कमाल के कलाम: डॉ साहब बड़े आदमी की परिभाषा से भी कहीं लाख गुना बड़े साबित हुए

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प्रीति महावर, लुधियाना

दिल की धड़कन रुकना बंद कर दे तो इंसान दुनिया छोड़ कर चला जाता है, लेकिन
उसकी उपलब्धियां करोड़ों धडकते दिलों को सही रास्ता दिखाने के लिए काफी
होती हैं। स्वतंत्र भारत के 11वे राष्ट्रपति स्वर्गीय एपीजे अब्दुल कलाम
भी कुछ ऐसे ही महान हस्तियों में से एक थे। पापा मुझे बचपन में कहा करते
थे की बेटे आपको बड़ा आदमी बन कर अपने देश का नाम रोशन करना है, तब मेरा उनसे
एक ही सवाल होता की पापाजी बड़ा आदमी किसको कहते हैं ? उनका जवाब होता था
डॉ एपीजे अब्दुल कलाम।

मेरे जैसे अनगिनत और भी बच्चे हैं जिनके पेरेंट्स
उन्हें डॉ कलाम जैसा बनाने की प्रेरणा देते हैं। डॉ साहब को मैंने जितना
भी सुनने, पढने और जानने की कोशिश की वो बड़े आदमी की परिभाषा से भी कहीं
लाख गुना बड़े साबित हुए। अपनी बातों को निडरता और सरलता से रखने का गुण
कलाम ने मेरी कलम में भरा है। ज़रूरी नहीं की खून के रिश्ते ही आपके अपने
होते हैं। कुछ लोग पराये होते हुए भी अपनी अद्भुत मार्मिक, तार्किक और
अदम्य साहस के कारण आपकी ज़िन्दगी का एक अहम् हिस्सा बन जाते हैं। डॉ साहब
भी मेरी ज़िन्दगी का एक अनमोल हिस्सा हैं। मेरे बाबा आज मेरे पास नहीं हैं
लेकिन मैंने हमेशा अपने बाबा को डॉ साहब में देखा है। उनकी करुण आँखें और
मधुर मुस्कान को देख कर हमेशा ऐसा लगता है जैसे मेरे बाबा मुझे अपना ढेर
सारा आशीष दे रहे हों।

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मुझे आज भी याद है वो दिन जब मैंने अपनी दोस्त को यह कहते हुए सुना की
हमारे दीक्षांत समारोह में डॉ साहब आ रहे हैं। मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं
रहा लेकिन कुछ ही दिनों बाद उनका आना कैंसल हो गया। मैंने सोचा ज़िन्दगी
में कभी न कभी आपसे मिलना ज़रूर होगा। अफ़सोस वो दिन अब कभी नहीं आएगा। आप
कहा करते थे की सपने वो नहीं जो आप सोते हुए देखते हो, सपने वो होते है
जो आपको सोने न दें। और यकीन मानिए डॉ साहब आपकी अदनी सी बच्ची भी खुली
आँखों से अपनी कलम से कलाम की तरह ही कमाल करने के सपने देखती है। आप
हमेशा मेरे और मेरे जैसे करोड़ों लोगों के ज़हन में हमेशा जिंदा रहोगे कमाल
कलाम।

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गुरदासपुर में हुए आतंकी हमले में मारे गए देश के जवान और डॉ साहब के
निधन ने पुरे देश को अन्दर तक झकझोर दिया है। इस बात की तस्सली ज़रूर है
की हमने उन आतंकियों पर जीत हासिल की लेकिन उस जीत का जश्न मनाने के लिए
मेरे देश के सच्चे सपूत ही मुझसे दूर चले गए। जवानो का बलिदान और डॉ साहब
की जिंदादिली को मै शत-शत नमन करती हूँ।

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NOTE: Views expressed are the author’s own. Janta Ka Reporter does not endorse any of the views, facts, incidents mentioned in this piece.

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