबान के आंतरिक मामलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। इसलिए मेहमानों को चाहिए कि वे भारत का मालिक बनने की अनधिकृत कोशिश न करें। यह उनके लिए बहुत महँगा पड़ेगा। ‘हम अपने मेहमानों का आदर करते हैं, पर हमारे मामलों में दखल देने वालों पर प्रहार करना भी जानते हैं।’

बाबरी मस्जिद की याद दिलाते हुए कठमुल्लाचार्य ने उसके धराशायी होने पर अफसोस जताते हुए कहा कि अगर मुसलमानों ने उसे खुद ही ढाह दिया होता, तो हिंदुओं को यह जिम्मेदारी अपने हाथ में नहीं लेनी पड़ती। ‘अब भी समय है कि वे अपने बाकी धर्म स्थानों को हमारे हवाले कर दें – खास तौर से जो विदेशी पैसे से बनाए जा रहे हैं। हमारे पास भी विदेशी पैसे की कोई कमी नहीं है, पर उन्हें हम धार्मिक कामों में नहीं लगाते। उसका उपयोग हम अपने रहन-सहन का स्तर ऊँचा उठाने के लिए करते हैं,’ कठमुल्लाचार्य ने जोड़ा।

मेहमान को मेहमान की तरह रहना चाहिए, यह चेतावनी देते हुए दिवालया मठ के प्रमुख ने कहा कि हिंदुस्तान हिंदुओं की कर्मभूमि है तथा यहाँ कर्म करने का अधिकार सिर्फ हिंदुओं को है। अन्य समुदायों को अपनी मर्यादा में रहना होगा, नहीं तो वे देश छोड़ कर जाने के लिए स्वतंत्र हैं। इतिहास की याद दिलाते हुए महामंडलेश्वर ने कहा कि जब मुसलमान मध्य एशिया में दर-दर भटक रहे थे तब हमने उन्हें भारत में जगह दी, लेकिन हमारी उदारता को हमारी कमजोरी मान ली गई। अब हिंदू जाग उठा है और सभी प्रकार के आंतरिक शत्रुओं का सामना करने के लिए तैयार है।

अपने वक्तव्य का समापन करते हुए दिवालिया पीठ के प्रमुख ने कहा कि हम अशांति नहीं, समरसता चाहते हैं और किसी को डरने की जरूरत नहीं है। यह जरूर है कि हम अपने देश, अपनी माँ-बहनों और अपने पशुओं की रक्षा के लिए ईंट से ईंट बजा देंगे।

Raj Kishore is an award-winning veteran journalist with several decades of experience. Formerly with Navbharat Times and Ravivar, he’s currently editing Ravivar Digest. He’s written more than a dozen books. Views expressed here are the author’s own.

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