हुत से कलश टूट गए हैं, लेकिन इस सबके बावजूद हमारे हौंसले टूटे नहीं हैं

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योगेन्द्र यादव 

दिल्ली उच्च न्यायलय ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई और हम सब साथियों को बिना शर्त रिहा कर दिया है |

हमने मजिस्ट्रेट साहिबा को बताया कि हमें किस तरह बर्बरता से बिना किसी दोष के जंतर मंतर से उठा लिया गया | हमारे साथ ३ नवयुवक थे, जो अभी १८ वर्ष के भी नहीं हैं, उनके साथ भी दिल्ली पुलिस ने अमानवीय व्यवहार किया |

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हमें खाना न देना, धक्का-मुक्की करना, सब बताया | साथ ही हमारे किसानों कि अस्मिता का प्रतीक हमारा हल भी पुलिस वाले उठा कर ले गए थे | हमने गुज़ारिश  कि है कि वो हल भी हमें वापिस दिया जाए |

हम तो आज़ाद हो गए आज लेकिन हमारे सम्मान का प्रतिक ‘हल’ अभी भी बंधन में है ग़ुलाम है| हमने अपनी रिहाई नहीं मांगी थी, हम इस देश के किसान की रिहाई माँगते हैं क़र्ज़ से,अत्याचार से,शोषण से|

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देश भर से अपने खेतों कि पवित्र मिटटी के कलश को भी पुलिस वालों ने नहीं बक्शा | बहुत से कलश टूट गए हैं | लेकिन इस सबके बावजूद हमारे हौंसले टूटे नहीं हैं | हम और मज़बूत हुए हैं | अभी हम सब मंदिर मार्ग थाने से संसद मार्ग थाने तक पैदल मार्च कर रहे हैं |

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