नरेंद्र मोदी का इंग्लैंड दौरा और मीडिया वालों का खोखलापन

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इरशाद अली

हमारे देश के मीडिया को लगने लगा है कि जो वो दिखाता और सुनाता है लोग सच में उसे सच मान लेते है। वो जिस तरफ देश को ले जाएगा देश उसी तरफ चला जाएगा। इसलिये देश को अब गड्डे में लेकर जाने की प्राथमिकता को लेकर देश का मीडिया मोदी जी के साथ ऐसे सफर पर निकल पड़ा है जहां पेट को रोटी से नहीं बल्कि भाषणों से भरा जाएगा।

अगर आप कल से न्यूज चैनल देख रहे तो अच्छी तरह से समझ जाएगें कि महान नरेंद्र मोदी जी का ब्रिटेन का दौरा दुनिया की एक महानतम घटना है इससे बड़ी ना कोई बात अब तक हुई है ना आगे होने वाली है। इसलिये सारे देश को भाड़ में झोकिए और महान मोदी जी के गुणगान को देश की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाकर दिखाइयें। क्योंकि इसी के पीछे चैनल की तरक्की और कामयाबी का राज छिपा है भले की देश तब गड्ढे में क्यों ना गिर जाए।

मीडिया के कैमरों की नज़र  देखिये कि कहां जाती है, मोदी जी ने क्या पहना है, वो क्या खा रहे है, वौ कैसे चल रहे है, मीडिया को शर्म नहीं आती कि इस बार ब्रिटेन में कितने व्यापक स्तर पर मोदी का विरोध हो रहा है उसकी वजह जाने, कट्टरता के मुद्दे पर देश की शर्म मोदी को विदेश में भी शर्मिन्दा कर रही है लेकिन मीडिया के कैमरे ऐसी बातें दिखाने से परहेज रखते है। वैसे भी हम सबको अब पता होना ही चाहिए कि मोदी जी ने किस तरह से देश में बढ़ती हुई कट्टरता को खत्म करने संजीदगी में दिखाई हैं।

अगर कोई यह कहे कि प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से सख्त ताकीद सभी चैनल्स को कर दी गयी है कि अब बढ़ते हुए विरोध और ऐसी खबरों को ना दिखाया जाए तो इस बात पी मुझे हैरानी नहीं होगी। जब देश में चारों और शान्ति ही शान्ति पसरी हुई है तो वो दिखाओ जिसमें तुम्हारा फायदा हो। हम क्या पहन रहे है, हम क्या खा रहे है, हम क्या कर रहे है। हमारी तस्वीरें खींचों, खूब खींचों। हम किसी को नज़रअंदाज नहीं करेगें। तुम्हे पदमश्री, पदम्भूषण चाहिए या नहीं। तुम्हे अपने चैनेलो केलिए करोडो रूपये के सरकारी विज्ञापन चाहिए कि नहीं?

फिर क्यों ऐसी वैसी खबरों को दिखाकर देश के विकास में बाधा बन रहे हो। और सबसे बड़ी बात ये जो मैंने अडानी अंबानी अपने अगल-बगल रखे है इनकी फंडिंग तुम्हे चाहिए या नहीं। चलिये काम पर लगिये और देश का विकास दिखाइये। तो आप अब देश का विकास न्यूज चैनल्स पर होते देखेगें, चारो तरफ खुशहाली की गीत मौसम में बिखरे हुए आपको मिलेगें क्योंकि अच्छे दिन आ गए है जब रोटी से नहीं भाषणों से पेट भरा जाता है।

और जब बात भाषण की हो रही हो तो एक नज़र इस पर भी कि मोदीजी ने वेम्ब्ले स्टेडियम में कहा क्या । कहा तो उन्होंने बहुत कुछ और इतना कि मशहूर बॉलीवुड अभिनेता ऋषि कपूर को यह ट्वीट करना पड़ा “मोदी जी अब बस कीजिये, बहुत बोर कर रहे हैं आप. ”

आईये आप को बताते हैं की श्री श्री मोदी जी ने वेम्ब्ली स्टेडियम के इस विशाल मंच से क्या कहा?

जब मोदी ने अपने चिर परिचित अंदाज़ में बांड वाली बात कही तो किसी भी ज्ञानी मीडियाकर्मी नई येह नहीं पुछा कि क्या एक प्रधानमंत्री को अंतरराष्ट्रीय मंच से इस तरह की बेतुकी बात करनी चाहिए? मीडिया वाले तो बस ताली बजाने में मग्न थे ।

हॉलीवुड फिल्म जेम्स बांड जैसे काल्पनिक ब्रिटिश पात्र का हवाला देते हुए मोदी ने कहा, ” बांड (जिसका मतलब बंधन भी होता है) मुझे जेम्स बांड की याद दिलाता है । लेकिन बांड मुझे ब्रूक बांड (चाय ब्रांड) की भी याद दिलाता है । जेम्स बांड हमारा मनोरंजन करता है तो ब्रूक बांड हमें एक नयी ऊर्जा देता है । अब हमें इस बॉंन्ड ( अर्थात ) को आगे ले जाने की ज़रुरत है । अब हमें रूपये के बांड पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ।”

शायद इसी ऐतिहासिक जुमले की वजह से बीजेपी की सांसद ने कल ट्विटर पर देशवासियों को गर्व महसूस करने केलिए कहा था । मिनाक्षी जी इन बेतुके बयानों से देश लज्जित ज़्यादा होता है गर्वान्वित काम ।

एक स्टेडियम में इवेंट मैनेजमेंट की मदद से भीड़ इकठ्ठा करके ऐसे बेतुके बयान देकर क्या मोदी जी ओलंपिक्स मेडल जीत रहे थे ? क्या मनमोहन सिंह और उनसे पहले के प्रधानमंत्रियों ने विदेशी धरती पर ऐसी चकाचौंध रैलियां ना करके ग़लती की थी? नहीं, उन्होंने जो किया वह महापुरुषों वाला आचरण था, माफ़ कीजियेगा मोदी जी जो कर रहे हैं, वह सिर्फ वह सिर्फ उनके राजनितिक और वैचारिक खोखलेपन को दर्शाता है । और भारतीय मीडिया का चौबीस घंटे मोदीगान उनके दिवालियेपन की निशानी है ।

5 COMMENTS

  1. क्या आज के दौर में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्ब कहना कितना कु सही है , क्या यही मीडिया अब लोकतंत्र की जड़ें नहीं खोद रहा अपनी इस तरह की रिपोर्टिंग से। क्या सभी कुछ पैसा ही हो गया है इस स्वम्भू लोकतंत्र के रखवालों के लिए। ….?

    • pls add Swachh Bharat Cess 0.5% hike also. batao ab modi ji service tax hike ke baad ye swachh bharat cess lagakr kiska pichhwada swachh karenge?

  2. मोदी जी भूलजाते ह सिर्फ़ मोदी नहीं भारत के प्रधानमंत्री भी
    ह उनकी बेहूदा हरकतें देखकर दुःख होता ह वो क्या साबित
    करना चाहतें ह इस हरकत का दूरगामी परिणाम हमारे देस की बेशर्म मीडिया को नहीं ह

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