मीडिया की दुकान, लोगों की चौथे स्तम्भ से अपेक्षाएं

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ऋचा वार्ष्णेय 

मीडिया यानी दूरसंचार,एक ऐसा माध्यम जो हमे देश विदेश से जुड़ी हर सूचना को हम तक प्रसारित करता है. रेडियो, टीवी और स्मार्टफोन्स के जरिये वह कोई भी सूचना चाहे खेल,विज्ञान,अविष्कार,मौसम या शिक्षा और राजनीति देश विदेश में हो रही हर छोटी से छोटी जानकारी से हमे अवगत करना इसका मुख्य कार्ये है.

राजनीति में मीडिया का प्रभाव बहुत ही शक्तिशाली है क्यूंकि सभी देश वासी जाकर अपने सवालो को नही पूछ सकते तो उनके बीच में सेतु का कार्य करती है मीडिया और जनता द्वारा उठाये हुए प्रश्नो को पूछती है, और हाँ अगर कोई नेता अपने किये हुए वादे को भूल जाये तो मीडिया को हक़ है कि वो देशवासियों की आवाज़ बनकर उनसे पूछे कि उनके कहे हुए कार्यो का व्योरा दे जिससे देशवासी सूचित हो.

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इसलिए शायद इसे देश का चौथा स्तम्भ कहते है परन्तु सारे कार्यो के बीच ये बात ध्यान में रहे कि मीडिया का कार्ये तटस्थ रहकर सारी खबरो को हम तक लाना है न कि एक ज़ज़ कि भांति अपना निर्णय सुनाना है या किसी भी व्यक्ति पर किसी भी तरह का आरोप रोपण करना हो सकता है क्यूंकि आपका लगाया हुआ एक आरोप उस व्यक्ति के जीवन को धूमिल कर सकता है भले ही वो आपके लिए सिर्फ एक छोटी सी भूल होगी.

सवाल पूछते वक़्त ध्यान रहे कि उससे कोई भी व्यक्ति मानसिक रूप से प्रताड़ित न हो जैसा नेपाल में हुए प्राकृतिक आपदा के वक़्त हुआ कि एक भारतीय रिपोर्टर ने एक माँ से पूछा ” आपकी बेटी मर गयी आपको कैसा लगा ”

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इस तरह के संवेदनहीन सवालो को पूछकर हम सब को शर्मशार न करे और सबसे जरुरी है कि मीडिया किसी भी व्यक्ति या पार्टी से प्रभवित न हो वर्ना जो मीडिया देश को उत्थान की और ले जा सकती है व्ही पतन भी करा सकती है. हो सकता है किसी मीडिया कर्मी कि किसी पार्टी के प्रति कोई व्यक्तिगत शत्रुता या मित्रता हो परन्तु उसकी मानसिकता का उसकी सूचनाओ पर प्रभाव नही होना चाहिए.

ध्यान रहे खेत में हल चलाने वाला किसान आपको सच मान कर अपने देश का भाग्य विधाता अथवा अपना राजनितिक प्रीतिनिधि चुनता है ये सोच कर कि वो आने वाले समय में देश को विकास की और ले जायेगे लेकिन आपके व्यक्तिगत कारणों की वजह से वह आपके पसंद का व्यक्ति चुन लेता जो अक्षम है सो आपके द्वारा दी गयी गलत जानकारी न सिर्फ उस व्यक्ति को अँधेरे में रखेगी अपितु देश को गर्त में ले जायेगी और उसके जिम्मेदार आप होगे इसलिए ध्यान रहे कि मीडिया किसी व्यापारी या राजनितिक दल द्वारा न चलाया जाये अन्यथा वह मीडिया नही वल्कि उन् लोगों की दूकान कहलाएगी जो उनकी दूकान के सामान को अच्छा और सामने वालो को ख़राब ही दिखाएगी.

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NOTE: Views expressed are the author’s own. Janta Ka Reporter does not endorse any of the views, facts, incidents mentioned in this piece.

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