सियासत का अखाड़ा बनती अयोध्या

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कुंवर अशोक सिंह राजपूत

6 दिसंबर 1992 की 23वीं वर्षगांठ बिना किसी अप्रिय घटना के पूरी तरह से शांति से गुजर गई। सशस्त्र बलों की निगरानी में रही अयोध्या में दिनभर सब ठीक रहने और शांति से गुजर जाने पर पुलिस और प्रसाशन को चैन की सांस मिली वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने भी राहत होना अनुभव किया।

हालांकि इस अवसर पर दोनों पक्षों के धार्मिक नेताओं और भाषणवीरों ने अपने-अपने मत-धर्म के अनुसार राममंदिर और बाबरी मस्जिद निर्माण की प्रतिबद्धताएं भी जताईं।

भाजपा के रवैये से खासे नाराज संघ और भाजपा के कुछ नेताओं ने तल्ख होते हुए कहा है भाजपा ने हिंदुओं के साथ छल किया है। राम मंदिर की तरह हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर भी यही धोखा जारी है। अब वह मानते हैं कि कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाती भाजपा खुद बेहद ‘छद्म राष्ट्रवादी’ तरीके से हिंदू तुष्टिकरण की राजनीति के बल पर आगे बढ़ी है।

अयोध्या में बाबरी मस्जिद के अस्तित्व सिद्ध करने की अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ रहे बुजुर्ग वादी हाशिम अंसारी जो संवाद-बातचीत के सदैव से पक्षधर थे, अबकी पलटी मारते हुए कहते हैं कि उन्हें अल्लाह पर भरोसा है कि उनके जीवन काल में अयोध्या में बाबरी मस्जिद स्थापित होगी।

उधर इसी तल्ख अंदाज में संत और उन्नाव के चर्चित भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने साफ कर कहा है कि अयोध्या में श्रीराम का मंदिर था, वह आज भी मंदिर है और भविष्य में मंदिर भव्य बनेगा और अयोध्या में कोई बाबरी मस्जिद नहीं थी।

तीखे बयान के सहारे माहौल को गर्माने में माहिर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री आजम खां ने भाजपा को शह देते हुए कहा है कि भाजपा को सत्ता में टिके रहने के लिए संघ और विहिप को राम मंदिर निर्माण की बात दुहराते रहनी होगी।

विहिप के भरकस प्रयासों के बाद अयोध्या-कारसेवकपुरम में हुयी हल्की जुटान में घोषित शौर्य दिवस के अवसर पर आयोजित हिंदू स्वाभिमान सम्मेलन में संत-धर्माचार्य ने 6 दिसंबर के दिन को हिन्दू समाज को गौरवान्वित करने वाला करार देते हुए राममंदिर का भव्य निर्माण के लिए संतों और धर्माचार्यो के जल्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की बात कही। संतों ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण हो कर रहेगा।

संतों ने कहा कि 6 दिसंबर, 1992 को श्रीराम जन्मभूमि पर खड़े कलंक को समाप्त कर हिंदू समाज ने भगवान राम लला के भव्य मंदिर निर्माण की आधारशिला रख कर विजय उत्सव मनाया था। विहिप के कार्यक्रम में अयोध्या फैजाबाद के स्थानीय भाजपा सांसद लल्लू सिंह संतों के साथ उपस्थित रहे।

कारसेवकपुरम में आयोजित हिंदू स्वाभिमान सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास ने कहा मंदिर तो वहां स्थापित हो गया है अब भव्यता देनी बाकी है जो शीघ्र प्रारंभ होगा, इसकी हिंदू समाज समय की प्रतीक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के थिर होते ही श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की समस्या को दूर करने के लिए संतों का प्रतिनिधिमंडल मिलेगा।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विहिप केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज ने कहा कि विहिप संरक्षक अशोक सिंहल ने अपने जीवन में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को अपने जीवन में समाहित किया, उसी में अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण भी सम्मिलित है, विहिप के शरद शर्मा ने बताया कार्यक्रम में प्रमुख वक्ताओं ने स्मरण दिलाते हुए कहा है कि अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए हिंदू समाज सदैव ही संघर्ष करता रहा है। आगे उज्जैन सिंहस्थ कुंभ में संत एकत्र हो रहे हैं, तब मंदिर पर निर्णय होगा।

