सड़क की खराब डिजाइन और वाहन चालकों की अनुशासनहीनता से दिल्ली में लगते हैं ट्रैफिक जाम

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रजनीश सिंह

दिल्ली में पंजीकृत वाहनों की संख्या 90 लाख है, जबकि सड़कों की कुल लंबाई मात्र 33 हजार किलोमीटर है। ऐसे में यातायात पुलिस को यातायात प्रबंधन में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। पुलिस का कहना है कि राजधानी में यातायात समस्या को बड़े इलाज की जरूरत है।

दिल्ली यातायात पुलिस के संयुक्त आयुक्त संदीप गोयल ने कहा कि सड़क की खराब डिजाइन और वाहन चालकों की अनुशासनहीनता दिल्ली में यातायात जाम का बड़ा कारण है।

गोयल ने आईएएनएस से कहा, “सड़क की इंजीनियरिंग डिजाइन में दोष है। कई स्थानों पर छह लेन अचानक चार लेन की हो जाती है, इससे सड़क संकरी हो जाती है। लोग लेन प्रणाली का भी पालन नहीं करते, जिससे समस्या और बढ़ जाती है।”

दिल्ली में करीब 90 लाख पंजीकृत वाहन हैं। इसके अलावा हर रोज पड़ोसी राज्यों के हजारों वाहन दिल्ली से होकर गुजरते हैं।

दिल्ली यातायात पुलिस में सिर्फ 5,000 कर्मी हैं, यानी, हर पुलिस पर 2,100 वाहनों का दबाव है।

गोयल ने कहा कि दिल्ली में हर रोज 1,400 नए वाहनों का पंजीकरण भी हो रहा है।

शहर में 2014 में 8,623 सड़क हादसे हुए, जबकि 2013 में 7,566 हादसे हुए थे। सड़क हादसों में मारे गए लोगों की संख्या 2014 में 1,629 थी, जो एक साल पहले 1,778 थी।

गोयल ने कहा कि वाहनों की गलत पार्किंग और सड़क पर वाहनों के खराब होने के कारण भी सड़कों पर जाम लग जाता है।

उन्होंने डीटीसी बस का उदाहरण देते हुए कहा, “यदि डीटीसी बस खराब हो जाती है, तो इससे यातायात पूरी तरह चरमरा जाता है, क्योंकि इसे आसानी से धकेल कर किनारे नहीं किया जा सकता, क्योंकि वैक्यूम प्रणाली के कारण इसका पहिया लॉक हो जाता है।”

उन्होंने कहा कि मैकेनिक को घटनास्थल पर पहुंचने में कम से कम 20 मिनट लग जाते हैं।

गोयल ने कहा कि लोग यदि यातायात नियमों का पालन करें, तो स्थिति नियंत्रण में रहेगी।

उन्होंने अनुशासनहीनता का भी जिक्र किया और कहा कि तकरीबन सभी दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर ऑटो रिक्शे, साइकिल रिक्शे और ग्रामीण टैक्सी सेवाएं सड़कों को अवरुद्ध करते हैं।

उन्होंने हालांकि कहा कि सड़कों की डिजाइन बेहतर करने के लिए काम चल रहा है तथा अन्य कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन यह लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया है।

उन्होंने कहा कि शहर में रात में प्रवेश करने वाली ट्रक काफी तेज गति से चलती है। उन्होंने कहा, “गत तीन-चार महीनों से हम उन्हें अनुशासित करने की कोशिश करने के लिए रात में अधिक कर्मियों को तैनात कर रहे हैं।”

यातायात पुलिस इस साल लगभग 40 हजार ट्रकों के चालान काट चुकी है, फिर भी दिल्ली की यातायात समस्या सुलझने का नाम नहीं ले रही है।

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