दुकानदार को ब्रा का साइज़ बताने से नहीं झिझकोगी तो भी तुम अच्छी ही लड़की रहोगी

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जब हम लड़कियां बड़ी हो रही होती हैं तो हमारे मां-बाप, दादा-दादी, ताई-ताऊ, अड़ोसी-पड़ोसी…उसकी चाची, इसकी बुआ…अलाना,फलाना सब हमें कुछ ना कुछ सिखा रहे होते हैं।

नाप कर हंसना सिखाते हैं, क्या, कितना और कितनी ज़ोर से बोलना है ये सिखाते हैं, सिर झुकाकर चलना सिखाते हैं, खित-खित करके ना हंसना सिखाते हैं, ससुराल जाकर उनकी नाक कटने से बचाने वाली सारी बातें सिखाते हैं, सिखाते हैं कि बहस करना क्यों गलत है, बताते हैं कि सवाल पूछना क्यों सही नहीं हैं? सबकुछ सिखाते हैं, बस एक ज़रूरी चीज़ भूल जाते हैं…बेबाकी।

So with due respect, I beg to say that कि

Dear,
मां-बाप, दादा-दादी, ताई-ताऊ, अड़ोसी-पड़ोसी…उसकी चाची, इसकी बुआ…अलाना, फलाना, थोड़ी बेबाकी भी सिखा दी होती हमें, तो कुछ और सिखाना ना पड़ता।

थोड़ी बेबाकी सिखा दी होती अपने फ़ैसले लेने के लिए हम दूसरों का मुंह नहीं देखते, अपनी खुशियां दूसरों में नहीं ढ़ूंढ रहे होते, ग़लतियां करने से डरते नहीं हम, इसलिए रिस्क ले रहे होते।

And Dear Girls,
ये अच्छी लड़की बनने के झांसे में मत आओ। अपना करियर, अपना पति, अपनी लाइफ़स्टाइल, अपने कपड़े, अपनी ज़िंदगी खुद चुनोगी तो भी तुम अच्छी ही लड़की रहोगी।

रात को देर तक जागोगी, सुबह देर तक सोओगी, कानों में हेडफोन लगाकर पागलों की तरह डांस करोगी तो भी तुम अच्छी ही लड़की रहोगी। अकेले सफर करने से नहीं डरोगी, मार्केट से सामान लाने के लिए भाई या पापा के भरोसे नहीं बैठी रहोगी, अपने परिचय में Wife of नहीं लिखोगी तो भी तुम अच्छी ही लड़की रहोगी।

दुकानदार को ब्रा का साइज़ बताने से नहीं झिझकोगी, सेनेटरी नैपकिन खरीदने से नहीं शरमाओगी, बस के सफ़र में बाथरूम ब्रेक लेने से नहीं घबराओगी तो भी तुम अच्छी ही लड़की रहोगी। And believe me तब शायद आज से ज़्यादा खुश भी रहोगी।

So enjoy being a woman and be ‘बेबाक’

(Kanchan Pant is the author of book Bebaak. Views expressed here are her own and Janta Ka Reporter doesn’t endorse them)

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