फ़र्ज़ी वीडियो, बेशर्म अपराधी टी वी चैनल, लकवा मारे पिता और परिवार के जूठन साफ़ कर रही माँ के बेटों की सरेआम बदनामी

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शीतल सिंह 

रोहित वेमुला की माँ घर में कपड़े सिलती रही, एक परिवार के जूठन साफ़ करती रही और एक अनमेल ब्याह से पैदा बच्चों की परवरिश में होम हो गई ।

रोहित ने माँ को उसके अवसाद समेत बचपन और तरुणाई भर जिया और वजह तलाशने की कोशिश की , लेफ़्ट हुआ , अांब्डकराइट हुआ, पढ़ता रहा लड़ता रहा !

युवावस्था में उसका उस सच के षड्यंत्रों से सामना हुआ जिनका आकार अजगरों के पितामह जैसा है , वह लड़ा पर बच न सका , उन्होंने उसकी जीवन नाल (फ़ेलोशिप) काट दी , वह तड़पा और टूट गया !

पर ….उसके दुख ने हवा में रास्ता बना लिया था । भाषा छेत्र देश सब फलांग गया उसका दर्द । सड़कें आवाज़ देने लगीं । सत्ता घबरा उठी !

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सत्ता ने एक गरीब की चीख़ दबाने के लिये दूसरे गरीब की चीख़ निकलवाई ।

बिहार के एक गाँव में आंगनबाड़ी और लकवा मारे पति के परिवार के एक बच्चे को हथियार बनाया । फ़र्ज़ी वीडियो, बेशर्म अपराधी टी वी चैनलों और पुलिस के गठजोड़ ने ऐसी नौटंकी सृजित की कि पूरा देश “भौचक”!

दो सौ रुपये की दाल न ख़रीद पा रहे लोग, बेकारी से झुलसे नौजवान, समाजी अन्याय से जूझते औरत मर्द सब ऐसे”देशद्रोह” से देश बचाने में फँस चुके थे जो कभी हुआ ही न था ।

प्रायोजित देशद्रोह ने देश की सत्ता के हर पाये को नंगा कर दिया । लोगों ने महाभारत में द्रौपदी का चीरहरण सुना था पर कन्हैया को सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट मजिसटीरियल कोर्ट पुलिस आई बी रा और महान मीडिया के हेडक्वार्टर में सबकी नंगी आँखों के सामने बेगुनाह होते हुए “देशद्रोह ” के आरोप में सज़ा पाते देखा ।

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प्रायोजित भीड़ द्वारा उन्माद बढ़ाने के लिये “पीट पीट कर मार दिये जाने ” का प्रहसन करते देखा ।

देखा पर समझा नहीं !

वेमुला की चीख़ अब भी हवाओं में है । वह उच्च शिक्षा के हर संस्थान में तैर रही है गूँज रही है वह चुप नहीं हो सकती । कन्हैया को पीट कर मार भी डालते तब भी नहीं ! कभी भी नहीं !

मोहतरमा ईरानी जी तो आपने खुद अपनी सहेली शिल्पी तिवारी के ज़रिये नकली वीडियो बनवाये , यू ट्यूब पर डलवाये और जी न्यूज़, चौरसिया न्यूज़ और अरनब न्यूज़ से फैलवाये और खुद संसद में “बच्चों ” की हमदर्दी का स्वाँग करने खड़ी हो गईं ?

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आप अव्वल दर्जे की अदाकारी कर सकती हैं पर अवाम के साथ इस मककारी की सज़ा …….मैं अवाम पर ही छोड़ता हूँ ………!

तो मेहरबान पर्दा उठा नहीं है पर्दा फट गया है और सच्चाई आसमान में जाकर दरज हो गई है , टी वी चैनलों के शोर से परे ………..
अब बाल आपकी कोर्ट में है!

Sheetal Singh is a journalist and views expressed here are the author’s own. jantakareporter.com doesn’t subscribe to them.

 

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