हुत से कलश टूट गए हैं, लेकिन इस सबके बावजूद हमारे हौंसले टूटे नहीं हैं

0
>

योगेन्द्र यादव 

दिल्ली उच्च न्यायलय ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई और हम सब साथियों को बिना शर्त रिहा कर दिया है |

हमने मजिस्ट्रेट साहिबा को बताया कि हमें किस तरह बर्बरता से बिना किसी दोष के जंतर मंतर से उठा लिया गया | हमारे साथ ३ नवयुवक थे, जो अभी १८ वर्ष के भी नहीं हैं, उनके साथ भी दिल्ली पुलिस ने अमानवीय व्यवहार किया |

Also Read:  प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट उर्दू में नहीं है, क्या ये मुसलमानों से जुड़े मुद्दों को दूर करने का प्रयास तो नहीं?

हमें खाना न देना, धक्का-मुक्की करना, सब बताया | साथ ही हमारे किसानों कि अस्मिता का प्रतीक हमारा हल भी पुलिस वाले उठा कर ले गए थे | हमने गुज़ारिश  कि है कि वो हल भी हमें वापिस दिया जाए |

हम तो आज़ाद हो गए आज लेकिन हमारे सम्मान का प्रतिक ‘हल’ अभी भी बंधन में है ग़ुलाम है| हमने अपनी रिहाई नहीं मांगी थी, हम इस देश के किसान की रिहाई माँगते हैं क़र्ज़ से,अत्याचार से,शोषण से|

Also Read:  राष्ट्रवादी पत्रकारिता के दौर में 60 नवजातों की मौत पर एक पत्रकार की पीड़ा

देश भर से अपने खेतों कि पवित्र मिटटी के कलश को भी पुलिस वालों ने नहीं बक्शा | बहुत से कलश टूट गए हैं | लेकिन इस सबके बावजूद हमारे हौंसले टूटे नहीं हैं | हम और मज़बूत हुए हैं | अभी हम सब मंदिर मार्ग थाने से संसद मार्ग थाने तक पैदल मार्च कर रहे हैं |

Also Read:  दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा आप हमें यातायात पुलिस बना रहे हैं, अदालत पर थोड़ी दया कीजिए

A version of this first appeared on the author’s FB wall and twitter timeline.

NOTE: Views expressed are the author’s own. Janta Ka Reporter does not endorse any of the views, facts, incidents mentioned in this piece.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here