विहिप के अयोध्या कार्यक्रम में विभिन्न संत मंतों और महामंडलेश्वरों में भगवान दास, प्रेम शंकर दास, सुरेश दास, पूर्व सांसद डा.राम विलास दास वेदान्ती, कन्हैया दास, सुशील दास, राम शरण दास, चिन्मय दास, राजू दास, रामकृष्ण दास, अवध बिहारी दास, लड्डू दास, पवन दास शास्त्री, बृज मोहन दास, जग मोहन दास, महंत श्याम सुन्दर दास प्रमुखता से उपस्थित रहे।

इस अवसर पर विहिप के वक्ता राजेंद्र सिंह ने कहा कि हम सोमनाथ की तर्ज पर केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे।

केंद्र में ‘सेक्युलर’ का मेडल पाने की लालसा में जुटी भाजपा ने विहिप के आयोजन से दूरी बनाए रखी। उत्तर प्रदेश से आधा दर्जन केंद्रीय मंत्री अयोध्या और रामजी से दूरी बनाये रहे। इतना ही नहीं, वर्ष 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के राजनैतिक नजरिये से दलित वोट पाने के लालसा क्रम में राजनीति वास्ते डॉ. भीमराव अंबेडकर को उनके 60वें परिनिर्वाण दिवस पर अभियान के तहत राज्य-व्यापी कार्यक्रम आयोजित कर संविधान को याद करके श्रद्धा-सुमन अर्पित किए गए।

राजनैतिक स्ट्रोक लगाने की मंशा से बसपा प्रमुख मायावती ने भी 6 दिसंबर के दिन अयोध्या में बाबरी मस्जिद के अस्तित्व को एकाएक स्वीकारने के बाद सपा और कांग्रेस के लिए आने वाले समय के लिए खासी कठिनाई बढ़ा दी है।

राजनैतिक धमाका और 17 प्रतिशत मुस्लिम वोटों की गोलबंदी के लिए बसपा प्रमुख मायावती ने देश और उत्तर प्रदेश के दलित और मुस्लिम मतदाताओं की एकजुटता के लिए बयान देते हुए इतना तक कह डाला कि बसपा अयोध्या में बाबरी मस्जिद के अस्तित्व को ही मानती है और 6 दिसंबर 1992 को सम्प्रदायिक ताकतों द्वारा ढहाया गया विवादित स्थल उसकी नजर में बाबरी मस्जिद है।

मायावती का बाबरी मस्जिद के अस्तित्व को राजनैतिक नजरिये से मान्यता देना संघ प्रमुख मोहन भागवत के दो दिन पहले के कथन से जोड़ कर देखा जा रहा है जिसमें भागवत ने कहा था कि उनके जीवन काल में सोमनाथ मंदिर के अनुरूप अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होगा।

इस अवसर पर अपने कैडर से संवाद में बसपा प्रमुख मायावती ने देश और उत्तर प्रदेश के लोगों को डॉ. अंबेडकर के बताए हुए रास्ते पर चलकर सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करने के लिए तन, मन, धन से बीएसपी मूवमेंट को सहयोग जारी रखने का संकल्प लेने हेतु आभार प्रकट कर कहा कि डॉ. अंबेडकर व उनके अनुयाइयों के प्रति केंद्र की वर्तमान एनडीए सरकार का रवैया भी, कांग्रेस पार्टी की पिछली सरकारों की तरह ही, दिखावटी व छलावा करार देते हुए कहा कि भाजपा सरकार द्वारा भी इनके लिए कोई ठोस काम नहीं किया गया है, बल्कि केवल कोरी बयानबाजी ही की जाती रही है।

जनता में भी दशकों पुराने इस विषय पर भाजपा के विरुद्ध नाराजगी खुले से दिख रही है, इलाहाबाद के वकील श्रीनिवाश शकर ने तल्ख हो कहा है कि जिस तरह से मुस्लिम तुष्टिकरण ने मुसलमानों की हैसियत कमजोर की तथा वह पिछड़ते गए, अब वही हाल 92 से जय श्रीराम बोलते भाजपा भक्त हिंदुओं का हो रहा है, जिसमें अधिकांश लोग आज हर तरह से हाशिये पर जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा ही नहीं राजनीति में रहे बड़े हिंदू ब्रांड आज सिर्फ झुनझुने बन चुके हैं। कल को गोभक्त और हर हर मोदी करते युवाओं के साथ भी यही धोखा होना तय है, इसलिए हिंदूवाद की राजनीति से हिंदुओं को बदनामी के आलावा कोई फायदा होने वाला नहीं है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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