‘खामोश रहना आसान है, लड़ने के लिए साहस चाहिए लेकिन हम कायर है’

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Richa Varshney

क्या हम वास्तविकता में मुर्ख हैं या मुर्ख होने का ढोंग कर रहे है? गलत होते हुए आँखे मूंदना और कहना की ये सब तो चलता है
क्यों चलता है और दूसरे देशो में क्यों नही चल रहा है?

हमारे देश की बेटी बहन की इज्जत लुटती है हम चुप रहते हैं किसी की जान चली जाती है और हम खामोश रहते हों क्यों? क्यूंकि खामोश रहना आसान है लड़ने के लिए साहस चाहिए और हम कायर है| अगर यही कायरता हमारे पूर्वजो ने दिखायी होती तो हम आज भी गुलाम होते|

अरे हाँ हम तो आज भी गुलाम हैं पहले अंग्रेज़ो के और आज भ्रष्टाचार और बुराई के, कायरता के ! तभी तो देश में आये दिन दामिनी और मीनाक्षी अपने प्राणो की आहुति देते है और हम मोमबत्ती जला कर खुद को महान समझ लेते है कुछ लोग आवाज़ उठाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें लाठियों से मारा जाता है|

सभी जानते हैं कि अगर सजा अपराध से बहुत अधिक हो अपराध स्वयं कम हो जाता है पर हमारे देश में कितना भी बड़ा अपराध क्यों न हो, दोषी को कुछ सालो बाद छोड़ दिया जाता है तो लोगो में कानून का डर होगा ही क्यों ? क्यों कोई इतनी भयावह सजा नही दी जाती की लोग उसका उदहारण याद करके भी काँप जाये और उस अपराध को करने से पहले सौ बार सोचे? पर नही, एक व्यक्ति का प्राण चला जाता है और दूसरा कुछ साल कि सज़ा काट कर आराम कि ज़िंदगी जीता है|

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और हम सारा इल्ज़ाम सरकार के माथे मढ़कर आराम से जीते हैं

हमारे देश का किसान भूख के कारण आत्महत्या करता है और हज़ारो लोग गर्मी,सर्दी और बाढ़के कारण अपनी जान गवा रहे हैं, हमारे देश की सरकार दूसरे देशो को उपहार और सहायता के रूप में हमारे ऊपर खर्च होने वाली राशि बिना हमसे पूछे बाँट देती है| सरकार अपने ऊपर करोड़ो रुपए खर्च कर देती है और हमे फ़िक्र भी नही कि वो हमरा मेहनत से इक्कठा किया गया आयकर ऐसे कैसे ख़र्च कर रहे हैं|

हम हैं जो पैसे कमा कर देते हैं एक अच्छी ज़िन्दी जीने के लिए और हमारी जिंदगी दिन रात बद से बदतर हो गयी है और वो राजाओ वाली जिंदगी किस हक़ से ज़ी रहे हैं? सरकार क्या है? एक संस्था जो हमारे द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा हमारे ही दिए गए आयकर,विक्रीकर की राशि से हमारे हितो में कार्ये करे| जैसे स्कूल अस्पताल,सड़के,सुरक्षा,स्वछ पानी और अन्य प्रकार की सुविधा!

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और अगर कोई सरकार ऐसा करती है तो वह कोई अहसान नही कर रही है अगर कोई इससे मुफ्तखोरी खोरी कहता है तो वो बहुत ही बड़ा मुर्ख है और अगर कोई सरकार ऐसा नही करती तो हमे पूरा हक़ है उससे पूछने का कि क्यों नही| बल्कि मांग करनी चाहिए
कि वो अपने काम को समय में करे अथवा त्याग पत्र दे| इस कर में सभी सरकारी कार्य के अलावा उनके ऊपर किये गए खर्चे भी हमारी आयकर से दिए जाते हैं जैसे उनका रहना खाना उनका परिवहन और उनकी सुरक्षा भी

आज दिल्ली के मुख्य मंत्री हमे सारी सुविधा प्राप्त करवाने की कोशिश कर रहे है जब कि उनकी सरकार गठन किये कुछ महीनो ही हुए हैं उसके बावजूद उन्होंने फ्री 1000 मोहल्ला क्लीनिक बनवा रहे है|

शिक्षा पर उन्होंने सर्वाधिक ख़र्च करने की घोषणा की है और भी बहुत सारी योज़नाये शुरू कर रहे हैं जन हित के लिए, इन् सभी अच्छे प्रयासों के वाबजूद उन् पर तरह तरह के इलज़ाम लगा कर उनके कार्यो को रोकने कि भरसक कोशिश हो रही है और इसका कारण सिर्फ इतना है कि अगर उन्होंने अपने किए सभी वादे पूरे कर लिए तो दिल्ली सभी राज्यों में सवेश्रेठ हो जायेगा और बाकी राज्यों की कमिया उजागर हो जाएगी|

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इसलिए बिके हुए समाचार चैनल उनके बारे में अफवाहे फैलाकर उनको गलत साबित करना चाहते हैं| वरना अन्य राज्यों की जनता उनसे सवाल करने लगेगी जो पैसा वो अपने ऐशो आराम और घोटालो में खर्च करते है उन्हें फिर ईमानदारी पूर्वक जनता में खर्च करना पड़ेगा|
अभी भी वक़्त है जागिये और जानिये की आपका पैसा कहाँ और कैसे खर्च जा रहा है और अगर कोई सुविधा नही है तो क्यों नही..
अगर किसी भी नेता ने कोई भी वादा किया है तो आपको अधिकार है पूछने का की वह क्यों पूरा नही हुआ या उस पर कितना कार्ये हो चुका है
अगर हमे सारे घोटालो के पैसे वापिस मिल जाए तो ये देश फिर से सोने की चिड़िया बन सकता है ..ऐसा नही है की भारत गरीब है बल्कि इसको भ्रष्टचार और लूटपात के कीड़े ने खाया है हमारी नींदों ने और कायरता ने ज़हर फैलाया है इस पावन भारत में ..

NOTE: Views expressed are the author’s own. Janta Ka Reporter does not endorse any of the views, facts, incidents mentioned in this piece.

4 COMMENTS

  1. कोई किसी को क्या समझाये कि भारतीय संविधान धूर्तों के लिए नही बना था किन्तु धूर्त इसपर काबिज हो गए है । इस संविधान मे दी गयी व्यवस्था के अनुसार निर्वाचन के बाद जनता के पास कोई भी ऐसे अधिकार नही रह जाते है जिससे जनप्रतिनिधियों से हिसाब मांगा जा सके । या तो संविधान के बाहर गिड़गिड़ा लो या बगावत कर लो । बगावत करने पर देशद्रोह का तमगा ये धूर्त टिका देंगे । बचा गिड़गिड़ाना , उसका किसी पर फर्क नही पड़ता है ।

    अगर किसी मे हिम्मत हो तो इन धूरतों की खिलाफत करके दिखाये । सुना है कि आजकल महारथियों के प्यारे प्यारे छोटे छोटे बच्चे भी ठोकने मे माहिर हो गये है । माल मे जाते है तो सुरक्षा कर्मी पीट देते है । बाहर रहते है तो टोल वाले को ठोंककर देते है ।

    इन उग्र विचार वालों को राय है कि वोट दो और भूल जाओ , अन्यथा धूर्त बन जाओ !!

  2. RTI act के तहत वाराणसी के सांसद से जनहित में माँगी गयी जानकारी रेलवे बोर्ड से लंबित

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