भारत के जांबाज़ तंजील अहमद की शहादत और देश के नेताओं की बेरुखी, कुछ तो शर्म करो

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विश्वनाथ चतुर्वेदी

एन आई ए के जांबाज बहादुर अधिकारी तनज़ील अहमद की हत्या को  48 घंटे बीत जाने के बाद भी हत्यारों को न खोज पाने वाली देश की सारी जाँच एजेंसियों को डूब मरना चाहिये।

देश की ख़ातिर जीने मरने का जज्बा लिए आतंकियों की माँद में घुस कर देश की जनता को आराम से सोने की गारन्टी देने वाला जांबाज शहीद तनज़ील की पत्नी जिंदगी मौत से जूझ रही है।

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आख़िर दिल्ली में ही सुपर्दे ख़ाक किये गए,शहीद तनज़ील के बच्चों को सरकार की तरफ से हौसला आफजाई के लिए कोई नही गया. क्या राष्ट्रभक्तो का देश के लिए जान देने वालो में भी हिन्दू-मुसलमान की तलाश थी? या फिर उनकी इस मौत पर सहानुभूति प्रकट करने पर हमारे नेताओं को कोई राजनितिक फायदा नज़र नहीं आया.

मन की बात से लेकर हर छोटी बड़ी बात पर उवाच करने वाले भारत के सबसे बड़े देशभक्त और हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी अब भी वक्त है, शहीद तनज़ील देश के नायक है, उनके बच्चों को देश की तरफ से भरोसा दीजिये, इस दुःख की घडी में देश का प्रत्येक नागरिक शहीद तनज़ील को सेल्यूट करता है,और देश पुरे परिवार के साथ है।

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भविष्य में देश की सर्वोच्च जाँच एजेंसी एन आई ए में देश की सेवा कर रहे,जांबाजो का हौसला बढ़ाने की जरुरत है जिससे देश महफूज़ रह सके।प्रधानमंत्री होने के नाते यह जिम्मेदारी और आश्वासन आपको ही देना चाहिए!

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जय हिन्द,
जय मादरे वतन

विश्वनाथ चतुर्वेदी भरष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले कार्यकर्ता के तौर पर जाने जाते हैं, यहाँ व्यक्त किये गए विचार लेखक के निजी हैं  

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